सदियों तक याद रहेगा IFEFA 2014

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हिन्दी फिल्मों के 100 साले के इतिहास पर नजर डाले तो अनगिनत ऐसी फिल्में हैं जो अपने आप में मील का पत्थर बन गई। मदर इंडिया, मुगले आज़म, प्यासा, बैजू बाबरा, शौले, हम आपके हैं कौन, दिलवाले दुल्हिनयां ले जायेगें। ऐसी लाखों फिल्मों ने लोगों के दिलों पर राज किया और हमारे संस्कारों के साथ रच-बस गई।

 

मगर एक बहुत खूबसूरत ख्वाब देखा गया सिडनी, आस्ट्रेलिया में। जहां की धरती अलग, रहन सहन अलग, भाषा अलग..पर वहां रहने वालों के दिलों में बसा हिन्दी फिल्मों का प्यार बिल्कुल वैसा है, जैसा दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले उस शख्स का है, जो बॉलीवुड का दीवाना है, चाहने वाला है।
7 नवंबर से 16 नवंबर 2014 तक होने जा रहे IFEFA की बात करें तो बस थोड़े दिन बचे हैं पर सिडनी के हर रहने वाले की जुबान पर IFEFA का नाम है। टिकट खरीदने के लिए लंबी लंबी कतारें ऐसे लग रही है जैसे कभी हमारी हिन्दी फिल्मों की गोल्डन जुबली पर लगा करती थी।

 

अमरिन्दर बाजवा का कहना है कि हमने एक प्रयास किया है। उस जज्बें को साकार करने का जो यहां के लोगों की आंखो और दिलों में धड़कता है। यहां के लोग मेहनतकश हैं। उनकी भारतीयता और देशप्रेम उतना ही गहरा है जितना हर हिन्दुस्तानी का है। और वो सब बॉलीवुड स्टारस और फिल्मों के जबरदस्त फैन हैं। सो उनकी भावनाओं की कदर करते हुये IFEFA 2014 समर्पित है, उन्हीं लोगों को, जो सिडनी में रहते जरूर हैं, पर रगों में लहु के साथ बॉलीवुड बहता है।

 

हम आशा करते है कि IFEFA 2014 एक ऐसा मील का पत्थर बनेगा कि आने वाले समय में लोग इसकी मिसाल देगें। और हर वर्ष सिडनी में फिल्मों का यह मेला इसी तरह परवान चढेंगा।
(लेखक हरविन्द्र मांकड़)


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