INTERVIEW: अब सेक्स, कंडोम, पीरियड तथा प्रेग्नेंसी जैसी बातों से अपने बच्चे को परिचित करवाना जरूरी हो गया है’ – आनंद तिवारी

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इन दिनों वेब सीरीज का तेजी से चलन हुआ है। यूट्यूब पर बड़े बड़े बैनर्स और डायरेक्टर्स अपनी शॉर्ट वेब सीरीज बना रहे है। यशराज बैनर भी अब इन सीरीज की तरफ आकर्शित हुआ है। यशराज ने वेब सीरीज की शुरूआत एक्टर डायरेक्टर आंनद तिवारी के डायरेक्शन में एडल्ट सीरीज ‘बैंग बाजा बारात’ से की थी। इसके बाद इस बैनर पर और भी सीरीज आई। हाल ही में यशराज ने वेब सीरज ‘ पापा और पप्पू’ पेश की है। इस सीरीज में एक छह साल के बच्चे के द्धारा सेक्स से जुड़े सारे प्रोसिजर्स पर बात की गई है। लिहाजा उसके पापा उसे सेक्स के हर पहलू से परिचित करवाता है। एक बच्चों से सेक्स जैसेे विषय पर बात करना कितना उचित है। इस सीरीज के प्रोड्यूसर एक्टर आंनद तिवारी से इस विषय को लेकर एक बातचीत।

पहली वेब सीरीज बैंग बाजा बारातका कैसा अनुभव रहा ?

बहुत ही शानदार। शुरू में तो लोगों को उसके ट्रेलर को देखकर लगा कि ये एक फिल्म है। मैं किसी कारण प्राग गया था तो वहां भी मुझे इस सीरिज के फैन मिले। इसके बारे में मैं जवाब देते देते थक गया क्योंकि मुझे भी नहीं पता कि इसका दूसरा सीजन कब आयेगा।

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वेब सीरीज को लेकर आपका क्या कहना है ?

वेब सीरीज का प्लेटफार्म धीरे धीरे बड़ा होता जा रहा है, बहुत सारी सीरीज बन रही है। बैंग बाजा बारात को आये आठ दस महीने हुये हैं। इसके बाद से वेबवर्ल्ड काफी बड़ा हो चुका है।

आपका अपना बैनर है। आप इससे पहले भी सीरीज प्रोडयूस और डायरेक्ट कर चुके हैं। इस सीरीज को डायरेक्ट न करने की कोई खास वजह ?

क्योंकि इस बार मुझसे कहीं ज्यादा अच्छा डायरेक्टर आशीष शिंदे मिल गया। दूसरे आशीष को ही इस सीरीज का आइडिया आया था। दरअसल एक बार उसके पांच छह साल के बेटे ने सेक्स को लेकर उससे कुछ ऐसा पूछ लिया था जिसका जवाब वो उस वक्त नहीं दे पाया था। इसके बाद उसने इस पर लिखना शुरू किया, बाद मैं उसके साथ राइटिंग में तो इन्वाल्व हुआ लेकिन मुझे डायरेक्शन और एक्टिंग दोनों एक साथ करना पसंद नहीं है। इसलिये इस बार मैने सिर्फ एक्टिंग की है।

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आदित्य चोपड़ा का सीरीज को लेकर क्या सोचना था ?

हमने जब आदि सर को ये कॉन्सेप्ट सुनाया तो उन्हें पहली बार में ही काफी दिलचस्प लगा। बाद में हमने बाकायदा उन्हें पांचों एपिसोड नरेट किये। दरअसल आदि सर काफी इन्क्रेजिंग प्रोडयूसर है। इसलिये इस सीरीज का सारा श्रेय आदि सर और आशीष शिंदे को जाता है क्योंकि वे इस सीरीज में एन्टरटेन ही नहीं कर रहें बल्कि एक बहुत ही दिलचस्प टॉपिक पर बात भी कर रहे हैं।

वेब सीरीज के बजट को कैसे मैन्टेन किया जाता है ?

इसका बजट बहुत ही सीमित होता है। सारे कलाकार जो इसमें काम कर रहे हैं चाहे वो सचिन पिलगांवकर हों, संजीदा हों या अल्का हों या फिर कबीर हो। उन सबके मार्केट रेट बहुत हाई हैं, जिसे हम कभी भी अफोर्ड नहीं कर पाते, लेकिन उन सभी ने इस सीरीज का चुना क्योंकि इसका धेय रूपये पैसे से बहुत बड़ा था। अगर बजट वाइज हम देखेंगे तो इसका कोई गणित नहीं बैठता क्योंकि वो बहुत ही कम होता है।

कितने एपिसोड हैं और उन्हें कितने दिन में शूट किया गया ?

पांच एपिसोड हैं जो प्रेग्नेंसी, पीरियड, प्रोसिस,गे तथा कंडोम आदि को लेकर हैं। और इन्हें नो दिन में फिल्माया गया।

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क्या आपको लगता है कि इन सारी एडल्ट बातों में एक छह साल के बच्चे को इन्वॉल्व करना ठीक था ?

मैं मानता हूं कि ये थोड़ा रिस्की तो था लेकिन जिस प्रकार आशीष ने अपने अनुभव बताये और उसे लिखा। और जिन दिनों हम इसे लिख रहे थे तो आइपीएल चल रहा था और उसके बीच जो एड आ रहे थे उन्हें लेकर मेरा छोटा सा भतीजा मुझसे उन विज्ञापनों को लेकर जिस तरह काफी दिलचस्प सवाल पूछ रहा था, वो सब सोचने पर मजबूर कर रहा था। दूसरे आज न्यूज चैनल या टीवी और फिल्मों में हम कैसी भाषा यूज कर रहे हैं उसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है ये हम नहीं सोचते। यहां हम एक बच्चे के द्धारा बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हम मीडिया में किस चीज से एक्सपोज कर रहे हैं अपने बच्चों को। हम ये भी नहीं कह रहे कि वो ऐसा न करें क्योंकि ये बहुत बड़ी बहस का मुद्दा है। हम तो सिर्फ अपने बच्चों को तैयार कर रहे हैं कि वो अगर हमसे इस बारे में कोई सवाल करते हैं तो हम उनके सवाल का जवाब देने के लिये तैयार रहें न कि उन्हें चुप कराने की कोशिश करें। वरना वे भी अंजाने में कहीं कंडोम का गुब्बारा समझ कर फुलाने न लग जाये ।


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Mayapuri

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