‘एंग्री इंडियन गॉडेसेस’ फेम निर्देशक पैन नलिन की गुजराती भाषा की फिल्म ‘द लास्ट फिल्म शो’ (गुजराती शीर्षक: छेलो शो) ने जीता ट्रिबेका अवॉर्ड

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रॉबर्ट डी नीरो संचालित  ट्रिबेका फिल्म समारोह के 2वें संस्करण में पैन नलिन की नई गुजराती भाषा की फिल्म ‘‘द लास्ट फिल्म शो’’ को दूसरे ऑडियंस अवॉर्ड से नवाजा गया.यह पहली भारतीय और गुजराती भाषा की फिल्म है, जिसे यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिला है. इतना ही नहीं गुजराती भाषा की फिल्म होने के बावजूद इसे जर्मनी, जापान, इजराइल, पुर्तगाल व स्पेन में प्रदर्शन के लिए खरीदा जा चुका है।

‘समसारा’, ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ और ‘एंग्री इंडियन गॉडेस’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बना चुके लेखक व निर्देशक पैन नलिन पहली बार गुजराती भाषा की फिल्म ‘लास्ट फिल्म शो’ लेकर आए हैं, जिसे अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. इस पर खुद पैन नलिन ने कहा, ‘‘फिल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दर्शक पुरस्कार हैं. हम हैं इस विश्वास से परे रोमांचित कि ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में ‘द लास्ट फिल्म शो’ ने ऑडियंस अवॉर्ड का दूसरा पुरस्कार जीता है. हमें यह जानकर हैरानी होती है कि यह पहली बार गुजराती फिल्म और एक भारतीय फिल्म है, जो कि विदेशी फिल्म समारोह मेे इस मुकाम पर पहुंच गई है! अमरीकी दर्शकों ने कई स्टार-स्टडेड मल्टी- मिलियन डॉलर स्टूडियो में ‘लास्ट फिल्म शो’  को चुना है. अंतर्राष्ट्रीय मंच पर गुजराती प्रतिभाओं के लिए यह एक अद्भुत उपलब्धि और ऐतिहासिक क्षण है. मैं वास्तव में श्री रॉबर्ट डी नीरो, जेन रोसेन्थल, कारा कुसुमानो और ट्रिबेका में सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं. हमें उम्मीद है कि ‘लास्ट फिल्म शो’ जो कि एक प्रेम पत्र है, ट्रिबेका फेस्टिवल की बदौलत पूरे विश्व में पहुंचेगी।”

पैन नलिन लिखित और निर्देशित फिल्म ‘‘लास्ट फिल्म शो’’ (गुजराती में ‘छेलो शो’) का निर्माण धीर मोमाया (जुगाड़ मोशन पिक्चर), नलिन (मानसून फिल्म्स) और मार्क ड्यूले (स्ट्रेंजर 88) द्वारा वर्जिनी लैकोम्बे (वर्जिनी फिल्म्स) और एरिक ड्यूपॉन्ट (गुप्त फिल्में) के साथ सह-निर्माण में किया गया है. जर्मनी, जापान, स्पेन, इजराइल, पुर्तगाल के फिल्म वितरकों ने इस फिल्म को प्रदर्शित करने के अधिकार ले लिए हैं. पूरे विश्व में इस फिल्म का प्रदर्शन फ्रांस की कंपनी ‘‘ऑरेंज स्टूडियो’’ द्वारा किया जाएगा।

आंशिक रूप से आत्म कथात्मक फिल्म ‘द लास्ट फिल्म शो’ को पैन नलिन ने पश्चिमी भारत के सौराष्ट्र, गुजरात में फिल्माया है. इसकी कहानी भारतीय सिनेमाघरों की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें सेल्युलाइड से डिजिटल में बड़े पैमाने पर संक्रमण देखा जा रहा है. जहां सैकड़ों सिंगल-स्क्रीन सिनेमा या तो खंडहर में हैं या पूरी तरह से गायब हो गए हैं।

फिल्म नौ साल के लड़के के समय की है. जिसका जीवन गैलेक्सी सिनेमा में अपनी पहली फिल्म देखने के बाद उल्टा हो जाता है. उन्हें अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध फिल्मों से प्यार हो जाता है. समय प्रोजेक्शनिस्ट फजल के साथ एक सौदा करता है, जो उसे अपने लंचबॉक्स की सामग्री खाने के बदले में मुफ्त में फिल्में देखने देगा.फिल्मों के लिए खाने का सौदा धीरे धीरे एक प्यारी दोस्ती में बदल जाती है. लेकिन फिर दिल तोड़ने वाली घटना घटती है।

धीर मोमाया कहते हैं- “यह बेहद उत्साह की बात है कि शोचिकू ने जापान के लिए फिल्म हासिल कर ली है.‘सिनेमा का एक बड़ा शौकीन होने के नाते, मैं शोचिकू लोगो को देखकर बड़ा हुआ हूं, जो कुरोसावा, मिजोगुची, ओजू, नारुसे, यामाडा, कोबायाशी जैसे महान उस्तादों की फिल्मों की शुरुआत से पहले रोमांचकारी उत्साह पैदा करते हैं … जैसा कि ‘द लास्ट फिल्म शो‘ एक प्यार है. सिनेमा को प्रेम पत्र व  शोचिकू से जुड़ना मेरे लिए, निर्देशक पान नलिन और पूरी टीम के लिए गर्व और खुशी की बात है. ऐसा लगता है कि हमें अपनी फिल्म के लिए जापान में सबसे अच्छा घर मिल गया है।”

पैन नलिन कहते हैं- “जापान, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और इजराइल द्वारा ‘द लास्ट फिल्म शो‘ का अधिग्रहण इसे सार्वभौमिक बनाता है और हमारे मिशन का हिस्सा पूरा करता है कि हमारी कहानी स्थानीय है, लेकिन यह निश्चित रूप से वैश्विक दर्शकों का मनोरंजन करेगी।”


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Mayapuri

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