‘‘हम सीरियल ‘सिंहासन बत्तीसी’ के माध्यम से लोगों को शिक्षा दे रहे हैं..’’ -अनुज कपूर

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-अनुज कपूर, सीनियर एक्ज्युकेटिव वाइस पे्रसिडेंट एंड बिजनेस हेड ‘‘सोनी पल’’और ‘‘सब टीवी’’चैनल

सोनी टीवी का नया चैनल‘‘‘सोनी पल’’हाल ही में शूरू हुआ है, जिस पर धीरज कुमार निर्मित सीरियल‘‘सिंहासन बत्तीसी’’बहुत कम समय में अति लोकप्रिय हो चुका है.इस सीरियल और चैनल को लेकर ‘‘सोनी पल’’के सीनियर एक्ज्युकेटिव वाइस पे्रसिडेंट एंड बिजनेस हेड अनुज कपूर से हुई बातचीत इस प्रकार रही…

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आरोप लगता रहता है कि चैनल के कर्ताधर्ता सीरियल के निर्माता के काम में दखलंदाजी करते हैं. आपकी क्या भूमिका होती है?
-दखलंदाजी करना मेरा स्वभाव नही है.चैनल की तरफ से हमारी भूमिका सिर्फ सुपरवाइजर की होती है. हम दूसरों के बारेे में नहीं जानते. पर हमारा अपना मानना है कि जब हम किसी सीरियल के निर्माण के लिए किसी निर्माता की सेवाएं लेते हैं, तो उसे रचनात्मक स्तर पर काम करने के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए. हम यही भूमिका धीरज कुमार जी के साथ भी निभा रहे हैं.
पर टीआरपी का फंडा?
-टीआरपी और सीरियल की गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव धीरज कुमार जी पर है. क्योंकि यह सीरियल सोमवार से शनिवार यानी कि छह दिन प्रसारित होता है. इसमें स्पेशल इफेक्ट्स भी है. हर दिन एक एपीसोड बनाकर देना आसान नहीं. पर वह हर दिन एक अच्छा एपीसोड बनाकर हमें दे रहे हैं और लोग पसंद कर रहे हैं.टीआरपी अच्छी आ रही है.हमें धीरज कुमार और उनकी पूरी टीम पर पूरा भरोसा है कि वह इसी तरह से अच्छा काम करते रहेंगे.
इन दिनों चैनल ‘जिंदगी’पर 13 से 26 एपीसोड के सीमित एपीसोड की कहानियाँ वाले सीरियल प्रसारित हो रहे हैं. आपको यह टे्ंड कैसा लग रहा है?
-मुझे लगता है कि यह एक अच्छा टे्ंड चल रहा है कि हम कम अंतराल की कहानी के सीरियल प्रसारित करें. हम उतनी ही कहानी खूबसूरती के साथ कहें, जितनी है. सिर्फ अच्छी टीआरपी मिल रही है, इस लालच में उस कहानी को खींचते ना रहें. टीआरपी के चक्कर में लोग अच्छी भली कहानी में कुछ न कुछ ठूंस कर कहीं से कहीं ले जाते हैं.यह नहीं होना चाहिए.
पर आरोप लगता है कि आप लोग सीरियल की कहानी को खींचते रहते हैं?
-देखिए, हमारे चैनल ‘सोनी पल’को शुरू हुए एक माह हुआ है. यदि आप ‘सब’ टीवी की बात कर रहे हैं, तो उसके बारे में फिर कभी बात कर लेंगे. अभी तो हम लोग ‘सोनी पल’ और सीरियल ‘सिंहासन बत्तीसी’ की बात कर रहे हैं.
‘सब’ टीवी पर भी कभी आप ‘लापतागंज’ ले आते हैं. कभी ‘एफआई आर’ ले आते हैं. यह सब क्या हो रहा है?
-‘लापतागंज’ को हम दो बार लेकर आए. जबकि आपको पता होगा कि पूरे विश्व में जहां भी ‘सिटकाॅम’ बनते है,यहां तक कि अमरीका में भी 26 एपीसोड का एक सीजन होता है. और बे्रक देकर वह कई सीजन लेकर आते हैं. उनके यहां हर सीरियल के 10 से 15 सीजन आते हैं. हम तो सिर्फ दो ही सीजन लेकर आए हैं. हम ‘एफ आइ आर’ के भी तीन सीजन लाए हैं. ऐसा पूरी दुनिया में हो रहा है.
यानी कि आप अमरीका की नकल करना चाहते हैं?
-हम नकल कहां कर रहे हैं. वह लोग हफ्ते में सिर्फ एक एपीसोड प्रसारित करते हैं. हम तो हर दिन एक एपीसोड प्रसारित करते हैं. हमने अमरीका को दिखाया है कि डेली काॅमेडी सीरियल प्रसारित करना संभव है. हमने उन्हें दिखाया है कि बिना किसी बे्रक के लगातार प्रसारित होते हुए काॅमेडी सीरियल ‘‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’’पूरे 1700 एपीसोड दे सकता है. अमरीका वालों को तो यह बात पता ही नहीं थी कि ऐसा भी हो सकता है. अमरीका वाले ‘रेमंड’ के 26 एपीसोड के दस सीजन यानी कि 260 एपीसोड बनाकर फूले नहीं समा रहे थे. हमने तो बकायदा विज्ञापन देकर कहा है कि ‘सब’ टीवी विश्व का नंबर वन काॅमेडी चैनल है.पर अब आइए, हम बात ‘सिंहासन बत्तीसी’ की करें, तो ज्यादा अच्छा होगा.

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सीरियल‘‘सिंहासन बत्तीसी’’को टेलीकास्ट करने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
-इस सीरियल को प्रसारित करने की सबसे बड़ी वजह यह है कि हम सभी भारतीय धार्मिक हैं. इसके अलावा हम बचपन से इस तरह की कहानियों को अपनी दादीयों के मुंह से सुनते आए हैं. हम सभी चंदामामा या अमर चित्र कथा जैसी काॅमिक बुक्स पढ़ते हुए बड़े हुए हैं. तो यह कहानियां हमारे दिमाग में कहीं न कहीं घूमती रहती हैं.आज की तारीख में हमारे बच्चों के पास दादी मां से कहानियां सुनने के लिए समय नहीं होता.तो आज के युग में टीवी चैनल ही दादी मां का काम कर रहे हैं. वही कहानियां हम इस सीरियल के माध्यम से सुना रहे हैं, जो दादीमां सुनाती रही हैं. देखिए, हमें अपना अतीत हमेशा प्यारा लगता है. हम सभी अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं.हम भले ही काम करने के लिए बनारस से मुंबई आ गए हों, पर जब हम बनारस पहुंचते हैं, तो हमें वहां ज्यादा सुकून मिलता है. मेरे कहने का अर्थ यह है कि जब हम ‘सिंहासन बत्तीसी’ जैसा सीरियल देखते हैं, तो हमें अपने बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. यदि आप धर्म के प्रति समर्पित हैं, तो वह सारा मसला भी आपके सामने आ जाता है. मेरा मानना हैं कि धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण वाला यह पहला बड़ा सीरियल है.
आपने इस सीरियल को टेलीकास्ट करने के लिए हामी भरते समय क्या सोचा?
-हम अपने दर्शकों को हमेशा कुछ नया परोसना चाहते हैं. जैसे ही धीरज जी ने हमें यह काॅंसेप्ट सुनाया, हमें लगा कि हम इस सीरियल के माध्यम से दर्शकों का ना सिर्फ मनोरंजन कर रहे हैं,बल्कि हम उन्हें यह भी शिक्षा दे रहे हैं कि एक आदर्श पुरूष होने के लिए उनमें किन बत्तीस गुणों का होना आवष्यक है. आज इस माॅडर्न युग में जहां लोग अपने अंदर नहित गुणों की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं, वहां यह सीरियल कितना बड़ा सन्देश दे रहा है. लोग शोहरत,यश, कीर्ति,पैसा, ख़ुशी आदि पाने की अंधी दौड़ में भाग रहे हैं.पर लोग भूल गए हैं कि असली ख़ुशी तो अंदर की होती है. इस ख़ुशी का आपको अहसास तभी होता है, जब आपके अंदर अच्छे पुरूष वाले बत्तीस गुण मौजद हों. वह गुण क्या हैं अैर उन्हें किस तरह से अपने अंदर विद्यमान किया जाए,यह बात यह सीरियल बड़ी खूबसूरती से बताता है.
‘‘सिंहासन बत्तीसी’’को लेकर क्या कहेंगे?
-सीरियल ‘‘सिंहासन बत्तीसी’’ राजा विक्रिमादित्य और उनके सिंहासन की कहानी है, जिसमें इस सिंहासन का बखान करने वाली 32 पुतलियां यानी कि एंजेल्स हैं. यह 32 गुण हैं. जो आज भी हमारे समाज में, हमारे लोगों में विद्यमान हैं. हम भले ही उन्हें भूल चुके हो.हम इस सीरियल के माध्यम से उन्ही गुणों को फिर से एक बार उजागर करना चाहते हैं. राजा विक्रमादित्य हों या राजा भोज हों, इनमें यह सारे गुण मौजूद थे. राजा विक्रमादित्य और राजा भोज ऐतिहासिक पात्र हैं और इन्ही के साथ महामाया यानी कि मुख्य पुतली की भी कथा है. जो कि सर्वगुण सम्पन्न है. यह पहला धारावाहिक है, जिसमें इतिहास के साथ साथ धर्म व फैंटसी को भी समाहित किया गया है. सूर्य और शनि के बीच छिड़ी जंग में जब राजा विक्रमादित्य कहते हैं कि ‘हमेशा पिता बड़ा होगा’, तो वहीं से कहानी शुरू होती हैं. भगवान इंद्र द्वारा विक्रमादित्य को एक सिंहासन दिया जाता है. राजा विक्रमादित्य की मौत के 1100 साल बाद उस सिंहासन पर राजा भोज बैठना चाहते हैं,पर उन्हें सिंहासन की रक्षा करने वाली मुख्य पुतली महामाया कि वजह से 32 गुणों पर खरा उतरने की परीक्षा देनी पड़ती है.


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Mayapuri

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