INTERVIEW!! ‘‘उन्होंने जो उस वक्त कहा था बाद में वो सच साबित हुआ’’ – अनूप जलौटा

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इन दिनों आध्यात्म चैनल पर भजन सम्राट अनूप जलौटा द्वारा प्रोड्यूस संगीत से जुड़ा शो ‘संगीत सफारी विद अनूप जलौटा’ खासा पसंद किया जा रहा है। इससे पहले करीब डेढ़ साल तक अनूप जलौटा अपने शो ‘सहर’ को लेकर बिग एफ एम पर छाये हुये थे। इस शो को लेकर क्या कहना है अनूप जलौटा का।

इस तरह का संगीत शो बनाने की वजह कमर्शियल रही या…..?

बिल्कुल नहीं। ईश्वर की दया से मैंने धन और शोहरत काफी कमा ली है। इस शो को करने का मेरा मेन मकसद है नई नई प्रतिभाओं को सामने लाना। इस शो के जरिये मैं नई प्रतिभाओं का संगीत जगत से परिचय करवा रहा हूं। इसके अलावा हर एपिसोड में उसे एक बड़े फनकार के बारे में जानने का भी अवसर मिलेगा।

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शो के बारे में विस्तार से बताना पसंद करेंगे ?

जैसा कि मैंने बताया कि नई प्रतिभाओं के अलावा हर एपिसोड में संगीत से जुड़ी एक बड़ी या प्रसिद्ध हस्ती को आमंत्रित किया है। वह यहां अपनी संगीत यात्रा के बारे में बताने के अलावा अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं से परिचित करवायेंगे। इनके अलावा हर एपिसोड में हर बार एक नया कलाकार होगा जो सारी बातें सुनते हुये अपने संगीत के ज्ञान को बढ़ायेगा और फिर अपने बारे में बतायेगा भी कि संगीत के बारे में वह कितना कुछ जानता है। यह शो आप हर शनि – रवि रात आठ बजे आध्यात्म चैनल पर देख सकते हैं।

शो में कौन कौन आ चुका है ?

यह शो दो अप्रेल से प्रसारित हो रहा है। अभी तक शो में संजीवनी, मधुश्री, पंकज उधास, इला अरूण और पामेला जैने जैसे सिंगर आ चुके हैं। इसी तरह आगे भी हर प्रकार के संगीत से जुड़ी ढ़ेर सारी हस्तियां शो में शिरकत करेंगी।

Pankaj Udhas, Anup jalota
Pankaj Udhas, Anup jalota

यह क्या शुद्ध भजन शो है ?

यह भजन शो नहीं है, यह वैसा ही संगीत शो है जैसे अन्य संगीत से जुड़े शो होते हैं। इसमें भी म्यूजिक से जुड़ी सारी चीजें है। इस शो में फिल्मों के गीत गाने वाले गायक गायिका तथा गैर फिल्मी सिंगर्स अपने अपने तजुर्बों से नई पीढ़ी को परिचित करवायेगें। इनमें उदित नारायण, सोनू निगम, अलका याज्ञनिक, साधना सरगम, कुमार सानू, पंडित जसराज या गुलाम अली आदि लोकप्रिय गायक गायिकायें शामिल होंगे।

आप इस शो के होस्ट हैं या गायक भी ?

ये तो सभी को पता है कि मैं भी एक छोटा मोटा गायक हूं और यह शो मेरे द्वारा गाये अलाप से आरंभ होता है, बीच में या कहीं जरूरत पड़ती हैं तो मैं गाता भी हूं। इसके अलावा बीच बीच में अपने बारे में और अपने से जुड़ी घटनाओं का जिक्र भी करता रहता हूं। पिछले दिनों एक एपिसोड में मैंने अपने से जुड़ी एक कहानी का जिक्र किया था। दरअसल मैं जब 1973 में मुबंई आया था तो उस वक्त तेईस या चौबीस साल का रहा होउंगा। उन दिनों दूरदर्शन पर दो प्रोग्राम आते थे आरोही तथा शामे ग़ज़ल। मुझे शामे ग़ज़ल में गाने का मौका मिला। मैंने वहां दो ग़ज़लें गाई। वह प्रोग्राम प्रसिद्ध संगीतकार सी. रामचन्द्र ने देखा और उन्होंने फोन कर मुझे अपने घर पर आमंत्रित किया।

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मैं बहुत खुश था क्योंकि मुझे लग रहा था कि अब तो जल्द ही मुझे भी फिल्मों में गाने का मौका मिलने वाला है। अगले दिन मैं उनके घर पंहुचा। उन्होंने मुझे पहले बैठाया और फिर कहा कि कभी फिल्मों में गाने के लिये ट्राई मत करना, क्योंकि तुम्हें तो वैसे ही बहुत लोग सुनने वाले हैं। मैं उनकी बात सुन कर हैरान था कि क्या कह रहे हैं मैं तो मुबंई आया ही इसलिये हूं कि आगे मुझे फिल्मों में गाना है और ये कह रहे हैं कि फिल्मों में मत गाना। मैं गुस्से में वहां से निकल आया। रामचन्द्र जी उस वक्त मुझे विलेन की तरह दिखाई दे रहे थे। सोचिये कि वह कितने बडे दूरदर्शी थे क्योंकि उन्होंने जो उस वक्त कहा था वह बाद में बिल्कुल सच साबित हुआ।


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Mayapuri

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