INTERVIEW: ‘वे मेरे और अक्षय कुमार के सौ में से निन्यानवे सजेशन रिजेक्ट कर देते हैं’ – अनुपम खेर

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आधुनिक तकनीक ने पूरी दुनिया को समेट कर रख दिया है। एक वक्त था जब किसी दूर दराज के रिश्तेदार या पेरेन्ट्स के हाल चाल पूछने के लिए या तो  खत लिखा जाता था या फिर ट्रंककाल की जाती थी। लेकिन अब फेसबुक, व्हाट्सअप, ट्विटर या इस्टाग्राम आदि कितनी ही सुविधाओं ने सभी को करीब लाकर रख दिया है। अनुपम खेर अगर इन सारी चीजों की पैरवी करते हैं तो उनके बेजा इस्तेमाल से परेशान भी हो जाते हैं। हाल ही में फिल्म ‘नाम शबाना’ के लिए उनसे हुई बातचीत में फिल्म के अलावा अन्य बातें ज्यादा हुई , जैसे…..

 आज आप भी फेसबुक, ट्विटर या व्हाट्सअप का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं ?

हां, डेफिनेटली, मैं इन सारी चीजों का लुत्फ उठा रहा हूं।  इसके फायदे बहुत हैं। इनके द्धारा आपको दुनिया जहान की ऐसी बातों का पता चलता है जिनके बारे में या तो आप जानते तक नहीं या फिर आपने उनके बारे में सुना तक नहीं होगा। अब जैसे पिछले दिनों मेरा जन्मदिन था, तो मुझे प्रषंसकों के अलावा ऐसे लोगों से भी बधाई मिली जिनसे मिले या उन्हें देखे सालों हो गये। लेकिन जंहा इस तकनीक के फायदे हैं वहीं कुछ नुकसान भी हैं। जैसे कुछ लोग खांमहाखां फेसबुक पर मेरी दादी की शक्ल आपकी दादी से मिलाते हैं या मैंने आज ये खाया और ये खिलाया जैसी बेमकसद बातें लिख कर खीज पैदा करते रहते हैं। इसके अलावा कुछ लोग वैसे किसी को हाय हैल्लो तक नहीं करेंगे लेकिन व्हाटसअप पर उनका सुबह सुबह  एक फूल के साथ गुड मार्निगं लिखा दिखाई दे जायेगा। इस विषय में एक किस्सा बताना चाहूंगा कि मेरे तायाजी का बेटा जिसका नाम सुनील खेर है रोजाना मुझे थोक के भाव हाय हैल्लो भेजता रहता था, एक दिन तो उसने हद ही कर दी यानि मुझे एक दिन में तीस बार हाय हैल्लो के मैसेज भेजे, तो इस बार मैंने उसे कहा कि यार तू मुझे अपने ग्रुप से निकाल दे और मुझे माफ कर दे। हालांकि वो मेरी बात से नाराज हो गया और मैं उस दिन से सुखी हो गया। लेकिन अभी  भी वो माना नहीं हैं, अभी भी  उसके मैसेज जारी है लेकिन अब दिन में सिर्फ दो या तीन मैसेज ही आते हैं।anupam kher

आपको नहीं लगता कि इस तकनीक का  गलत इस्तेमाल हो रहा है क्योंकि कुछ लोग इसके द्वारा नगेटिविटी बढ़ाने का काम कर रहे हैं ?

देखिये, आपको वही दिखाई देता है जो आप देखना चाहते हैं। नगेटिविटी की बात की जाये वो तो आपके पड़ोस में भी हो सकती है, वहां कोई आपको देखकर बोलता रहता होगा कि अच्छा, अपने आपको बहुत बड़ा पत्ऱकार समझता है किसी दिन बड़े चक्क्र में फंसेगा तो पता चलेगा। अगर नगेटिविटी पर ध्यान दिया जाये तो इंसान का बच्चा कुछ भी न करें। मैं जब इस शहर में आया था तो लोग कहते थे कि इसका कुछ नहीं हो सकता, इसके तो बाल भी झड़ गये, अब ये क्या करेगा । इसके बाद सारांश मिली तो लोगों ने कहा कि इसने तो शुरूआत ही बूढ़े रोल से की है अब आगे तो ये यही करेगा।  लेकिन मैंने अपने आपको हमेशा पॉजिटिव बनाये रखा। आप भी हमेषा पॉजीटिव सोचो और अपने काम में  ध्यान लगाओ। हां अगर कोई ज्यादा ही पंगा लेने की कोशिश करें तो फिर उसे उसी की भाषा में समझा भी दो। मेरे साथ भी ऐसा हुआ जब किन्हीं दो लोगों ने मुझे गाली दी तो मैंने उन्हें ब्लॉक कर दिया।

आप उन अभिनेताओं में से एक हैं जो जैसे पर्सनल हैं पर्दे पर भी ऐसे ही दिखाई देते हैं ?

दरअसल मैं अपने साथ अनुपम खेर को लादकर नहीं चलता। आप नार्मल वे में ज्यादा बढ़िया जिन्दगी गुजार सकते हैं। वरना तो खासकर हमारी लाइन में लोग हमेशा एटिट्यूट से भरे रहते हैं।anupam kher_with team_naam shabana

आप हमेशा नीरज पांडे की फिल्मों का हिस्सा होते ही है, सेट पर आपकी कितनी सलाह मानी जाती हैं ?

आपको ऐसा लगता है लेकिन ऐसा नहीं है। नीरज ऐसे डायरेक्टर है जो स्क्रिप्ट के हिसाब से ही शूट करते हैं। मैं और अक्षय उन्हें लगातार सजेशन देते रहते हैं लेकिन वे सौ में से निन्यानवे सजेशन रिजेक्ट कर देते हैं। सौ वां सजेषन भी वे हमारा दिल रखने के लिये मान लेते हैं।

आप उनके साथ पहली फिल्म से हैं, इस दौरान उनमें कितना बदलाव आया है ?

उन्हें यहां बारह साल हो गये हैं। पहली फिल्म के बाद जितना किसी आदमी को बदलना चाहिए वही बदलाव उनमें भी आये हैं। पहली ही फिल्म में उन्होंने अपनी काबलियत से अवगत करवा दिया था लिहाजा शायद उनका यही कहना होगा कि मैंने अपना काम दिखा दिया है इस हिसाब से मुझे अब सीरियसली ले लेना चाहिए।anupam kher_taapsee Pannu

चलते चलते फिल्म के बारे में भी कुछ बता दीजिये ?

‘नाम शबाना’ पिछली फिल्म बेबी का प्रिक्वल है। आई होप आगे भी सबके नाम पर एक फिल्म बने। जैसे मैं फिल्म में शुक्ला नामक ऐजेंट हूं। हो सकता है कल इस नाम पर भी फिल्म बनाने के लिए सोचा जाये। वैसे ये हैं तो दूर की कोड़ी लेकिन कहने में क्या फर्क पड़ता है। फिलहाल तो यहां शबाना लक्की निकली। शबाना के किरदार में तापसी पन्नू ने जो कमाल का एक्षन किया है जो फिल्मी न हो कर असली है। इसे आप महिला प्रधान फिल्म कह सकते हैं, इसके अलावा ऐसी ही एक और महिला प्रधान फिल्म ‘ इन्दू सरकार’ भी मैं कर रहा हूं।

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Mayapuri