INTERVIEW: मै एक ऐसे बैकग्राउंड से आती हूँ जहां…. – अनुष्का शर्मा

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लिपिका वर्मा 

अनुष्का शर्मा ने बहुत ही कम समय में बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना  एक अच्छा खासा मुकाम बना लिया है। अच्छे किरदार तो अनुष्का कर ही रही है, किन्तु फ़िल्म निर्मात्री बन उन्होंने यह साबित कर दिया कि मन में हो विश्वास और  जुनून साथ हो तो कोई भी काम  करना  मुश्किल औऱ नामुमकिन नही है।

पेश है लिपिका वर्मा की -अनुष्का शर्मा के साथ एक भेंटवार्ता

स्त्री प्रधान विषयों पर भी फिल्में बन रही है, क्या आप को लगता है की  यह एक अच्छी शुरुआत है ?

जी हाँ आजकल  की महिलाएं हर क्षेत्र में कार्यरत है-निर्देशन, डिजाइनिंग, फ़िल्म निर्माण और अन्य  कार्य भी वो अदमी के कंधे से कंधा मिलाकर कर रही है। यह बदलाव न केवल हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री में आया  है किंतु सभी जगह देखने को मिल रहा है। लेखक स्त्री-प्रधान  कहानियां भी लिख रहे  है। यह सारी फिल्में बॉक्स आफिस पर  भी अपना झंडा फहराने में कामयाब हुई है। मेरे लिए यह एक बहुत ही मनाकुल वक़्त है। इस जीवन में एक अभिनेत्री के रूप में काम  कर रही हूँ मेरे लिए यह भी करना  सौभाग्यपूर्ण है। अभिनय कर पाना महत्वपूर्ण है मेरे लिए सो मै इसका आदर करती   हूँ। मै फिल्मी बैकग्राउंड से नही हूँ किंतु अपने लिए यहाँ एक मुकाम बनाना भी कोई आसान काम  नही था। मैं ढेर सारे बेहतरीन किरदार करने की इच्छुक हूँ।

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पहलवान का किरदार कर रही है ,क्या कहना चाहेंगी ?

जब मैने  कहानी सुनी तब  मेरे मन में काफी सारे संदेह उमड़ रहे थे। सब से पहले तो मेरे मऩ में यह विचार आया कि मेरा लुक कैसा होगा ? क्या मुझे अपना वजन बढ़ाना होगा? फिर कुछ अनुसंधान के पश्चात मैने  ऐसी लड़कियों के वीडियोड  (पहलवान) को देखा जो मेरी तरह शारीरिक तौर पर लंबी और पतली है। अब प्रश्न  यह था क्या मै पहलवानी कर पाऊँगी ? मेरे कोच जगदीश काली राम ने मुझे बहुत बेहतरीन ट्रेनिंग भी दी।  बस उसके बाद मुझे पहलवानी करने में बहुत आसानी हुई। मैनें लग़भग 50 किलो डेडलिफ्ट्स भी  की थी।

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आपको हरियाणवी भी बोलनी थी क्या कहना चाहेंगी आप??

बस वही एक आखिरी तैयारी करनी थी, मैनें इस भाषा के लिए काफी तैयारी भी करी थी। औऱ जब पहला प्रोमो निकला, लोगो  ने उसे  बेहद पसंद भी किया तब  मैन चैन की सांस ली। यह भाषा बहुत ही स्पाट है, यहां के लोग लखनवी अंदाज़ में नही  बोलते है। जो कुछ भी बोलना होता है बस सपाट अंदाज़ में बोल दिया करते है। हालांकि मैनें एन एच 10 में भी हरियाणवी का किरदार निभाया है पर उस वक़्त मै  क्या बोल रही हूँ आप लोगो  के समझ में नही आया  होगा?

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आपका फिल्मी सफर  कैसा रहा ?

मुझे अच्छी फिल्में ही मिली है हमेशा और इसके लिए मै आदित्य चोपड़ा की अहसानमंद हूँ। उन्होंने मुझ पर बतौर  अभिनेत्री विश्वास जताया यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। वाई आर एफ ने मुझ में विश्वास दिखलाया इसलिए आज मै  अपनी इस छोटी सी जर्नी में सफल भी हो पाई  हूँ। मेरा फिल्मी दुनिया से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नही रहा है। हालांकि मै फिल्में देख कर बड़ी हुई   हूँ। भगवान की दया से जो कुछ भी कर पाई  उसकी मै शुक्रगुजार  हूँ। मै फिल्मो में नाम, शोहरत और पैसों  के लिए नही आई  हूँ किंतु कुछ रचनात्मक काम  कर पाऊँ यही मेरी तमन्ना  है। मै फिल्में किसी लालच से नही कर रही हूँ। हमेशा ही मेरी यही कोशिश रही है कि कुछ आउट ऑफ दी   बॉक्स कर पाऊँ, दरअसल मै एक ऐसे बैकग्राउंड से आती हूँ जहां – लड़का और लड़की में कोई फर्क नही पेश आता है। मुझे मेरी राय पेश करने की इजाजत पूरी तरह से थी।


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Mayapuri

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