कोई भी बन सकता है अन्ना हजारे: अन्ना 

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वयोवृद्ध गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता किसन बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे अपने जीवन पर आधारित फिल्म ‘अन्ना: किसन बाबूराव हजारे’ के प्रचार के सिलसिले में पिछले दिनों इस फिल्म के निर्देशक-सह-पर्दे पर अन्ना हजारे के किरदार को जीवंत बनाने वाले मराठी अभिनेता शशांक उदापुरकर के साथ दिल्ली में थे। इस दौरान फिल्म के निर्माता मनिन्द्र जैन भी मौजूद थे।

‘अन्ना: किसन बाबूराव हजारे’ 130 मिनट लंबी हिंदी फिल्म है, जो एक साल से अधिक समय तक अन्ना के पैतृक गांव रालेगण सिद्धी, अहमदनगर (महाराष्ट्र), मुंबई, नई दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख और राजस्थान में फिल्माई गई है। फिल्म का निर्माण राइज पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशन शशांक उदापुरकर ने किया है। पहली बार निर्देशन कर रहे शशांक मराठी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता हैं। उन्होंने फिल्म में अन्ना हजारे का किरदार निभाने के साथ ही फिल्म का संवाद और पटकथा भी लिखा है। शशांक के अलावा फिल्म में अभिनेत्री तनिषा मुखर्जी भी हैं, जो एक युवा पत्रकार के रूप में हजारे की सामाजिक-राजनीतिक जीवन से जुड़ी कठिनाइयों को रिकॉर्ड करती हैं। इस हिंदी बायोपिक में तीन गीतों को भी शामिल किया गया है। फिल्म में किसान बाबूराव हजारे की जिंदगी की सारी सच्ची घटनाओं को दिखाया जाएगा। उन्हें जिंदगी में किन-किन चीजों से प्रेरणा मिली, किन-किन लोगों ने उन्हें प्रभावित किया, ये सारी घटनाएं हमें फिल्म में देखने को मिलेंगी।

Shashank Udapurkar, Anna Hazare, Manindra Jain
Shashank Udapurkar, Anna Hazare, Manindra Jain

बाबूराव हजारे जब छोटे थे, तो उनकी एक अलग विचारधारा थी और जिंदगी को लेकर उनके बहुत सारे प्रश्न थे। बाबूराव को अपनी जिंदगी का मकसद उनकी जिंदगी में घट रही घटनाओं से समझ आता है। शुरुआत में बाबूराव हजारे इंडियन आर्मी में ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने लोगों के हित के लिए काम करना शुरू किया। वे लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने अपनी बात मनवाने के लिए अनशन और श्रमदान का सहारा लिया। बाद में कैसे वो अन्ना हजारे के रूप में उभरे और लोकपाल बिल के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में कैसे उन्होंने सरकार से लड़ाई की, ये सारी चीजें फिल्म में बखूबी दर्शाने की कोशिश की गई है। यानी, फिल्म में अन्ना के बचपन से उनकी फौज की जिंदगी और उसके बाद रालेगन सिद्दीकी में वापस आकर करप्शन के विरुद्ध उनकी लड़ाई को दिखाया गया है।

इस मौके पर अन्ना ने फिल्म निर्देशक-अभिनेता शशांक की खूब प्रशंसा की और बताया कि कैसे शशांक ने अपने तीन साल फिल्म की कहानी लिखने में लगा दिए। अन्ना ने फिल्म के बारे में बताया कि यह फिल्म नवयुवकों को प्रेरणा देगी और उन्हें साफ जीवन जीने की और अग्रसर करेगी। अगर एक युवक में शुद्ध आचार, शुद्ध विचार, निष्ठांत जीवन, जीवन में त्याग और अपमान पीने की शक्ति हो, तो वह भी अन्ना बन सकता है। अन्ना ने कहा, दो घंटे की फिल्म में 79 साल का जीवन दिखाना मुश्किल है, लेकिन इस फिल्म से लोग मेरे जीवन को समझ सकेंगे। फिल्म मेरे जीवन का स्पष्ट सारांश है। फिल्म 14 अक्टूबर को रिलीज होगी।

 


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Mayapuri

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