INTERVIEW: यहां जो अंग्रेजी बोलता है वही पढ़ा लिखा इन्टैलीजेन्ट माना जाता है – अर्जुन कपूर

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अर्जुन कपूर रेगुलर फिल्मों के अलावा ‘की एंड का ’ जैसी अलग और एक हद तब चुनौतीपूर्ण फिल्में करने में भी आगे रहते हैं। इसी क्रम में उनकी अगले महीने रिलीज होने वाली  चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित फिल्म का नाम है ‘ हाफ गर्लफ्रेंड। फिल्म में उन्होंने एक ऐसे बिहारी युवक की भूमिका निभाई है जो अंग्रेजी माहौल के बीच भोजपुरी भाषा बोलता है। सारी भाषाओं पर भारी अंग्रेजी के सवाल को फिल्म में मजबूती से उठाया गया है। फिल्म को लेकर अर्जुन से किये गये कुछ सवालात इस प्रकार रहे।

अर्जुन कपूर इससे पहले चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित फिल्म टू स्टेट्समें पंजाबी लड़के की भूमिका निभा चुके हैं। अब एक बार फिर वे उन्हीं की बुक पर आधारित फिल्महाफ गर्लफ्रेंडमें भोजपुरी लड़के की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं , लिहाजा इस बार उन्हें इस रोल में जज किया जायेगा ?

अगर बतौर एक्टर मैं ये सोचने लगा तो मैं काम ही नहीं कर पाउंगा। दरअसल मैं हर फिल्म अपने तरीके से करना पसंद करता हूं, जैसे मैं  किसी भी फिल्म की पहले स्क्रिप्ट पर ध्यान देता हूं,उसे अच्छी तरह समझने की कोशिश करता हूं । इसके बाद डायरेक्टर से किरदार की बोल चाल, बॉडी लैंग्वेज आदि को लेकर डिस्कशन करता हूं। मेरा मानना है कि किसी भी एक्टर को एक ही पहलू पर ध्यान देते हुये फिल्म नहीं करनी चाहिये क्योंकि बहुत सारे छोटे छोटे पहले होते हैं जो फिल्म को बड़ा बनाते हैं।Half girlfriend

क्या अर्जुन ने पहले बुक पढ़ी थी ?

नहीं मैने बुक नहीं पढ़ी। मुझे पहले स्क्रिप्ट मिली थी। वैसे मुझे पहले से ही अंदाजा था क्योंकि ये किताब काफी सफल साबित हुई थी लेकिन मैं डायरेक्टर के प्वाइंट ऑफ यू से देखना चाहता था कि बुक में से क्या निकाला है और क्या नया डाला है,वो कितना अच्छा या बुरा है। मुझे ये भी पता था कि चेतन और मौहित दोनों मिलकर स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे, उन दोनों की वजह से जो भी स्क्रिप्ट में बदलाव होगें वे फिल्म की भलाई के लिये ही होगें ।arjun_shradda

आपको कब और किसने फिल्म का ऑफर दिया ?

 मैं उन दिनों अर्जनटीना में था, जब एक दिन मेरे पास मौहित का फोन आया और उसने कहा कि मैं तेरे पास एक स्क्रिप्ट भेज रहा हूं । तू उसे पढ़कर बताना कि तेरा क्या कहना है ।मैने सिर्फ दस पेज पढ़ने के बाद ही उसे बता दिया था कि मैं ये फिल्म कर रहा हूं । दरअसल मैं किरदार के पहले सीन से ही जुड़ गया था क्योंकि मेरा मानना हैं कि षुरूआत अच्छी होती है तो पूरा कॅरेक्टर अच्छा होता है।listing-image-medium1

हाफ गर्लफ्रेंड को लेकर क्या कहना चाहेंगे ?

अगर हाफ गर्लफ्रेंड की डैफिनेशन जाननी है तो हमारी फिल्म की टैग लाइन है कि दोस्त से ज्यादा, गर्लफ्रेंड से कम। हमारी कुछ ऐसी रिलेशनशिप होती हैं जिन्हें कोई नाम नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हमारी जिन्दगी में न जाने कितने लोग आते हैं जो हमारे लिये कुछ अच्छा कर जाते है तो कुछ लोग अपना प्रभाव छौड़ जाते हैं। बहुत सारी ऐसी बातें भी हैं जिन्हें हम समय पर नहीं कह पाते और सोचते हैं कि यार अगर मैं उसे ये कह पाता तो अच्छा होता। स्कूल के दोस्त होते हैं, कॉलेज के दोस्त होते हैं, यहां तक फैमिली मेंबर्स होते हैं। कई रिश्ते अधूरे रह जाते हैं लेकिन अधूरेपन में भी एक अच्छाई होती हैं और बुराई भी होती है। आप फिल्म देखेंगे तो सही तस्वीर का पता चलेगा।arjun shradda

आप फिल्म में एक बिहारी किरदार निभा रहे हैं। कई बार बिहारी अपनी भाषा को लेकर अपमानित होते रहते है। आप का इस बारे में क्या कहना है?

हिन्दुस्तान एक ऐसा देश है जंहा ढेर सारी भाषायें हैं लेकिन उन पर अंग्रेजी हावी है। यहां जो अंग्रेजी बोलता है वही पढ़ा लिखा और इन्टैलीजेन्ट माना जाता है। बाकी भाषा बोलने वाले अंग्रेजी के सामने हीन हैं यानि अगर आप इंगलिश नहीं बोल पाते तो आपको अलग नजर से देखा जाता है हालांकि आप बेहद समझदार और विद्धान आदमी है। फिल्म में ये सवाल बहुत ही मजबूती से उठाया गया है।


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Mayapuri

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