‘इतिहास को जानना जरूरी है’- अर्जुन कपूर

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अभिनेता अर्जुन कपूर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘पानीपत’ की वजह से सुर्खियों में बने हुये हैं। इस फिल्म के लिये अर्जुन कपूर ने काफी मेहनत भी की है। अभिनेता इन दिनों अपनी फिल्म का प्रमोशन करने में व्यस्त चल रहे हैं। प्रमोशन के दौरान उन्होंने फिल्म से जुड़ी कई बातें भी शेयर कीं।

आपको नहीं लगता कि इस कहानी पर बहुत देर से सोचा गया है?

दरअसल, किसी ने भी इस कहानी को केवल इसलिये नहीं बताया क्योंकि मराठा युद्ध हार गये थे। उन्होंने कहा भारत में लोग प्रसिद्ध ऐतिहासिक विजय की कहानियों को कहना-सुनना ज्यादा पसंद करते हैं और शायद इसीलिये पानीपत की तीसरी लड़ाई की कहानी को बड़े पर्दे पर कभी नहीं दिखाया गया।

 फिल्म को लेकर हो रहे विवाद पर क्या कहेंगे?

मुझे जो केवल एक चीज पता है वह यह कि हमारी फिल्म बाजीराव मस्तानी के समय के 20 साल बाद के समय की कहानी है, तो हमने कालखंड का पूरा अनुसरण किया है और बाजीराव मस्तानी पर तो एक पूरी फिल्म बनी है। मुझे नहीं लगता कि हम कहीं गलत हो सकते हैं।

अर्जुन कपूर

आपको मराठाओं का इतिहास पता है?

मैं मराठाओं के इतिहास के बारे में बहुत कम जानता था । फिल्म पानीपत के माध्यम से ही मराठाओं के बारे में विस्तार से जान पाया। यह फिल्म वहां से शुरू होती है जहां मराठाओं का पूरे भारत पर राज था। कोई नहीं जानता है कि उनका नियंत्रण मुगलों पर भी था। मुगल उन्हें टैक्स का भुगतान किया करते थे। मुझे अचरज हुआ कि मैं इस कहानी के बारे में इतना कम जानता था।

फिल्म में किरदार के लिये क्या तैयारी करनी पड़ी?

मुझे एक डिक्शन कोच के साथ जुड़ना पड़ा। सदाशिव राव का व्यक्तित्व कैसा था, क्या वह पार्वती बाई से प्यार करते थे? यह सब मैंने इस फिल्म के माध्यम से खोजा और उन्हें अपने कैरेक्टर में उतारा।

अर्जुन कपूर

इसमें किरदार के लिये अपना सिर मुंडवाते हुए कैसा लगा?

बाल मुंडवाते हुए मुझे झिझक से ज्यादा टेंशन थी कि मैं कैसा लगूंगा। मुझे 6-8 महीने टोपी पहनकर घूमना पड़ा था और वो मैंने मैनेज कर लिया। अब जब मैंने खुद को बड़े परदे पर देखा, तो लगा कि मेरा बाल मुंडवाना सही साबित हुआ।

आपके पेशवा सदाशिव राव भाऊ के किरदार पर बन रहे मीम्स को लेकर क्या कहेंगे?

सच कहूं, तो मैं सिर्फ मुस्कुरा देता हूं। बड़ी चीज़ों को हंसी-मज़ाक में टाल देने की मेरी आदत हो गई है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि मस्ती-मजाक करने वालों को यह सोचना होगा कि यह वास्तविक लोगों की कहानी है। ये लोग हमारे देश के लिए शहीद हुये थे। एक हद पर आपको सोचना पड़ेगा कि अपने मजाक से आप किसी को ठेस तो नहीं पहुंचा रहे। आप मुझे ट्रोल नहीं कर रहे बल्कि इतिहास के उन जांबाजों पर मीम्स बना रहे हैं, जो देश के लिये अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं रहे। मगर आप हैं कि सोशल मीडिया पर लगे पड़े हैं।

अर्जुन कपूर

अर्जुन कपूर: आपको नहीं लगता कि अब ऐतिहासिक फिल्मों का दौर चल पड़ा है। यह भेड़चाल सही है या गलत?

सच कहूं, तो इतिहास आज ज्यादा जरूरी भी हो गया है। हमें आज के युवाओं को याद दिलाने की जरूरत है कि कैसे इस देश के जांबाजों ने अपने बलिदान से समय-समय पर देश की रक्षा की है। आप इसे वॉर फिल्म की तरह देखें, मगर मैं कहूंगा कि ये एक देशभक्ति से परिपूर्ण फिल्म है। ये जो लोग हैं, इन्होंने हिंदुस्तान की सबसे बड़ी जंग लड़ी थी, ताकि आक्रमणकारी हमारे देश में घुसपैठ न कर पायें । आज भी इतिहास इसलिये दोहराना जरूरी है कि आज भी लोगों की निगाहें इंडिया पर लगीं रहती हैं।

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