बनिजय एशिया की द रेपिस्ट में अर्जुन रामपाल और कोंकणा सेनशर्मा आएँगे नजर

1 min


अर्जुन रामपाल ने एक नया प्रोजेक्ट द रेपिस्ट साइन किया है, जो बलात्कार के गंभीर मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमता है। अर्जुन फिलहाल कंगना रनौत अभिनीत धाकड़ की शूटिंग कर रहे हैं, उनके लिए यह वर्ष एक व्यस्त वर्ष के रूप में प्रतीत हो रहा है।

जी 5 के कोर्टरूम साइकोलॉजिकल ड्रामा ‘नेल पोलिश’ के साथ 2021 की शुरुआत के बाद, जहाँ उन्होंने एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के लिए एक हाई-प्रोफाइल डिफेन्स लॉयर की भूमिका निभाई, रॉक ऑन स्टार आने वाले महीनों में कम से कम चार और प्रोजेक्ट्स के लिए तैयारी कर रहे हैं, जबकि वे अब्बास-मस्तान की सीरीज पेंटहाउस को पहले ही पूरा कर चुके हैं।

डेवलपमेंट के सूत्रों की मानें तो “द रेपिस्ट एक हार्ड-हिटिंग ड्रामा है

प्रोजेक्ट को द रेपिस्ट टाइटल दिया गया है और विनोद मित्रा की 2013 की इंडिपेंडेंट एंथोलॉजी फिल्म मेरिडियन लाइन्स के बाद दूसरी बार उन्हें साथ लाने के लिए रामपाल के साथ कोंकणा सेनशर्मा भी नजर आएंगी, जिन्होंने सेवन ट्रबल्ड स्ट्रेंजर्स की कहानी बताई है। कोंकणा की माँ और जानी मानी बंगाली फिल्ममेकर अपर्णा सेन, बनिजय एशिया के बैनर तले प्रोड्यूस की जा रही फिल्म को डायरेक्ट कर रही हैं। डेवलपमेंट के सूत्रों की मानें तो “द रेपिस्ट एक हार्ड-हिटिंग ड्रामा है, जो इस बात का परिक्षण करता है कि बलात्कारियों के ऐसे कदम उठाने के लिए समाज कितना जिम्मेदार है। यह पीड़िता के आघात, परिस्थितियों और एक महिला के बारे में है कि वह इसके कारण किस दौर से गुजरती है। प्री-प्रोडक्शन शुरू हो चुका है और आधिकारिक तौर पर मार्च में पूर्ण हो जाएगा।

द रेपिस्ट को अपर्णा सेन के बेहद प्रशंसित प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा सकता है, जो सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं को बेहद खास तरीके से प्रस्तुत करता है। उम्मीद है कि द रेपिस्ट भी उनकी 36 चौरंगी लेन (1981), परोमा (1984), युगांत (1995), मिस्टर एंड मिसेज अय्यर (2002) जैसी फिल्म्स के रूप में राजनीतिक और मुखर होगी। फिल्ममेकर की अर्जुन रामपाल-कोंकणा सेनशर्मा फिल्म, सारी रात (2015) और बौद्धिक फिल्म सोनाटा (2017) के बाद अपनी तीसरी हिंदी फिल्म के रूप में तीन मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं की कहानी प्रस्तुत करेगी।

अब महिलाएं बलात्कारियों को सजा दिलाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार रहती हैं

अभिनेता-निर्देशक-कार्यकर्ता अपनी फिल्म्स के माध्यम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बलात्कार या धमकियों के बारे में अपनी चिंताओं को व्यक्त करने में कभी संकोच नहीं करती हैं। भारत में बलात्कार और हमलों के बढ़ते मामलों के बारे में बात करते हुए, अपर्णा सेन कहती हैं, “महिलाएं कभी-भी बलात्कारियों की निंदा करने या उन्हें सजा दिलाने के लिए आगे नहीं आती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यह कोशिश बेकार ही जाएगी और आखिर में दोषी के बजाए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा। कई बार वे परिवार टूटने के डर से भी नहीं बोलती हैं। आज, स्थिति मौलिक रूप से बदल गई है। कार्यस्थलों में मजबूत कानून हैं, जहाँ यौन शोषण को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। अब महिलाएं आगे आने और बलात्कारियों को सजा दिलाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार रहती हैं।”


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये