INTERVIEW: ‘‘अब तक ऐसा किरदार परदे पर नहीं आया’’ – अर्जुन रामपाल

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पिछले कुछ वर्षों से बहुत कम फिल्में करते आ रहे अर्जुन रामपाल अब एक बार फिर सक्रिय हो गए हैंं। उनकी एक फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ प्रदर्शित हो चुकी है। जबकि ‘कहानी 2’ 2 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली है, उसके बाद बतौर निर्माता व अभिनेता उनकी फिल्म ‘डैडी’ भी प्रदशित होने वाली है।

 आज कल आप फिल्में बहुत कम कर रहे हैं?

क्योंकि उस तरह की अच्छी फिल्मों के ऑफर नहीं आते हैं। मेरे कहने का अर्थ यह है कि जब कहानी व किरदार सुनकर दिल न कहे कि इसमें कुछ अलग करने का अवसर मिलेगा, तब तक काम करने के लिए हामी नहीं भरता। दिमागी तौर पर पूरा कैलकुलेट कर हम काम करते हैं। हमें कला की चिंता ज्यादा रहती है। मेरी सोच यह है कि मैं जो भी फिल्म कर रहा हूं, उसका बॉक्स ऑफिस पर चाहे जो असर हो, पर मेरे न रहने पर भी वह फिल्म तो रहेगी। मैं चाहता हूं कि उस वक्त मेरी फिल्म देखकर लोग गाली न दें। दस साल बाद भी लोग फिल्म देखेंगे, तो कहेंगे कि यह एक फिल्म थी।यह एक सिनेमा था। इसलिए जब आप फिल्म करते हैं, तो कला व सिनेमा का ख्याल रखना जरुरी है।arjun-rampal

तो फिर आप खुद फिल्म का निर्माण क्यों नहीं करते? आपने 2006 में एक फिल्म ‘आई सी यू’ का निर्माण किया था। उसके बाद कोई फिल्म नहीं बनायी?

अब बना रहा हूं। इन दिनों अरूण गवली की जिंदगी पर फिल्म ‘डैडी’ का निर्माण कर रहा हूं। इसमें षीर्ष भूमिका निभा रहा हूं। इसे एक अन्य निर्माता के साथ मिलकर बना रहा हूं।

फिल्म ‘डैडी’ को लेकर क्या कहना पसंद करेगे?

इस फिल्म को लेकर मैं अलग से आपके साथ बाद में विस्तार से बात करना चाहूँगा। इस फिल्म को लेकर बहुत कुछ कहने को है।

कुछ समय पहले प्रदर्षित फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ को लेकर किस तरह के रिस्पांस मिल रहे हैं?

फिल्म आलोचकों का रिस्पांस मिश्रित है। कुछ लोगों ने तारीफ की है। कुछ लोगों ने बुराई की है। लेकिन जो दर्षक फिल्म देखने गए, उनमें से ज्यादातर लोगों को बहुत पसंद आई है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें फिल्म नहीं पसंद आई। लेकिन इन दिनों देष में जो माहौल बना हुआ है, 500 और 1000 के नोट बंद होने की वजह से दर्षक फिल्म देखने नहीं जा रहे हैं। खैर, अब मुझे ‘कहानी 2’ से काफी आपेक्षाएं है।arjun-rampal_kahaani-2

फिल्म ‘कहानी 2’ को लेकर क्या कहेंगे?

यह एक रोमांचक रहस्य प्रधान फिल्म है। चार वर्ष पहले आयी फिल्म ‘कहानी’ का फ्रेंचाइजी है। अब इससे अधिक मैं क्या बता सकता हूं।

 आप ‘कहानी 2’ को क्या मानेंगे?

मेरे हिसाब से यह सीक्वल फिल्म नहीं है। यह एक सफल फिल्म ‘कहानी’ की फ्रेंचाइजी है, जिसमें नयी कहानी, नए किरदार हैं। फिल्म का नाम ‘कहानी 2’ है। कहानी कुछ भी हो सकती है। सस्पेंस व थ्रिलर की बजाय रोमांटिक कहानी भी हो सकती है। पर कहानी का जॉनर थ्रिलर है। इसमें सस्पेंस ड्रामा है। ‘कहानी’ से ‘कहानी 2’ का कोई संबंध नहीं है।

मसलन, हॉलीवुड फिल्म ‘अवेंजर’ को लें। अवेंजर की जितनी फिल्में आती हैं, वह फ्रेंचाइजी के साथ सिक्वल भी होती हैं। क्योंकि अवेंजर की हर फिल्म में कुछ नए किरदार जुड़ते हैं। पर मुख्य किरदार कभी नहीं बदलते। जबकि ‘कहानी 2’ के साथ ऐसा नहीं है। ‘कहानी 2’ में विद्या बालन जरूर हैं, पर कहानी और किरदार दूसरे हैं। हां! जॉनर वही है। इसलिए हम इसे फ्रेंचाइजी कहेंगे।kahani-2

 फिल्म ‘कहानी 2’ में आपका अपना किरदार क्या है?

मैंने इसमें एक पुलिस सब इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह का किरदार निभाया है। यह एक यथार्थप्रद फिल्म है। मेरा किरदार भी काफी सामान्य है। उसकी सोच, उसके काम करने का तरीका आपको पसंद भी आएगा, नहीं भी आएगा।

आपने निजी जिंदगी में भी काफी पुलिस वाले देखे हैं। फिल्मों में भी देखा है। आपने खुद भी पिछली कुछ फिल्मों में पुलिस ऑफिसर के किरदार निभाए हैं। क्या यह किरदार किसी से प्रेरित है?

नहीं! यह बहुत ही अलग तरह का किरदार है। अब तक ऐसा किरदार परदे पर नहीं आया। इस किरदार को मुझे निर्देषक के साथ बैठकर गढ़ना  पड़ा। इसका व्यक्तित्व बहुत अलग है।

फिल्म के निर्देषक सुजॉय घोष को लेकर क्या कहेंगे?

निर्देषक के तौर पर सुजॉय घोष की तारीफ करनी पड़ेगी। वह कलाकार से इस तरह से काम करवाता है कि कैमरे के सामने वह अभिनय करता नजर नहीं आता। सब कुछ वास्तविक नजर आता है। कलाकार को कैमरे के सामने उस मुकाम पर पहुंचना और सहज रहने के लिए जिस तरह का माहौल सुजॉय घोष रचते हैं, वह कमाल का होता है। उस माहौल में कलाकार का घुल जाना जरुरी होता है। इसमें हम सभी की मेहनत रही। हमारी कोषिष यह रही कि सब कुछ वास्तविक रहे। एक संवाद किसी भी रूप में महज संवाद नजर ना लगे।फिल्म में यदि आप चल रहे हैं, तो चलते हुए नजर आना चाहिए, डर रहे हैं, तो डरता हुआ नजर आना चाहिए।

इस फिल्म को कलकत्ता में फिल्माया गया है। आप पहली बार कलकत्ता गए थे या इससे पहले भी गए थे?

मैं कई बार कलकत्ता गया हूं। मैंने कलकत्ता में ही रितुपर्णा घोष की फिल्म ‘द लास्ट लिअर’ की शूटिंग की थी। एक बहुत बेहतरीन फिल्म थी। कलकत्ता में मेरे काफी दोस्त रहते हैं। कलकत्ता बहुत प्यारा शहर है..arjun

आपने पहली बार विद्या बालन के साथ अभिनय किया है। किस तरह की ट्यूनिंग रही?

विद्या बालन को लोग एक गंभीर अदाकारा मानते हैं।  जबकि वह बहुत फनी कलाकार हैं। उसमें बचपना बहुत ज्यादा है। उनके साथ काम करना उनसे ट्यूनिंग बिठा लेना बहुत सहज रहा। मेरे अंदर भी बचपना है। वह नॉटी हैं। इस फिल्म में हम दोनों की यात्रा बहुत अच्छी रही। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। बहुत मेहनती हैं। सेट पर वह सवाल बहुत पूछती हैं। इसलिए हम लोगों ने उन्हें कोमा में डाल दिया है। और कह दिया है कि इसको हम जगाएंगे नहीं।

आप सोशल मीडिया पर कितना व्यस्त रहते हैं?

बहुत ज्यादा मैं सोशल मीडिया पर इतना सक्रिय हूं कि मुझे किसी पीआर की जरूरत नहीं है।


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Mayapuri

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