INTERVIEW: ‘‘उस दौरान किसी ने फिजूल में अक्षय और मुझे लेकर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की थी’’- अरशद वारसी

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नसीरूद्दीन शाह के साथ अरशद वारसी की जोड़ी इश्किया तथा डेढ़ इश्किया में दिखाई दी, उन दोनों की जोड़ी को खासा पसंद किया था । अब एक बार फिर दोनों फिल्म ‘इरादा’में नजर आ रहे हैं । फिल्म को लेकर अरशद का क्या कहना है, बता रहे हैं इस मुलाकात में ।

जॉली एल एल बी 2 में अक्षय का कंपेरिजन जॉली एल एल बी के अरशद वारसी से किया जा रहा है । यहां अरशद का क्या कहना है ?

मुझे बताया गया है कि स्वंय अक्षय इस रोल के लिये अरशद की यानि मेरी तारीफ कर रहे हैं । मैं आपको बताना चाहता हूं कि  उस दौरान अक्षय और मुझे लेकर किसी ने जानबूझ कर फिजूल का हंगामा खड़ा करने की कोशिश की थी कि मैं फिल्म करने के बाद अक्षय के खिलाफ हो गया था,उससे नाराज हो गया था । जबकि ऐसा कुछ नहीं था । मुझे ये बात बहुत पहले से पता थी । उसने उस दौरान अक्षय ने मुझे फोन भी किया था तब मैने उसे कहा था, यार तू क्यों टेंशन ले रहा है । तू बिंदास ये फिल्म कर । आज भी अक्षय के साथ मेरी बातचीत होती रहती है ।

Akshay kumar, Arshad Warsi
Akshay kumar, Arshad Warsi

क्या ये फिल्म आपने नसीर को देखते हुये की ?

ये बात एक हद तक सही है । क्योंकि जब मुझे पता चला कि फिल्म में नसीर साहब हैं तो मेरी हां तो उसी वक्त हो गई थी । कहानी वहानी एक तरफ, दरअसल उनके साथ काम करते हुये मुझे हमेशा बहुत मजा आता है ।

 नसीर जैसे एक्टर के साथ काम करते हुये क्या कुछ सीखने के लिये मिलता है ?

देखिये किसी भी अच्छे एक्टर के साथ काम करते हुये खुद आप अच्छी एक्टिंग करने लगते हैं । बात यहीं तक नहीं कि नसीर बहुत अच्छे एकटर हैं, दरअसल मुझे उनकी कंपनी बहुत अच्छी लगती है । वे खुद जिस तरह के हैं, जिस तरह का उनका स्वाभाव है । मेरी  हमेशा उनसे बहुत ज्यादा बनती है ।Arshad warsi

इस फिल्म  को लेकर आपका क्या ‘इरादा’ रहा ?

इरादा तो पूरे देश को सवांरने का रहा लेकिन ऐसा तो होगा नहीं इसलिये मैने अपने इरादे पूरे करने की कोशिश की है लेकिन बाद में उसे अपनी गलती का एहसास होता हैं और वो एक कर्मट पुलिस अधिकारी बनने की कोशिश करता है । अगर कहानी की बात की जाये तो यहां प्रदुषण, रिवर्स बोरिंग, कैंसर की बात की गई है, इन सारी बातों के इर्द गिर्द एक बड़ा सा थ्रिलर बुना गया है यानि एक हकीकत के ईर्द गिर्द कहानी बुनी गई है । बस मुझे डर ये था कि कहीं सीरियस सिनेमा के चक्कर में फिल्म दर्शक को बौर करना न शुरू कर दे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं । फिल्म में एक मिस्ट्री है, थ्रिल है, एक्साइटमेंन्ट है तथा कमाल के डायलॉग्ज हैं ।

आप स्वंय स्वभाव से भी और बतौर कलाकार भी काफी कॉमिक हैं । तो क्या आप अपनी फिल्मों में अपने कुछ इनपुट डालने की कोशिश करतेे हैं ?

हां हां क्यों नहीं । मेरी कोशिश यही रहती हैं कि गोलमाल जैसी हास्य फिल्म तो ठीक है लेकिन इरादा जैसी रीयलिस्टक फिल्म बौर न हो जाये इसलिये उसमें  दर्शकों की दिलचस्पी बनाये रखने के लिये कुछ ऐसा वैसा करना ही पड़ता है । दूसरे मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि मेरे कुछ डॉक्टर्स दोस्त मुझसे म्युजिक सीडीज ले जाते हैं क्योंकि ऑपेरेशन थियेटर में वे ऑपरेशन करते वक्त सीरियस नहीं बल्कि पूरी तरह एन्जॉय करते हैं, म्युजिक सुनते हैं, बातें करते हैं या हंसी मजाक करते हैं । इसी प्रकार पुलिस ऑफसर्स भी किसी केस पर काम करते हुये फिल्मों की तरह सीरियस नहीं बल्कि सहज हो काम करते हैं । इसी तरह मैं भी अपनी किसी भी फिल्म को करते हुये पूरी तरह सहज हो कर काम करता हूं ।irada

आपको कॉमिक फिल्मों के लिये जाना जाता रहा है, खुद आप किस तरह की फिल्में करना पसंद करते हैं ?

वैसे मुझे अच्छा सिनेमा पसंद है  लेकिन अच्छा सिनेमा क्या है । मैने पहले भी शायद बताया था कि  बार मैने सोचा कि यार बहुत कॉमेडी हो गयी, अब कुछ अलग किया जाये क्योंकि यहां कॉमेडी एक्टर को एक्टर नहीं समझा जाता ।  उनकी नजर में सीरियस रोल करने वाला सबसे बड़ा एक्टर होता है । जैसे स्पेशल इफेक्ट देख कर कोई कहता है आहा, क्या स्पेशल इफेक्ट है लेकिन उस गधे को ये नहीं पता कि जो दिखाई दे गया वो स्पेशल इफेक्ट कैसे हो सकता है  लेकिन क्या करे, हमारी सोच ही ऐसी है । मेरा मानना ये है कि एक्टिंग भी स्पेशल इफेक्ट की तरह होती है । इस बारे में मैं आपको एक किस्सा सुनाता हूं । मुझे एक बार मूक बघिर विद्यार्थीयों से मिलने जाना पड़ा । वहां एक अंधी लड़की ने मुझे कहा कि मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं क्योंकि मैने आपकी कुछ अन्य फिल्मों के अलावा मुन्ना भाई्र एम बी बी एस भी देखी है । यहां मैने सोचा कि मुझे खुश करने के लिये इसकी टीचर ने उस लड़की को ऐसा कहने के लिये कहा होगा, जब मैने ये बात कही तो उसका कहना था ऐसा नहीं  है,क्योंकि मैं फिल्में देखती नहीं सुनती हूं । उस फिल्म में मैने आपको भी सुना तो मुझे बड़ा मजा आया । इसके अलावा एक और किस्सा कि  एक बार मैं बाइक से लद्दाक गया था, वहां मैने अपने दोस्तों और परिवार के लिये कुछ धर्मिक जैसा कुछ खरीदा था लेकिन मेरी बीवी ने कहा कि जब तक इन्हें  दलाई लामा का कोई मंक  पवित्र नहीं करेगा तब तक इन्हें लने को कोई फायदा नहीं । काफी कोशिशों के बाद मेरी एक मंक के साथ मुलाकात हुई, वो पांच दस मिनिट ही किसी से मुलाकात करते है । मैं जैसे ही मंक के करीब पहुंचा तो वो मंच से खड़ा हो गया और बाकायदा मुझसे गले वले मिला । इसके बाद हम आधा एक घंटे तक आपस में बातें करते रहे, खाते पीते रहे । उसने मेरी फिल्में देखी थी । लास्ट में उसने कहा कि यार मुझे तुमसे जलन है क्योंकि मुझे किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिये बहुत मेहनत करनी पड़ती है जबकि तुम एक साथ पूर देश को हंसा सकते हो । इसके बाद मेरे दिमाग में आया कि क्यों मैं सीरियस या दूसरी तरह की फिल्मों के बारे में सोच रहा हूं । भाड़ में गई ये सारी फिल्में ।मैं जो कर रहा हूं उससे इतने लोगों को ख्ुाशी मिल रही है, मुझे इससे ज्यादा और क्या चाहिये ।


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Mayapuri

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