आरती के अल्फाज़, एक ज़रूरी फोन कॉल

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Aarti Mishra

एक फ़ोन कॉल

कल मेरी फ्रेंड का फ़ोन आया. वो मेरी स्कूल टाइम कि फ्रेंड है. बहुत टाइम से हम साथ थे. बस बाद में मैं मुंबई आ गई वो मोगा में है. हमारे बीच में दूरी आ गयी क्यूंकि मुंबई और पंजाब के बीच कि दूरी बहुत है. महीनो तक हमारी बात नहीं हुई. हम अपने अपने काम में बिजी हो गए थे. अब कल अचानक शाम को छः के वक़्त एक फ़ोन बजा. उधर से एक आवाज़ आई, “हेल्लो आरती कैसी है?” हमने तकरीबन एक घंटा बात कि. वही पुरानी स्कूल कि बातें, कॉलेज कि बातें और जो भी वक़्त साथ बिताए थे हमने. बस वो एक घंटा बात करके उन महीनों कि दूरियां एक पल में मिट गईं.

मैं सोचा करती थी दोस्तों के बीच तो चलता रहता है. फ़ोन पे बात ना भी हो फिर भी दोस्ती तो बरक़रार रहती हैं. मगर नहीं. यह सच नहीं है. जिनसे हम प्यार करते हैं उन्हें यह याद करवाना ज़रूरी रहता है की हम उनसे कितना प्यार करते हैं.

मेरी माँ भी रोज़ रात को कॉल करती है मुझे.

बातें कुछ ख़ास नहीं होती मगर फिर भी उस 15 मिनट के कॉल में हमारे दरमियान जो दूरी होती है वो मिट जाती है. एक बार मेरी क्लास में सर बता रहे थे कि दिन में एक बार ज़रूर अपनी माँ को “आई लव यू” बोलना चाहिए. उन्हें यह एहसास करवाना चाहिए कि हम उनसे कितना प्यार करते हैं.

यह ज़िन्दगी बहुत छोटी है. आज कोई है तो कल नहीं. हमारे लिए लोगों के लिए क्या है वो दिल में ही ना रख कर अगर होठों से बयान किया जाए तो बेहतर है. उनके आखिरी दम तक उन्हें यह पता होना चाहिए कि हम उन्हें कितना प्यार करते थे.

हम जानते है कि हम अपनों से कितना प्यार करते हैं. मगर समय समय पर याद करवाना जरुरी है. समय समय पे फ़ोन करना जरूरी है.

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Mayapuri