बॉम्बे टू गोवा से क्या मिला अरुणा ईरानी को ?

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मायापुरी अंक 11.1974

निर्माता सोहन लाल कंवर की फिल्म दो झूठ के सैट पर अरुणा ईरानी से भेंट हो गई। हमने उससे कहा। “बॉम्बे टू गोवा” के बाद हमने सोचा था कि आप अब बड़ी हीरोइन बन जाएंगी। किन्तु आश्यर्च है कि “कारवा” “बॉबी” आदि फिल्मों में बेजोड़ अभिनय के पश्चात भी आप इस हीरोइन अकालयुग में भी अपना स्थान न बना सकी। इसका क्या कारण है ?

“आपने इतना लम्बा और गंम्भीर प्रश्न कर डाला है कि मैं सोच में पड़ गई हूं “अरुणा ईरानी बोली यह नही है कि मुझे हीरोइन के रोल का ऑफर नही आया। ऑफर तो बहुत आयें किन्तु उनके साथ जो शर्ते जुड़ी होती थी वह मुझे स्वीकार न होने के कारण वह फिल्में मुझे नही मिली। ”अरुणा कुछ गंभीर होते हुए बोली खुदा के लिए उन फिल्मों के नाम नही पूछिएगा। अरुणा ने बिनती की।

“अच्छा वह क्या शर्ते थी ? आप इस पर तो प्रकाश डाल ही सकती है ? मैंने कहा।

“वह शर्ते कुछ नही थी बड़ी मामूली थी। रात को बस कम्पनी देने की बात थी। मैं कम्पनी नही दे सकी और जिन्होंने कम्पनी दे दी वह हीरोइने बन गई। मुझे इसका खेद भी नही है। क्योंकि मेरा विवेक मेरे साथ जिन्दा है वरना उस सूरत में विवेक मर जाता। अरुणा ईरानी ने कहा.

“मेहमूद के साथ संबंध बिगड़ने पर भी तो आपके कैरियर पर असर पड़ा होगा.” मैंने कहा।

“लोग ऐसा समझते है लेकिन यह हकीकत नही है। वास्तव में उनके कारण मुझे मेरा कैरियर बनाने में जितनी सहायता मिली है मैं उसके लिए मेहमूद की आभारी हूं। हमारे बीच दोस्ती आज भी वैसी ही है जैसे कि पहले थी। मैं आज भी उनका आदर करती हूं। रोमांस शादी और तलाक की बातें गॉसिप लिखने वालों की देन है। उसमें वास्तविकता नही है। दरअसल इन्डस्ट्री उसी की कदर करती है जिसकी दर्शक कदर करते है। दर्शकों का प्यार मुझे हर हाल में मिला है और इसीलिए इन्डस्ट्री वाले काम दे रहे है। कहने का अर्थ यह है कि यहां कोई किसी का कुछ नही बिगाड़ता आदमी का नसीब अच्छा होना चाहिये और उसमें गुण होने चाहिये अरुणा ईरानी ने अपने तौर पर पत्ते की बात बताते हुए कहा।


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Mayapuri

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