पब्लिसिटी असली और नकली – आशा सचदेव

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052-32 Asha Sachdev

मायापुरी अंक 52,1975

होटल होराइज़न में आशा सचदेव से भेंट हो गई। वह शायद कोई मुहूर्त अटैंड करने आई थी। हमने उन्हें मुबारकबाद दी तो वह हमारा मुंह ताकने लगी। यह काहे मुबारकबाद है? वह आखिर पूछ ही बैठी।

सुना है आपने धर्मेन्द्र के साथ फिल्म साइन की है?

ओह आशा ने ऐसे कहा जैसे उसे अधिक खुशी न हुई हो। अरे बाबा, अपने ऐसे कहा! वह तो ‘चरस’ में एक छोटा सा गेस्ट अपीरियंस टाइप का रोल था। हां, उसमें इतना जरूर है कि धर्मेन्द्र के साथ काम करने की मेरी मनोकामना पूरी हो गई।

आशा जी, आप जिस जोर-शोर से आई थी, वह बात जल्दी सर्द पड़ गई, इसका क्या कारण है? अब तो इधर आप हीरोइन की बजाय साइड रोल में फिल्में अधिक करने वाली है, इसका क्या कारण है?

मैं शुरू में मोटी थी। डायटिंग भी की। फिर मोटी हो गई। इसी मुटापे के कारण मेरे कई हीरोइन के रोल हाथ से निकल गए। और बड़े बैनर की फिल्मों में आर्टिस्टों के साथ साइड रोल करने में कोई हानि नहीं है। उल्टे ऐसी फिल्मों में कुछ कर दिखाने के अवसर मिलते हैं। आशा सचदेव ने कहा।

फिल्मों की संख्या न बढ़ने के पीछे क्या जोगेन्द्र और अरूणा से झगड़े का भी कुछ हाथ है? हमने पूछा।

मेरा ऐसा कोई गंभीर झगड़ा नहीं हुआ था। जो कुछ झगड़ा था। वह उसूली का था। आप खुद ही सोचिये कि कौन हीरोइन यह बर्दाश्त करेगी कि उसके मुकाबले में साइड-हीरोइन को अधिक महत्व मिले ‘दो चट्टाने’ में भी यही कुछ हुआ न सिर्फ यह कि आशा भोंसले की आवाज अरूणा को दी बल्कि उसे महत्व भी दिया गया। जिसके कारण मुझे आपत्ति उठानी पड़ी जिसका फल यह हुआ कि मुझे एक अंतरे के बाद गायब कर दिया गया। यहां तक कि फिल्म के क्लाइमैक्स में भी मुझे नहीं रखा गया। इसी वजह से मेरा करियर नष्ट होकर रह गया। आशा सचदेव ने कुछ निराशा भरे स्वर में कहा।

आजकल आप पहले की तरह न्यूज में नज़र नहीं आ रही हैं, क्या बात है? हमने पूछा।

शुरू-शुरू में अपनी नादानी के कारण मैंने गॉसिप लिखने वालों को मसाला प्रदान किया था। लेकिन अब मैं वक्त के साथ-साथ यह समझ गई हूं कि ऐसी पब्लिसिटी से कुछ प्राप्त नहीं होता। असली पब्लिसिटी तो वह है जब आदमी का काम बोलता है। आशा ने कहा।


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Mayapuri

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