क्या मैं सबसे रोमांस करती हूं ? – आशा सचदेव

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मायापुरी अंक 52,1975

फिल्म उद्योग में ‘सैक्स बम’ कही जाने वाली अभिनेत्रियों में आशा सचदेव का नाम भी शामिल है। भला क्यों न शामिल होगा, जबकि वह, सचमुच सैक्स बम है मगर अब, कुछ महीनों से आशा सचदेव अपने इस उपनाम से उकता गयी हैं, यदि कोई उसे ‘सैक्स बम’ कहता है तो पल भर के लिए वह झुंझला जाती है और इस झुंझलाहट में वह सामने वाले को अपमानित करने से भी नहीं चूकती आशा सचदेव का कहना है कि अब वह अभिनय प्रस्तुत करना चाहती है। ‘सैक्स बम’ के नाम से उसे नफरत हो गयी है, वह सैक्सी फिल्मों में काम नहीं करना चाहती, अंग-प्रदर्शन के स्थान पर अभिनय पेश कर वह दर्शकों की दृष्टि में सम्मान पाना चाहती है।

मेरे ख्याल में आशा सचदेव का यह विचार सराहनीय है, शर्त यह है कि वह अपने इरादे पर अटल रहे। और अगर वह अपने इरादे पर कायम रही तो कोई शक नहीं कि उसे फिल्मों मैं सफलता न मिले।

मैं कई दिनों से इसी उधेड़बुन में था कि आशा सचदेव से संपर्क किया जाये। और उनके परिवर्तित विचार और बदले हुए स्वरूप को अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने में पहल की जाये।

मगर समय तय न हो सका, एक दिन किसी साप्ताहिक-पत्र के कार्यालय में आशा सचदेव के प्रचार अधिकारी बी.के. सरस की गिद्ध दृष्टि मुझ पर पड़ी बोले,

वाह जनाब! आप यहां बैठे हैं और हम महीनों से आपको तलाश कर रहे हैं। मैं चौंका,

क्यों भला गिरफ्तार करना चाहते हो? और भी पत्रकार हैं, क्या मैं ही बना हूं?

मजाक छोड़ो, आशा जी ने बताया था कि आपने उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा है कि कल राज कमल स्टूडियो में वे सुनील दत्त और राकेश रोशन के साथ ‘अकेला’ की शूटिंग कर रही हैं, अत: आपको ढूंढ कर, वहीं भेज दूं।

मैंने सोचा, यह भी खूब रही, बैठे बिठाये समय मिल गया। मैंने बी.के. सरस को धन्यवाद देते हुए कहा।

और समयानुसार मैं आशा सचदेव के मेकअप रूप में था। अब उनका मोटापा कुछ कम हो गया था। लगता था जैसे डायटिंग कर रही हो। मैंने इंटरव्यू की शुरूआत इसी स्वास्थ्य संबंधित सवाल से की,

लगता है आजकल आपका ध्यान अभिनय के साथ-साथ स्वास्थय की ओर भी है?

अपनी गोल-मटोल आंखो को मटकाते हुए आशा ने प्रश्नवाचक दृष्टि से मेरी ओर कुछ हैरत भरी नज़रों से देखा, पूछा, वो कैसे?

वाह री मासूमियत प्रश्न तो शुद्ध हिंदी में पूछा गया था, फिर भी मैंने प्रश्न स्पष्ट किया।

आजकल आपका मोटापा कुछ छंट गया है यानी आप अब कुछ दुबली हो गयी है।

धन्यवाद!

फिर वही मासूमियत! मैंने कहा, मैंने तो राज पूछा है, ताकि आपका बताया नुस्खा अन्य अभिनेत्रियों के भी काम आ जाये?

अरे इसमें राज की बात कैसी?

आश्चर्य से आशा ने कहा, फिर पुन: बोली,

राज़ वाज़ कुछ नहीं, आजकल मैं नियमित रूप से रोज़ाना डायटिंग कर रही हूं बात यह है कि मेरा मोटापा कई लोगों की आंखो में खटकाने लगा था, स्वंय मुझे भी बुरा लगने लगा था, इसलिए मैंने स्वयं डायटिंग कर अपने स्वास्थ्य को संभाला है। नियम और संयम से हम जीवन में बहुत कुछ पा सकते हैं। मोटापा कम करने के लिए डांस एक अच्छा उपाय है। इस एक्सरसाइज़ से मुझे बहुत ज्यादा लाभ हुआ है। साथ खाना कम खाओ। कभी-कभार ‘उपवास’ भी करना पड़ता है। यही है वह राज़ जिससे मेरा मोटापा मीलों दूर भाग गया है।

एक राज की बात और पूछू? मैंने धीमे से अपनी बात कह दी।

मुस्कुराने के अंदाज में संभलकर आशा सचदेव बोली,

जरूर पूछिए मगर मुझे मालूम है। सवाल जरूर कोई रोमांस वोमांस का होगा

बिल्कुल यही सोचा है आपने, कुछ लोगों से सुना है कि जोगेन्द्र से आपका काफी रोमांस चल रहा है एक साथ सिनेमा का लास्ट शो भी देखते हैं। कहां तक सच्चाई है इसमें?

आपके सवाल में यानी जोगेन्द्र और मेरे रोमांस में उतनी ही सच्चाई है, जितनी कि इस बात में कि कोई शख्स आकर यह कहे कि आज सूरज पूर्व की बजाय पश्चिम से निकला था। मेरा ख्याल है कलाकारों के बारे में नित-नयी अफवाहों का जन्म लेना कोई बड़ी बात नहीं और अफवाहों में कुछ दम भी नहीं होता जोगेन्द्र से मेरा कोई संबंध नहीं है। न मैं उनके साथ सिनेमा जाती हूं।

इन अफवाहों से आपके दिलो दिमाग पर किस हद तक असर होता है? प्रश्नों की कड़ी में मेरा एक और प्रश्न था यह, जिसका जवाब आशा ने कुछ इस अंदाज में दिया,

मैंने हिंदुस्तान में जन्म लिया है। हमारा देश आज़ाद है। यहां हर व्यक्ति को बहुत कुछ कहने का अधिकार प्राप्त है। और हर व्यक्ति अपने अधिकारों का उपयोग करता है। चाहे वह अपने अधिकारों का उपयोग अच्छे रूप में करे, या बुरे रूप में। कुछ ऐसे ही लोग अफवाहें फैलाते हैं। अब हमारा धर्म यह कहता है कि हम इन अफवाहों पर ध्यान न दें। और आप विश्वास कीजिए, मैं ऐसी अफवाहों से कभी नही घबराती लोगों ने तो मेरे बारे में क्या कुछ नहीं कहा उन लोगों ने तो मेरी मां को भी नहीं बख्शा।

आप ऐसे अफवाहों बाजों को कुछ कहना चाहेंगी? मैंने पूछा.

कुछ सोचते हुए आशा सचदेव बोलीं,

अफवाह बाजों को चाहिए कि वे हमेशा अफवाह फैलाने से पहले यह सोच लिया करें कि कहीं इस अफवाह से किसी की जान पर तो नहीं बन आयेंगी। या इस अफवाह से किसी का परिवारिक जीवन तो नष्ट नहीं हो जायेगा। मेरे मत से अफवाह अगर ‘मजाक’ तक सीमित रहे तो अच्छा भी लगता है, खैर, अभी में इतना ही कहूंगी।

मैंने अगला प्रश्न जोड़ा,

सुना है आप अब सैक्सी रोल अस्वीकार कर रही हैं?

जी हां आशा सचदेव ने संक्षिप्त में उतर दिया।

क्या आपको ‘सैक्स बम’ कहलाना पसंद नही? मैंने अगला प्रश्न पूछा।

आशा सचदेव बोलीं,

जी नहीं, अब मैं अपने अंदर के कलाकार को पर्दे पर पेश करना चाहती हूं। मैं बताना चाहती हूं कि मैं भी अभिनय जानती हूं।

मैंने तुरंत अपने पूर्व प्रश्न से संबंधित प्रश्न पूछा।

तो फिर आरंभ में आपने क्यों सैक्सी चित्र खिंचवाये, छपवाये? क्यों आप सैक्सी फिल्मों में अभिनय करती रही?

पल भर रूक कर आशा सचदेव ने गंभीर होकर कहा,

यह शुरू-शुरू की बात उन दिनों में फिल्मों के लिए बिल्कुल नई थी। पूना इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा लेकर आयी थी। मुझे फोटोग्राफरों ने ‘सैक्सी पोज़’ देने के लिए कहा। मैं शुरू से निडर लड़की रही हूं। मैंने ‘सैक्सी पोज़’ दिये, लेकिन मुझे क्या मालूम था कि सिर्फ दो-चार सैक्सी पोज़ देने से मेरा करियर खराब होने लगेगा। यही हाल मेरा फिल्मों में हुआ। एक-दो सैक्सी फिल्में की तो लाइन लग गयी। किसी ने मेरी अभिनय-प्रतिभा की ओर देखा तक नहीं यह तो भला हो मोहन सहगल जी का जिन्होंने ‘वो मैं नही’ में मुझे एक विशेष रोल देकर मुझे अपनी अभिनय-प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका दिया, वरना मैं सैक्सी फिल्मों की भूलभुलैयां मैं भटकती रहती और कोई उभारने वाला न मिलता,

‘क्या ‘वो मैं नही’ के छोटे से रोल से आपको कोई लाभ हुआ? मैंने आशा सचदेव से अगला प्रश्न पूछा।

आशा सचदेव ने जवाब दिया।

जी हा, ‘वो मैं नहीं’ के बाद मुझे कई अच्छी फिल्में मिली हैं। इन फिल्मों से मेरी इमेज बदलेगी और मुझे अपने अंदर के कलाकार को बाहर दिखाने का अवसर मिलेगा।

मैंने कहा,

पहले आप नायिका थी। अब सहनायिका? इससे….

मेरी बात बीच में काटते हुए आशा सचदेव ने उत्तर दिया,

सिर्फ नायिका या सह-नायिका की भूमिका पाने से कोई लाभ नहीं पाता अगर आपमें टेलेंट है तो चाहे जैसी भूमिका में हो, आप अपने अभिनय का लोहा मनवा कर रहेंगे। अब देखिए ना, मैंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन मेरे काम की तारीफ ‘वो मैं नहीं’ के रोल में ही हुई इसलिए मेरे लिए अब छोटा-बड़ा रोल कोई मायने नहीं रखता।

राजेश खन्ना के साथ आपका लगाव क्या अर्थ रखता है?

कोई भी लगाव अर्थहीन नहीं होता। राजेश खन्ना इस पीढ़ी का सर्वोत्तम कलाकार है। दिलीप कुमार, राज कपूर, और देव आनंद के बाद राजेश खन्ना ही एक ऐसा कलाकार हैं, जो सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ है। मैं राजेश खन्ना को बहुत पसंद करती हूं, इसके अलावा मेरी पसंद का कलाकार है धर्मेन्द्र। ये साहब भी अपने ढंग के पहले कलाकार हैं। मुझे इनसे भी बहुत गहरा लगाव है। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं सबसे रोमांस करती हूं, आप ही कहिए, क्या मैं सबसे रोमांस करती हूं। बेवकूफ हैं वे लोग जो बेकार की बातों को बढ़ावा देकर बकवास बातें फैलाते हैं।

आशा सचदेव ने पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से दो वर्ष के एक्टिंग कोर्स में डिप्लोमा किया है। 27 अप्रैल के दिन मुंबई में आशा का जन्म हुआ। और यहीं अंग्रेजी माध्यम से मैट्रिक तक पढ़ायी की। हिंदी तो पूना इंस्टीट्यूट में जाकर सीखी। और फर्राटेदार हिंदी भी बोलती हैं। मीना कुमारी की बहुत जबरदस्त प्रशंसिका हैं। सफेद साड़ी पहनने की बहुत शौकीन हैं। हां, गहनों से उसे ज्यादा लगाव नहीं। इंस्टीट्यूट में दादा गिरी करने में बहुत नाम कमाया, नयी आने वाली लड़कियों की रेंगिंग का जिम्मा आशा के ही सर पर था। सफाई उसे बहुत पसंद है घर की देखभाल वह स्वयं करती है। शम्मी कपूर के डायलॉग दोहराने का उसे बहुत शौक था। और अब वह स्वयं अभिनेत्री है। इन दिनों वह लगभग बीस फिल्मों में व्यस्त है।

‘अकेला’ के सैट पर जब उनका बुलावा आया तो मैंने धन्यवाद देकर विदा ली।


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Mayapuri

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