‘आपकी खूबियां ही आपकी ताकत हैं- आयुष्मान खुराना

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आर्टिकल 15, ड्रीम गर्ल, विक्की डोनर, दम लगा के हईशा तथा बधाई हो जैसी फिल्मों से अपने अभियन से सबकी वाहवाही लूटने वाले आयुष्मान खुराना इन दिनों फिल्म बाला को लेकर चर्चा में हैं। आयुष्मान ने अपने करियर में एक से बढक़र एक फिल्में की हैं, जिनकी फिल्मों के विषय हमेशा हटकर होते हैं। बाला भी उसी कड़ी में शामिल है। बाला में आयुष्मान खुराना हर बार की तरह नये किरदार में नजर आने वाले हैं। फिल्म बाला में वो कम उम्र में बाल झडऩे के चलते गंजे हो गये शख्स की भूमिका में नजर आयेगें  डायरेक्टर अमर कौशिक द्वारा निर्देशित इस फिल्म में एक ऐसे युवक की परेशानी के बारे में बताया गया है, जो समय से पहले गंजा हो जाता है। आयुष्मान कहते हैं कि वह फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ते ही इससे प्रभावित हो गये थे। इसकी कहानी मजेदार, व्यंग्यपूर्ण और भावनात्मक है। ये फिल्म दर्शकों को एक अर्थपूर्ण संदेश देगी। यह फिल्म कॉमेडी के साथ एक गंभीर विषय को उठायेगी।

आयुष्मान कहते हैं कि ‘बाला’फिल्म से वो सभी लोग कनेक्ट कर पायेगें जो कम उम्र में गंजेपन की समस्या का सामना करते हैं। हम कई टॉपिक और इश्यूज पर फिल्में बना चुके हैं। यह देशभर के पुरुषों के लिए सबसे रिलेटेबल टॉपिक है। शायद दुनिया भी इससे जूझ रही है। शुक्र है कि मुझे अच्छे बाल मिले हैं लेकिन मेरे ज्यादातर दोस्त 30 की उम्र शुरू होते ही बालों की समस्या से जूझ रहे हैं। यह एक गंभीर समस्या है। आयुष्मान कहते हैं कि मैंने हमेशा अलग हटकर काम किया है और स्क्रिप्ट के चयन के मामले में यही मेरी यूएसपी रही है। मैं ऐसी फिल्म करना चाहता हूं, जिस सब्जेक्ट पर पहले कोई फिल्म न बनी हो। लोग थियेटर आयें और अपने साथ कुछ लेकर जायें। घर पर अपने परिवार और यार-दोस्तों के साथ उस फिल्म की चर्चा करें। आयुष्मान कहते हैं कि विकी डोनर के बाद मेरी तीन फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं, जिसके बाद मैं सोचने लगा था कि मुझसे कहां गलती हुई। क्या रिलीज़ की डेट गलत थी या विषय सही नहीं था। लेकिन जब फिल्म हिट हो जाती है तो सब कुछ माफ हो जाता है।

अब तक कितनी बार टकले हो चुके हैं? इस सवाल पर आयुष्मान कहते हैं कि कॉलेज में मैंने एक कुमारा स्वामी नाम का नाटक किया था जिसमें हम 12 दोस्त टकले हुये थे। डायरेक्टर ऐसा ही चाहते थे। जब मैं घर लौटा तो बहुत डांट पड़ी। मैं बाईक पर वापस घर लौटा और हेलमेट पहनकर सीधा कमरे में जा घुसा जिससे पापा को हैरानी हुई। जब मेरे गंजे होने की सच्चाई पता चली, तो मुझे उनकी डांट सुननी पड़ी।

क्या आपको भी किसी तरह के कॉम्पलेक्स का सामना करना पड़ा। इस सवाल पर आयुष्मान कहते हैं कि बचपन में मैं बहुत पतला था। तीन घंटे का मैच खेलते समय मुझसे कह दिया गया था कि तुम एक घंटा ही खेलो और अपना वज़न बढ़ाओ लेकिन टीनएज कि आते आते मेरा वज़न कुछ बढ़ गया था। फिल्म बाला में अपने किरदार के बारे में आयुष्मान कहते हैं कि इसमें मैं मुकुंद दास नाम का कैरेक्टर प्ले कर रहा हूं जो अपने झड़ते बालों से परेशान है। अपने पापा को भी कोसता रहता हूं क्योंकि वो भी गंजे हैं। मेरी बचपन की दोस्त भूमि पेडनेकर डार्क फेस की है लेकिन उसे कलर कॉम्पलेक्स नहीं है। सांवली होते हुये भी उसमें आत्मविश्वास है। हालांकि मैं यामी गौतम को चाहता हूं जो एक फेयरनेस क्रीम की मॉडल है। यह फिल्म झड़ते बालों की समस्या पर बात न करते हुये यह दिखाना चाहती है कि रंग हो या छोटा कद या फिर दुबलापन। कभी कॉम्पलेक्स में नहीं आना चाहिये। अगर आपमें खूबियां हैं तो ऐसे कॉम्पलेक्स कोई मायने नहीं रखते। वही खूबियां आपकी ताकत हैं।

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Shyam Sharma