INTERVIEW: मेरी प्यारी बिंदू’ फिल्म का दूसरा टाइटल है – आयुष्मान खुराना

1 min


एंकर,सिंगर और एक्टर आयुष्मान खुराना ने अपना कॅरियर एंकरिंग से स्टार्ट किया था। पहली ही फिल्म विक्की डोनर ने उन्हें स्टार बना दिया। उसके बाद नोटंकी साला, बेवकूफियां, हवाईजादा आदि फिल्में कुछ खास नहीं कर पाई लेकिन दम लगा के हईशा  की सफलता ने उन्हें एक बार फिर हॉट कर दिया। अब उनकी आने वाली फिल्म का नाम है ‘ मेरी प्यारी बिंदू’ । इस फिल्म को लेकर आयुष्मान ने अपने अनुभव कुछ इस प्रकार शेयर किये।

कहीं कहीं एक औरदम लगा के हईशा’  जैसी फिल्म ?

हां राइटर फ्लेवर कह सकते हैं । वैसे ये फिल्म दम लगा … से बहुत ही अलग है आप कह सकते हैं दम लगा के हईशा वाज टू रूटिड। मेरी प्यारी बिंदू एक अर्बन फिल्म है जो कोलकाता और मुंबई में बेस्ड है। इसका टोन कतई अलग है। वहां मैं सिंपल सा लड़का था जबकि यहां मैं राइटर हूं जो काफी इंटेलीजेन्ट लड़का है।

फिल्म के टाइटल को सुनकर आपका पहला रियेक्शन क्या था ?

टाइटल की बात की जाये तो पहले इसका टाइटल था ‘साइड बी लव’ जैसे किसी भी कसेट में साइड ए बी होता है ये वही था। मेरी प्यारी बिंदू रखने की वजह ये थी क्योंकि लड़की इसके पड़ोस में रहती है और उसका नाम बिंदू है इसलिये बाद में ये टाइटल सलेक्ट किया  जो पहले से कहीं ज्यादा मैच करता हुआ था।

 अपने किरदार के बारे बताईये ?

अभिमन्यु रॉय बिंदू के पड़ोस में रहता है वो काफी समझदार लड़का है और लेखक है  लेकिन बिंदू उससे इतना प्यार नहीं करती। इनकी जर्नी है पांच से लेकर पेंतीस साल तक की। उस बीच इनके बीच दोस्ती होती है, गाने होते हैं। मोस्टली बिंदू उसकी प्रेरणा है क्योंकि वो फन फिक्शन राइटर है, हॉरर नॉवल लिखता है उस के नॉवल में जितने भी किरदार होते हैं वो सब बिंदू पर आधारित  हैं।

आज ज्यादातर एक फिल्म में एक से ज्यादा म्यूजिक डायरेक्टर्स होते हैं ?

वो फिल्म की टोन से निर्धारित किया जाता है कि  आप एक ही म्यूजिक डायरेक्टर के साथ जा सकते हैं या किसी फिल्म का दायरा इतना बड़ा है कि उसमें एक से ज्यादा म्यूजिक डायरेक्टर्स आ सकते हैं । अब जैसे दम लगा के हईशा में एक ही म्यूजिक डायरेक्टर अनु मलिक थे। इसी प्रकार मौजूदा फिल्म में भी  सचिन जिगर एक ही म्यूजिक कंपोजर हैं।

आपके लिये इन्डस्ट्री के लोगों के रवैये में कब बदलाव आया ?

दम लगा के हईशा के बाद। वैसे आम किरदार की बात की जाये तो मैं नार्थ से हूं पंजाबी हूं तो आराम  कर सकता हूं लेकिन मैं कभी हरिद्वार, ऋषिकेश गया नहीं था उसमें सच में मुझे अपनी भाषा और किरदार के लिये  काफी मेहनत करनी पड़ी थी। उसके बाद ही एक्टर के तौर पर मुझे लोगों ने सीरियसली लेना शुरू किया। देखिये पहली फिल्म में सब माफ होता है, पहली फिल्म में आप थौड़ा सा भी कर दो और वो चल जाती है तो लोग बाग वाह वाह करने लगते हैं, लेकिन उसके बाद की फिल्मों में आपको खूब अच्छी तरह से जांचा परखा जाता है।

फिल्म के डायरेक्टर अक्षय रॉय की ये पहली फिल्म है ?

इससे पहले उनकी बालाजी और धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म आने वाली थी जिसका नाम था ‘बदतमीज दिल’, उसमें करीना कपूर और इमरान हाश्मी थे लेकिन वो फिल्म शेल्व हो गई। उसके बाद उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म बनाई थी, जिसके लिये उन्हें नैशनल एवार्ड मिला था। दूसरे कभी कभी ऐसा होता है कि अगर डायरेक्टर नया है तो उसका प्रोड्यूसर मजबूत होना चाहिये । मनीष शर्मा ही दम लगा के हईशा में थे और अब आदित्य चोपड़ा हैं। मेरे कहने का मतलब कि वो कांबिनेशन जरूरी होता है।

फिल्म की शूटिंग कहां कहा हुई ?

हमने नार्थ कोलकाता में काफी शूट किया, सेट जेवियर कॉलेज में शूट किया, हावड़ा ब्रिज पर शूट किया और सड़कों पर शूट किया ।

आपकी इमेज एक सीधे सादे शख्स की है। आगे ये इमेज तौड़ने के लिये कमर्शल फिल्में करना चाहेंगे ?

पहले तो ऐसा है कि आज कल रीयलस्टिक फिल्में काफी पंसद की जा रही हैं। मुझे आदित्य सर ने एक महीना पहले कहा था कि आपकी पर्सनेलिटी स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट होती है जो अच्छी बात है  क्योंकि उसमें एक सच्चाई नजर आती  है आप एक ऑनेस्ट एक्टर नजर आते है। इसलिये पहले तो आपको उस जोन में अपने आपको स्टेब्लिश करना है।

 


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये