बी. आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ को दोबारा देखकर और समय यानि अपने आपको सुनकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है- हरीश भिमानी

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सन 80 के दशक का लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ जिसे देखने के लिए लोग रविवार को जल्दी उठकर, नहाधोकर एक नियन से घर के लगभग सभी लोग टीवी के सामने बैठ जाते थे। कार्यक्रम शुरू होते ही ‘महाभारत कथा’ वाला टाइटल गीत और इसके बाद एक अंधेरी सी स्क्रीन पर आती थी ‘समय’ की आवाज़, जिनकी सबसे पहली लाइन थी ‘मैं समय हूँ’! महाभारत के इस संस्करण के सभी किरदारों ने अपने हुनर से बहुत लोकप्रियता हासिल की और जहां तक सूत्रधार ‘समय’ की बात है तो महाभारत के इस ‘अदृश्य’ किरदार को आवाज़ देने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वॉइस ओवर आर्टिस्ट, ग्लोबट्रॉटिंग एंकर  और लेखक हरीश भिमानी ने भी इस सफलता का अंदाजा नहीं लगाया था। बी. आर. चोपड़ा की इस ‘महाभारत’को स्टार भारत ने एक बार फिर इस लॉकडाउन में अपने दर्शकों तक पहुंचाने का फैसला  किया ताकि लोग धर्म और अधर्म की इस गाथा के साक्षी बन सकें। हरीश भिमानी से ‘महाभारत’  धारावाहिक पर हुई बातचीत के कुछ अंश:

आप लॉकडाउन में अपना समय कैसे बीता रहे हैं ? 

मेरे लिए यह लॉकडाउन का जो तरीका है वह नया नहीं है। मैं अपने बंगलो से ही अपना ज्यादातर काम  करता हूँ जो यशराज के ऑफिस के सामने स्थित है मेरे अपने बंगले में ही मेरे पास अपना अलग ऑफिस है, अलग स्टूडियो है और अपना स्डी  रूम है। चूकिं लॉकडाउन चल रहा है तो मेरे इंजिनियर और मेरी अकाउंटेंट इस वक़्त दोनों घर से काम कर रहे हैं पर हाँ इन दिनों मैंने कई नई स्किल्स जरूर सीखी हैं। मैंने हाल ही में अपनी असिस्टेंट को कॉल करके ये कहा कि इस वक्त हमारे ऑफिस की सफाई आप सभी के देखने लायक है। आज तक मैंने कभी बर्तन मांजने की कोशिश नहीं की थी और पर आज से पहले मेरे बर्तन इतने कभी चमके भी नहीं थे और कपड़े इतने अच्छे कभी सूखे नहीं थे। (हँसते हुए)

आपको ‘महाभारत’ शो के री-रन को देखकर कैसा महसूस हो रहा है ? 

मैंने अपना करियर एक टेलीविजन न्यूज़ कास्टर के रूप में शुरू किया था, जिसके बाद मैंने वॉइस ओवर किया  फिर एंकरिंग की । मैं आलरेडी यह सारी चीजें कर रहा था पर आपके इन सभी कामों कोई ऐसा काम होता है न जो एकदम मार्की (चर्चित) बन जाता है। एक आवाज़ जो बहुत फेमस बन जाती है और किसी को यह पता नहीं था कि महाभारत अचानक इतना पॉप्युलर बन जाएगा। मैंने उस समय लिखना भी शुरू किया था। खानदान सीरियल लिखने के साथ ही मैंने इसके पैरेलल चलने वाले शो ‘दुनिया’ के लिए भी डायलॉग लिखा था। आज के दौर में तक़रीबन 1200 चैनल, ओटीटी प्लैटफॉर्म और यूट्यूब जैसी ऐसी कई चीजें हैं, जिसमें से ऑडिएंस चुन सकते हैं। आज जब मैं स्टार भारत पर दोबारा बी. आर. चोपड़ा की महाभारत देख रहा हूँ और समय यानि अपने आपको सुन रहा हूँ तो मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है और मेरी पुरानी यादें ताज़ा हो जा रही हैं ।

 क्या आप महाभारत में ‘समय’ के लिए सबसे पहली चॉइस थे ? 

जब महाभारत के इस कॉन्सेप्ट की शुरुआत हुई और जब इसका पहला ढांचा बना तब यह तय किया कि  इस बड़ी गाथा को बयां करने के लिए सूत्रधार का होना बेहद जरुरी है।फिर सोचा गया लोग कैसे उस  आवाज़ से कनेक्ट करेंगे, जो बोलेगा वह कैसा दिखेगा,  कैसे बोलेगा। तब राही मासूम रज़ा ने कहा कि यह किरदार तो केवल समय अपनी भाषा में ढाल सकता है जिसकी न कोई उम्र है न कोई चेहरा और हर युग का साक्षी है। बी. आर. चोपड़ा ने इसके लिए जो पहला नाम सोचा गया था वह थे दिलीप कुमार जी  समय (सूत्रधार) को चुनने के लिए बी. आर. चोपड़ा ने 2 दिन तक रेडिओ और टीवी देखते रहे और सुनते रहे और  पास में एक ऐसा व्यक्ति बिठा रखा था जो बताए की यह किसकी आवाज़ है । तब एक एड में मेरी आवाज़  सुनकर चोपड़ा जी ने पूछा कि यह किसकी आवाज़ है तो पता चला कि यह हरीश भिमानी की आवाज़ है । उन्होंने तुरंत अपने बेटे रवि को फोन किया और कहा कि आप हरीश को जानते हैं तो उन्होंने मेरी बहुत तारीफ की क्युकी मैं उनके साथ काम कर चूका था ऐसे में उन्होंने कहा कि हम समय के लिए हरीश जी के बारे में सोच रहे हैं । जिसपर उन्होंने बी. आर. जी को कहा कि यह बिलकुल अच्छा चुनाव है ।


आपको महाभारत के सूत्रधार समय के लिए कैसे चुना गया ?

महाभारत में समय के पहले ऑडिशन के लिए सबसे पहले मुझे महाभारत के कास्टिंग डायरेक्टर गुफी  पेंटल (जिन्होंने शकुनी का रोल निभाया था) का फ़ोन आया और उन्होंने बिना इधर उधर की बात किए सीधे हरीश को रात 10 बजे बी आर स्टूडियो पहुंचने के लिए कहा। तब मैंने कहा कि ‘गूफी जी मैं सात बजे के  बाद रिकॉर्डिंग नहीं करता  मेरी आवाज़ थक जाती है।’ इस पर पेंटल जी ने कहा ‘तू नखरे ना कर, बस सीधे आजा।’फिर जब मैं स्टूडियो पंहुचा तब वहां

बी.आर.चोपड़ा, राही मासूम रज़ा और पंडित नरेंद्र शर्मा बैठे हुए थे जिनके सामने पहली बार मुझे ‘समय’ के लिए अपनी आवाज़ दी थी, बगैर यह जाने की आखिर यह हो क्या रहा है। मैं जब ठीक दस बजे स्टूडियो पंहुचा तो बी आर चोपड़ा कुर्ता और लुंगी में बैठे थे। उनके साथ हिंदी साहित्य के दो जाने माने नाम राही मासूम रज़ा और पंडित नरेंद्र शर्मा भी मौजूद थे। मुझे बगैर ज्यादा कुछ जानकारी दिए ‘समय’ की स्क्रिप्ट दी गई और मैं माइक के पीछे पहुंच गया। पहली बार में मेरा अंदाज़ पसंद नहीं किया गया और रज़ा ने कहा ‘बेटा यह तो डॉक्यूमेंट्री जैसा कुछ लग रहा है। ज़रा  इत्मिनान से पढ़ो।’ दो तीन बार फिर स्क्रिप्ट पढ़वाए जाने के बाद मुझे जाने के लिए बोला दिया गया जिस पर मैं थोड़ा निराश हो गया। क्युकि मुझे यह बताया ही नहीं गया था कि आखिर मुझे किसके लिए रेकॉर्डिंग करनी है। कोई फिल्म है डॉक्यूमेंट्री है या कुछ और। 

कुछ दिनों बाद पेंटल जी का फिर फोन आया और उनसे एक बार फिर स्क्रिप्ट पढ़वाई गई। इस तरह उन्हें बार बार स्टूडियो बुलाया जाने लगा लेकिन बात बनती नहीं लग रही थी। समय को लेकर मेरा बोलने का अंदाज़ चोपड़ा जी और रज़ा जी को जम नहीं रहा था। हारकर मैंने उनसे पूछा कि आखिर यह समय क्या है। रज़ा ने कहा ‘बेटा यह महाभारत के समय की आवाज़ है।’ इस पर मैंने परेशान होकर कहा ‘यह समय की आवाज़ कैसी होती है और स्क्रीन पर क्या दिखाई देगा।’ जवाब मिला – स्क्रीन पर कुछ नहीं होगा। ‘इस पर काफी बहस और चर्चा के बाद मुझसे कहा गया कि हमें आवाज़ तो आपकी चाहिए, लेकिन अंदाज़ आपकानहीं चाहिए। काफी सोचकर मैं माइक के पास गया और मैंने सोचा कि मैं कैसे नहीं बोलूंगा। बोलते वक्त अपने अंदाज़ में मैं महाभारत की भव्यता को तो ध्यान में रखूं लेकिन बोलूं कुछ इस तरह जैसे आम इंसान नहीं बोलता, कुछ ऐसा जो न आकाशवाणी है, न ईश्वर की आवाज़ है, बस…समय की आवाज़ है।’ और इस सोच के साथ मैंने रिकॉर्ड की ‘समय’ की आवाज़, जिसने टेलीविज़न और फिल्म की दुनिया में इतिहास रच दिया।

महाभारत के बाद आप और किन चीजों में इतने साल बीजी रहे ? 

मैं इस वक़्त तक़रीबन 25 हज़ार रिकार्डिंग को लीड कर रहा हूँ। मैं ग्लोबली भी काम करता हूँ और मुझे  टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करके अपने काम को करना बहुत पसंद करता हूँ। ग्लोबली रिकॉर्डिंग के जरिए हम तक़रीबन 38 देशों में अपने क्लाइंट्स को रेकॉर्डेड ऑडियो कॉन्टेंट देते हैं । इसके अलावा खानदान, सुकन्या, ग्रहण, छोटी बड़ी बातें जैसे शोज़ मैंने लिखे हैं। तीन फ़िल्में भी लिखी हैं। मैंने कई बुक्स भी लिखी हैं जिसमें बेस्ट सेलर बुक ‘इन सर्च ऑफ लता मंगेशकर’ नाम की लता जी पर बायोग्राफी है।

कुछ मिनी बुक्स भी लिखी जो आशा भोसले, अमिताभ बच्चन, मोहम्मद रफ़ी, आर. डी. बर्मन पर आधारित थी। 


ऐसी कौनसी चीज आपको रेडिओ और वॉइसओवर में खिंच ले आई ? 

मुझे बचपन से रेडिओ का शौक रहा है और मैंने अपने घर में बताया कि मुझे रेडियो में करियर बनाना है तो मेरे अंकल ने इसपर मुझे डांटा भी था कि अच्छी बात है आपको रेडियो पसंद है पर आपको अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना है। उस दौरान हमें अपने करियर को चुनने में कई परेशानी होती थी। जो पढ़ने में बहुत अच्छा था वह साइंस लेगा, जो थोड़ा कम है वह कॉमर्स लेगा और फिर बाकि लोग आर्ट्स लेंगे। मैं पढ़ने में अच्छा था और अच्छे नंबरों से पास भी हुआ जिसके बाद मैंने मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में एडमिशन लिया और कॉलेज की पढ़ाई की। उसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की और अच्छे नंबरों से वहां भी पास हो  गया ।फिर किसीने मुझे एमबीए करने की सलाह दी । इसके बाद मैंने जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से एमबीए किया और एक्ज़ाम पास करके मुझे बेस्ट जॉब मिल गई । जहाँ पैसा, फ्यूचर करियर सब था  फिरभी मुझे ऐसा लगता था कि कर तो रहा हूँ पर मज़ा नहीं आ रहा है, जिसके बाद मैंने काम के साथ ऑल इंडिया रेडिओ में छुपकर काम करना शुरू किया और मैं एक म्यूजिकल प्रोग्राम की  एंकरिंग करता था।  जहाँ मैं बड़ी हस्तियों के इंटरव्यू करता था। ऐसे ही मेरे किसी प्रोग्राम का छोटासा एड किसी अखबार में छप गया। 

एक दिन मेरे कलीग ने मुझे फ़ोन किया और कहा हरीश आप सेलिब्रिटी हैं आपके पास नाम है आपका  नाम एक एड में मैंने अभी पढ़ा आप एक फेमस एंकर हैं और यह बहुत बड़ी बात है  ऑडिशन की साढ़े तीन महीने की मेहनत के बाद मैं एक विविध भारती ऑडिशन देने गया जहाँ 1600 लोगों की लाइन लगी थी ज्यादातर लोग बड़ी पहुंच वाले लोगों के लेटर लेकर आए थे । मैंने सोच लिया था कि यहां मेरा काम नहींहोगा फिरभी चलो अब जब आए हैं तो करते हैं। उन्हें एक न्यूज़ एंकर और एक म्यूजिक एंकर की तलाश थी। उन्होंने मुझसे वहां बैठी पैनल ने तीन बार एक न्यूज़ आर्टिकल पढ़वाया और एक बार दोबारा पढ़ने को कहा हंसी, ठिठोली में मैंने अपना ऑडिशन दिया क्युकी मैं जनता था कि वहां  मेरा सिलेक्शन नहीं होना है फिर वापस लौट आया फिर मुझे कहा आपको बताया जाएगा अगर आपका सिलेशनत हुआ तो। कुछ 
दिन बाद मन नहीं माना तो मैं उनके ऑफिस पहुंच गया और कहा कि मैंने ऑडिशन दिया है रिसेप्शन पर  बैठी महिला ने मदिरा मज़ाक उड़ाया कहा अच्छा किया आप ऑडिशन देने आए थे बहुत अच्छा किया  आपने   फिर मैं लौट गया जिसके कुछ दिन बाद मेरे घर लेकर आया और मुझे सिलेक्ट कर लिया गया था  इसके बाद यह सिलसिला चलता गया।   


Mayapuri