INTERVIEW: बॉलीवुड को मैं बीवी की तरह समझता हूं, गर्लफेंड की तरह नहीं – बब्बू मान

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पंजाबी सिंगर बब्बू मान आज किसी परिचय के मोहताज नहीं। गायक,गीतकार और कंपोजर बब्बू मान अभी तक एक दर्जन एलबम, बाइस सिंगल एलबम तथा करीब डेढ़ दर्जन हिन्दी पंजाबी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू चला चुके हैं। इसके अलावा देश विदेशे में वे अभी तक सैंकड़ों स्टेज शोज कर चुके हैं। आज भी उनका ये सफर अनवरत जारी है। हाल ही में उनसे उनके नये सिंगल एलबम ‘मेरा ग़म 2’ की लॉन्चिंग पर हुई एक बातचीत।

बब्बू मान का मौजूदा सिंगल को लेकर क्या कहना है?

दरअसल छह सात साल पहले इसका पहला वर्जन किया था। उसके बाद से लगातार इसके दूसरे वर्जन की डिमांड आ रही थी, जो मैं वक्त की कमी के चलते पूरी नहीं कर पा रहा था। अब वक्त मिला तो आठ दस ग़ज़लें एक साथ कर ली।

बाकी ग़ज़लों को किस तरह रिलीज करेंगें?

जैसा कि आज सिंगल का रिवाज है, उसी के तहत एक एक करके इन्हें रिलीज किया जायेगा। अभी ‘मेरा ग़म’वर्जन 2 रिलीज किया है। इसका वीडियो वैंकूअर विदेश में फिल्माया गया है।

 बॉलीवुड को लेकर आपका क्या सोचना है ?

बॉलीवुड की बात की जाये तो बॉलीवुड को मैं बीवी की तरह समझता हूं, गर्लफेंड की तरह नहीं, क्योंकि यहां काम करने के लिये टिक कर रहना पड़ता है। वैसे मैने अभी तक करीब डेढ़ दर्जन हिन्दी पंजाबी फिल्मों में गाया है जैसे रब ने बनाइयां जोड़ियां, दिल तैन्नू करदा है प्यार और वागा (पंजाबी), खेल,हवायें चलते चलते,वादा रहा, कु्रक, बाज़ तथा साहेब बीवी और गैंगस्टर आदि। दरअसल मैं वर्ल्ड वाइड स्टेज शोज से जुड़ा हुआ हूं लिहाजा फिल्मों में गाने का वक्त ही नहीं मिल पाता। लेकिन आगे फिल्मों में गाने के लिये पांच छह महीने निकालने का शेड्यूल बनाने का सोच रहा हूं।

क्या वजह है कि ग़जल लगभग गायब हो चुकी है?

दरअसल आज यंगस्टर्स अंग्रेजी हो गये हैं। उर्दू से उनका दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं रहा और जो उर्दू को समझने वाले हैं उनकी तादाद लगातार कम होती जा रही है लिहाजा गज़ल सुनने वाले कम रह गये। इसके अलावा अब लाइफ बेहद फास्ट हो चली है, पैसा कमाने की होड़ लगी हुई है, हर कोई कम वक्त में ज्यादा पैसा, ज्यादा शौहरत पाना चाहता है। ग़जल सुकून से सुनने की चीज है लेकिन आज सुकून किसी को है कंहा।

फिर भी आप ग़जल गाते हैं और एलबम निकालते हैं ?

उसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि ग़ज़ल गाने और सुनने का खुद मुझे बहुत शौक है। मैने पहले भी ‘मेरा ग़म’नामक ग़ज़ल एलबम बनाया था जो उस दौरान बुर्जुगों, कुछ उर्दू दां अफसरान तथा पंजाबी गांव के उन लोगों को बेहद पंसद आया था, जो उर्दू के जानकार हैं। उस वक्त से लगातार मुझे इसके दूसरे भाग की फरमाईश की जा रही थी लिहाजा उनकी मांग पर मैने ‘मेरा ग़म 2’ बनाया। इसे मैने ही लिखा गाया और कंपोज किया है।

ग़ज़ल की बात की जाये तो आपके पंसदीदा ग़ज़ल गायक कौन रहें हैं?

स्व. जगजीत सिंह मेरे हमेशा से फैवरेट ग़ज़ल गायक रहे हैं। ग़ज़ल सिंगर और भी काफी बड़े बडे़ हुये है लेकिन जगजीत सिंह जी की आवाज के रेशे और किसी के पास नहीं हैं।

आपने कहा कि आपने एक साथ कई ग़ज़ल कंपोज कर ली हैं। उन्हें कैसे रिलीज करेंगे?

जैसे ये सिंगल ट्रैक है बिलकुल वैसे ही आगे करीब आठ नो ट्रैक और हैं, जिन्हें समय समय पर पर एक एक करके रिलीज करना है।

इस एलबम में उर्दू के शब्द कैसे और कितने हैं?

जैसा कि आज गूढ़ उर्दू बहुत कम लोगों को आती है इसीलिये मैने बहुत ही आसान और सरल उर्दू ग़ज़ल में यूज की है, इसके अलावा म्यूजिक में वाइलिन के अलावा कुछ मॉर्डन साज लिये हैं यानि ये ग़ज़ल हर किसी को आसानी से समझ आयेगी।

आप गाते हैं लिखते और कंपोज भी करते हैं। इनमें आपका फैवरेट क्या है?

देखिये जैसे पहले बच्चा जन्म लेता है,बड़ा होता है फिर जवान होता है। तो यहां जन्म शब्द है, इसके बाद कंपोजिंग फिर म्यूजिक का नंबर आता है, हालांकि आज इंटरनेट का जमाना है इसलिये कंपोजिंग तो कैसी भी कहीं की भी की जा सकती है लेकिन शब्द तो आपके ही होते हैं, उनमें बदलाव नहीं हो सकता इसलिये लिखने से मुझे बहुत प्यार है क्योंकि वो सिर्फ मेरा है।

आप हमेशा पंजाबी ही बोलते हैं या……?

देखो जी, पंजाबी मेरी जबान है, इसी में मैं गाता हूं। हां हिन्दी फिल्मों के गीत हिन्दी में गाये हैं लेकिन हिन्दी मैं बोल नहीं पाता। इसलिये ये इन्टरव्यू भी पंजाबी में ही कर रहा हूं।


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Mayapuri

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