मूवी रिव्यू: बेबी – देश के खुफिया तंत्र को खंगालने में पूरी तरह कामयाब

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एक तरफ तो नीरज पांडे आम आदमी की ताकत को फिल्म ‘ ए वैडनस डे’ में कुछ इस तरह से दिखाते हैं कि उसे देखते हुये हर किसी ने अपना सीना फुलाना शुरू कर दिया था । इसके बाद वे ‘स्पेशल 26’ में भी कहानी उतनी ही वास्तविकता से दर्शाते हैं । इस बार उन्होंने देश पर मर मिटने वाले जांबाजो के उन कारनामों की झलक फिल्म ‘बेबी’ में दिखाई हैं । वास्तव मैं  ऐसे जांबाजों की एक खुफिया संस्था रही है जिसे आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया था । नीरज ने बड़ी कुशलता से फिल्म में वो सब दिखाया है जिसे देख दर्शक का सिर स्वंय ही उन देशभक्त जांबांजो के प्रति झुक जाता है जिन्हें शहीद हो जाने पर भी वो मान नहीं मिल पाता जिसके वे सही मायने में हकदार हैं।

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देश की एक बेहद खुफिया एजेंसी जिसके एजेंटों को आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा था । इस संस्था के चीफ हैं डेनी । एक बार उन्हें पता चलता है कि देश से दूर इस्तानबुल में आंतकवादियों ने दिल्ली में बम विस्फोट करने की योजना बनाई है । इस केस पर डेनी अपने सीनियर आफिसर अक्षय कुमार को नियुक्त करते हैं । इस आॅपरेशन को नाम दिया जाता है ‘ बेबी’ । खोजबीन के दौरान अक्षय को पता चलता है कि उन्हीं का ऐजेंन्ट जमाल यानि करण गुप्ता दुश्मनों से मिल गया है उसी की मुखबरी के कारण उसका एक एजेंट दुश्मनों के हत्थे चढ़ गया । अक्षय अपने एजेंट को तो नहीं बचा पाता लेकिन जमाल को पकड़ उससे ये पता लगाने में कामयाब हो जाता है कि दिल्ली में कहा विस्फोट किया जाना है । दरअसल आतंकवादियों का एक प्रमुख आदमी के के मेनन दिल्ली पुलिस के कब्जे में है ।

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इनके सरगना मौलाना मौहम्मद रहमान यानि राशिद नाज़ को के के मेनन चाहिये । इसलिये वो उसे किसी तरह आजाद करवा लेता है । डेनी को सूचना मिलती है कि मेनन सउदी अरब जाकर अपने मौलाना के लिये फंड का इंतजाम करने में माहिर है । इसलिये किसी भी तरह उस तक पहुंचना बहुत जरूरी है क्योंकि ये लोग भारत में कई जगह भयंकर वारदात करने का प्लान बना रहे हैं । इनकी बीच की कड़ी नेपाल में हैं इसलिये अक्षय और अपनी एक यंग एजेंट तापसी पन्नू का इस्तेमाल उस कड़ी सुशांत सिंह तक पुहंचने के लिये करता है । उसे उससे पता चलता है कि सउदी में के के उन लोगों से मिलने वाला है जो उनके लिये फंडिंग करते हैं ।

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लेकिन वहां अक्षय को के के मेनन के अलावा उनका सरगना मौलाना हाथ लग जाता है । बाद में वो वह अपने सहयोगी शुक्ला यानि अनुपम खेर और राणा डग्गूबती के साथ किसी तरह मौलाना को भारत लाने में कामयाब हो जता है ।

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एॅक्शन थ्रिलर जॉनर में बेबी एक सर्वश्रेष्ठ फिल्म साबित होती है । फिल्म देखकर ये भी पता चलता है कि कहानी के पीछे ढेर सारा रिसर्च किया गया है। किसी फिल्म में शायद पहली बार दिखाया गया है कि एक खुफिया आफिसर की निजी जिन्दगी कैसी होती है उसके काम का उसके परिवार पर क्या असर पड़ता है । अक्षय की पत्नि की भूमिका मधुरिमा तुली ने निभाई है । उसका हर बार ये कहना कि जब काम हो जाये आना लेकिन मरना मत । उसने अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह न्याय किया है । पूरी फिल्म पर अक्षय कुमार ही छाये हुये हैं ।

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अपनी पिछली फिल्म हॉलीडे के बाद एक बार फिर उन्होंने खुफिया आफिसर को बहुत ही असरदार अभिव्यक्ति दी है । उनके एॅक्शन दृश्य कमाल के हैं । छोटी लेकिन अहम् भूमिकाओ में तापसी पन्नू और राणा दग्गूबाती प्रभावशाली रहे । अनुपम खेर, करण गुप्ता, मिकाल जुल्फीकार, जमाल खान आदि कलाकार भी उल्लेखनीय रहे। के के मेनन को वेस्ट किया गया है । लेकिन डेनी अपने किरदार में पूरी तरह फिट हैं। पाकिस्तानी एक्टर राशिद नाज़ आतंकवादी सरगना मौलाना मौहम्मद रहमान की भूमिका निभाते हुये शिद्दत से अहसास करवाते हैं कि वे कितनी उम्दा एक्टर हैं । इससे पहले उन्हें पाकिस्तानी फिल्म ‘ना खुदा’ में देख चुके हैं । ऐशा गुप्ता का आइटम सांग ठीक ठाक रहा । स्क्रीनप्ले इतना शानदार लिखा गया है कि दर्शक पूरे समय फिल्म से जुड़ा रहता है ।

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पूरी रफ्तार से जुड़ते टूटते घटनाक्रम को और असरदार बनाता है फिल्म का बैकगाउंड म्यूजिक। फिल्म से जुड़ी हर चीज इतनी परफेक्ट है लगता है वो फिल्म के लिये ही हो । डायरेक्शन की बात की जाये तो नीरज पांडे एक बार फिर एक अच्छी फिल्म देने में कामयाब रहे हैं । बेबी एक ऐसा दस्तावेज है जो देश के खुफिया तंत्र को खंगालने में पूरी तरह कामयाब है ।


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Mayapuri

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