बलिजेपल्ली लक्ष्मीकांत

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हैप्पी बर्थडे बलिजेपल्ली लक्ष्मीकांत

बलिजेपल्ली लक्ष्मीकांत याफिर लक्ष्मीकांत कवी का जन्म 23 दिसम्बर 1881 को श्री कालाहस्ती चित्तौर डिस्ट्रिक्ट मे नरसिम्हा सस्ट्री और आदिलक्ष्मम्मा के यहाँ हुआ था। वो न केवल एक एक्टर, पोएट, स्क्रीनराइटर, ड्रामाटिस्ट थे बल्कि एक सच्चे देशभक्त और फ्रीडम फाइटर भी थे ।उन्हें सदैव उनकी लिखी 1924 की मास्टरपीस हरिस्चन्द्र और तेलुगु सिनिमा में दिए इनके योगदान के लिए जाना जाता रहेगा।

बलिजेपल्ली लक्ष्मीकांत ने कूरनूल से मैट्रिक मे पास होने के बाद उन्होंने कुछ सब-रजिस्ट्रार ऑफिस मे ऐज़ आ गुमास्ता काम किया।उसके बाद इन्होंने हिन्दू कॉलेज मे एक अध्यापक के भी  नोकरी की ।इसके साथ वो अलग अलग ज़मीदारियों मे घूमकर अवधानाम्स भी सिखाते थे।

उन्होंने 1922 मे चल्लापल्ली राजा की मदद से गुंटूर मे चन्द्रिका प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की।उसके अलावा इन्होंने देशभक्ति अन्दोलोनो मे भी बाद चढ़ कर योगदान किया यहाँ तक की इन्होंने नमक आंदोलन मे भी भाग लिया और जेल भी गए व जैसे ही ये सजा पूरी करके बहार आए तो इन्होंने सत्या हरिश्चन्द्रियं ड्रामा भी लिखा और 1926 मे पहली ड्रामा कम्पनी भी बनाई जहाँ इन्होंने सत्या हरिश्चन्द्रियं और उत्तर राघवं नामक नाटक कई बार खेले जहाँ वो सबसे मुश्किल रोल करते थी जिनमे इन्होंने सबसे ज़्यादा नक्षत्रक का रोल किया।

इन्होंने फिल्म इंडस्ट्री मे एंट्री चिट्टजल्लू पुल्लय्या के बार बार इनकरेज करने पर की और कई तेलगु फिल्मो के लिए डायलॉग ,सांग लिखे और कुछ मे एक्टिंग भी की ।एक अभिनेता के तौर पर इन्होंने 1939 की फिल्म ‘वारा विक्रयाम’ मे काम किया उसके बाद इन्होंने कई फिल्मे की जैसे अनसूया (1936 ), जरासंध (1938),मल्ली पेल्ली (1939),भूकैलास (1940),विश्व मोहिनी (1940),जीवन मुक्ति (1942),बाला नागम्मा (1942),तहसीलदार (1944),ब्रह्मा राथम (1947),रक्षरेखा (1949)आदि । इनकी मृत्यु श्री कालाहस्ती मे 1953 हुई ।


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Mayapuri

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