बॉलीवुड की इन फिल्मों को आप भारत में नहीं देख सकते ?

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बॉलीवुड हर साल फिल्मों की गिनती के मामले में दुनिया में सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है। हालांकि, बॉलीवुड में हर धर्म, हर प्रान्त, की फ़िल्में बनती है जहाँ एक और इमोशन, थ्रिलर, ड्रामा, सस्पेंस की फ़िल्में बनती है वही दूसरी और कुछ ऐसी भी फ़िल्में बनती है जो समाज से हट कर होती है। और उन फिल्मों में सच्चाई दिखाने के लिए कुछ रियल बनाने के लिए कुछ उत्तेजक दृश्य डाले जाते हैं, जो की किसी धर्म या किसी प्रान्त को प्रभावित करती है। कई फिल्मों में तो भद्दी व अभद्र भाषा का प्रयोग होता है। जोकि न तो सेंसर को और ना ही पब्लिक को हजम होती है। इसी के मध्य नज़र रखते हुए हम आपको कुछ फिल्मों की लिस्ट और उनके बारे में बताने जा रहे है कि और बताएँगे कि वो क्यों भारत में प्रतिबंधित है।

1. बेंडिट क्वीन (1994)

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बेंडिट क्वीन, सीधे ‘आक्रामक’, ‘अशिष्ट’, ‘अभद्र’ से परिपूर्ण इस फिल्म के ऊपर सेंसर बोर्ड के सिनेमाई रूढ़िवाद लोग खूब हँसे। विषय इस तरह था। फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी । इस शेखर कपूर ने इस फिल्म में स्पष्ट यौन सामग्री जैसे लोगों और डाकू द्वारा उसका गैंग रैप होना, नग्नता और अपमानजनक भाषा का भरपूर प्रयोग किया था ताकि देखने वाले फूलन देवी कि सच्चाई से रूबरू हो सके, लेकिन सेंसर बोर्ड को फिल्म में परोसी गयी सामग्री से ऐतराज था भला सेंसर बोर्ड को कैसे पचा सकता था लिहाजा ये फिल्म को भारत में प्रतिबंध कर दिया गया था ।

2. फायर (1996)

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दीपा मेहता हमेशा कुछ बॉलीवुड लीग से हट कर फिल्में बनाती है जिसके लिए वो जानी जाती है। दीपा मेहता हमेशा ही समाज में चलने वाले मुद्दों फ़िल्में बनाती है । ऐसी ही एक फिल्म है “फायर” जिसके आलोचक आज भी आपको मिल जायेगा। हालाँकि इस फिल्म कि प्रसंशा भी हुई, आइये हम आपको बताते है कि क्या कहानी थी, क्यों यह फिल्म दुनिया कि नज़र में आयी. इस फिल्म में एक परिवार में रहने वाली जेठानी और देवरानी के बीच हुए समलैंगिक संबंध को पेश किया गया था जिसकी वजह से हिन्दू समूहों को यह फिल्म बिलकुल भी नहीं पसंद आयी । इस विवादित फिल्म में काम करने वाली एक्ट्रेस शबाना आजमी और नंदिता दास उनके निर्देशक दीपा मेहता मौत की धमकियाँ भी मिली। और आखिर में सेंसर बोर्ड ने पूरे देश में फिल्म पर प्रतिबंध लगा कर  यह मामला भी कर दिया ।

3. कामसूत्र – अ टेल ऑफ़ लव (1996)

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1996 में एक और साहसिक कदम उठाते हुए एक फिल्म आयी कामसूत्र – प्यार की एक कहानी। यह फिल्म भी सेंसर बोर्ड के प्रकोप से बच नहीं पायी. जो मूल रूप से ‘स्पष्ट’, ‘अनैतिक’ और दर्शकों के लिए ‘अनैतिक’ भावना को दर्शाती थी । यह फिल्म थी मीरा नायर की, जो भारत में 16 वीं सदी में चार प्रेमियों के जीवन पर आधारित थी । आलोचकों के साथ एक हिट किन्तु सेंसर बोर्ड के लिए एक बड़ी फ्लॉप थी । इस फिल्म के बोल्ड सीन्स की वजह से इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने भारत में प्रतिबंध लगा दिया गया।

4. URF प्रोफेसर (2000)

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फिल्मों और सेंसर बोर्ड आपस में गहरा नाता है । इसी तरह एक और फिल्म आयी जिसे बनाया था पंकज आडवाणी ने और जिसका नाम था “उर्फ़ प्रोफेसर” । इस फिल्म में इतनी गालियों का प्रयोग किया गया था कि अगर इस फिल्म में बीप लगाते तो सिर्फ पूरी फिल्म में बीप-बीप की ही आवाजे आती. हालांकि इस फिल्म में छोटे कलाकारों से लेकर उच्च कोटि के कलाकारों ने काम किया जोकि आज के समय के टॉप कलाकारों में गिने जाते हैं । इस फिल्म बोल्ड भाषा तो थी ही और समलैंगिक जैसे रिश्तों को भी गहराई के साथ दिखाया गया था । अतः देर न करते हुए इस फिल्म को भी सेंसर बोर्ड ने भारत में प्रतिबंध लगाने में देर नहीं की ।

5. सिंस (2005)

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एक केरल का पुजारी जो अपनी काम वासना में गिर जाता है वो भी एक महिला के आकर्षण के लिए और यौन सम्बन्थ में उसके साथ शामिल हो जाता है । हालांकि इस फिल्म में लीड रोल में शाहिनी आहूजा थे । हमारा समाज धर्म को बहुत मानता है फिल्म बनाने वालों यानि विनोद पांडेय ने सोचा कि फिल्म में हम रोमन कैथोलिक ईसाई धर्म को अच्छे ढंग से दिखाएंगे लेकिन सेंसर बोर्ड भी इस फिल्म में दिखाए गए अंधेरों में नग्न दृश्यों साथ नहीं दे सकता था और इसलिए लोग फिल्म दिन की रोशनी देख ना देख पाएं इस पर प्रतिबंध लगा दिया ।


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Pankaj Namdev

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