सुष्मिता मुखर्जी: ‘बांझ’ में हैं स्त्री-मन की बातें

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सुष्मिता

दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से निकलने के बाद हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री का रुख करने वाली अदाकारा सुष्मिता मुखर्जी ने दसियों फिल्मों और टी.वी. धारावाहिकों में काम किया। टी.वी. धारावाहिक ‘करमचंद’ में जासूस करमचंद बने पंकज कपूर की सेक्रेटरी किटी’ और रोहित शैट्टी की ‘गोलमाल’ में अंधी दादी के किरदार तो उनके अभिनय की बानगी भर हैं। अभिनेता-निर्देशक राजा बुंदेला की पत्नी सुष्मिता इन दिनों अभिनय से ज्यादा लेखन व सामाजिक कामों में ज्यादा मसरूफ रहती हैं। दो-ढाई साल पहले अपने उपन्यास ‘मी एंड जूही बेबी’ के बाद अब वह अपना एक कहानी-संग्रह ‘बांझ’ लेकर आई हैं। उनकी बातें, उन्हीं के शब्दों में –दीपक दुआ

सुष्मिता

‘मेरी नई किताब ‘बांझ’ असल में 11 लघु कहानियों का संग्रह है जिसमें से एक कहानी का नाम ‘बांझ’ है। लिखने का शौक तो मुझे हमेशा से ही रहा है लेकिन एक्टिंग और दूसरे कामों में व्यस्त रहने के चलते नियमित रूप से लिखना नहीं हो पाता था। इनमें से जो पहली कहानी है वह शायद मैंने 40 साल पहले लिखी होगी और जब-जब मेरे जेहन में कहानियां आती गईं, मैं उन्हें लिख कर रखती चली गई। अब जाकर मुझे यह लगा कि मुझे इनका एक कलैक्शन लाना चाहिए।’सुष्मिता

‘इन कहानियों के जरिए मैंने स्त्री-मन की बात सामने लाने की कोशिश की है। लगभग सभी कहानियां स्त्री केंद्रित हैं और इनके जरिए मैं यह कहने की कोशिश कर रही हूं कि औरतों के बारे में हमारी सोच एकतरफा है जिसे बदलने की जरूरत है।’ – सुष्मिता मुखर्जी

‘अभी तक इस किताब का जो रिस्पांस मिला है उससे मैं बहुत आशान्वित हूं कि मैं जो कहना चाह रही थी वह कह पाई हूं और मुझे लगता है कि एक सार्थक मैसेज इस किताब से निकल कर आ रहा है। मुझे यह भी महसूस होता है कि रचनात्मकता के जितने भी माध्यम हैं चाहे वह लेखन हो, कला हो, अभिनय हो, वह कहीं न कहीं हमारे जीवन पर और हमारी सोच पर असर डालते हैं और शायद यही वजह है कि इन कहानियों को पढ़ने के बाद मुझे बहुत लोगों से सराहना मिल रही है।


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Mayapuri

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