मूवी रिव्यू: मनारेजंन और अभिनय का बढ़िया संगम ‘बैंजो’

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रेटिंग****

मराठी फिल्म नटरंग,बाल गंधर्व तथा बालक पालक जैसी फिल्मों के निर्देशक रवि जाधव कई अवार्ड हासिल कर चुके है। फिल्म बैंजोमें उन्होंने एक ऐसे वाद्ययंत्र बैंंजों को कहानी का आधार बनाया है जो कुछ साल पहले खास कर महाराश्ट्र में गणपति विसर्जन या अव्य धार्मिक समारोहों में बजाया जाता रहा है। इसे बजाने वाले मुंबई की झुग्गी झोपड़ीयों में रहने वाले  गरीब गुरबा लोग हैं इसलिये इसे सड़क का वाद्ययंत्र कहा जाता है।

कहानी

तराट यानि रितेश देशमुख एक झोपड़ पट्टी का अनाथ युवक है जो वहीं के एक कारपोरेटर के लिये हफ्ता वसूली करता है। इसके अलावा वो एक बेहतरीन बैंजो वादक भी है विवाह शादी या अन्य धार्मिक समारोह में जिसकी बहुत डिमांड है। उसके  ग्रीस यानि धर्मेश येलांडे, पेपर यानि आदित्य कुमार तथा बाजा यानि राम मेनन जैसे तीन दोस्त हैं जो उसके साथ ढोल और ताशा बजाते हैं। तराट की तरह ये भी कुछ और काम करते है लेकिन एकस्ट्रा कमाई के लिये बेंजो बजाते हैं। संयोग वश तराट के बैंजो की ख्याति न्यूयार्क पहुंच जाती है जिसे क्रिस यानि नरगिस फाकरी सुनने के बाद अपनी एलबम में कुछ नया संगीत देने के लिये मुबंई इनकी तलाश में आती है। इनके मिलने के बाद वो इनके साथ बैंड बनाकर इन्हें बैंजो के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पंहुचा देती है।riteish-deshmukh

निर्देशन

रवि जाधव के अलावा फिल्म की प्रोड्यूसर की भी तारीफ करनी पड़ेगी क्योंकि इन्होंने बैंजो जैसे एक ऐसे वाद्य को कहानी का आधार बनाने का साहस दिखाया जिसकी तरफ कभी किसी नजर नहीं गई। उन्होंने न सिर्फ बैंजो जैसे विलुप्त हो चुके वाद्य को हाईलाईट किया बल्कि इसे बजाने वालों की लाइफ से भी बखूबी परिचित करवाया। रितेश या धर्मेश तथा निर्देशक खुद मराठी कल्चर से परिचित हैं इसलिये सारे किरदार और माहौल इतना वास्तविक है कि वो किसी भी मुबंई के आम आदमी के आसपास रहने वाले किरदार और माहौल हो सकता है। इसके अलावा नरगिस के तौर पर उन्होंने एक एनआरआई किरदार की भी पर्फेक्ट कास्टिंग की। फिल्म में ऐसी ऐसी लोकेशसं हैं जहां फिल्मी कैमरा कभी कभार ही जा पाता है। कह सकते हैं कि ये रितेश के करियर की सर्वश्रेष्ठ भूमिका हैं जहां उनकी अभिनय प्रतिभा का पूरी तरह से इस्तेमाल हुआ है वरना तो अभी तक उनका कॉमेडी या सेक्स कॉमेडी फिल्मों में मिसयूज होता रहा है। फिल्म की खूबियों में पटकथा और संवाद भी हैं जो कितने ही दृश्यों को मर्माहित कर जाते हैं। हालांकि फिल्म को कमर्शियल रूप देने के लिये कारपोरेटर, बिल्डर माफिया तथा कुछ अन्य चीजें भी डालने के लोभ से नहीं बचा जा सका लेकिन निर्देशक ने फिल्म को मुख्य कहानी से नहीं भटकने दिया।banjo-movie

अभिनय

जैसा कि बताया हैं कि रितेश एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता है। इस बार उन्होंने तराट की भूमिका में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया है जिसमें उनकी पारदर्शिता और लगन साफ झलकती है। उनके साथियों में धर्मेश जो एक कोरियोग्राफर भी है ने अच्छा काम किया हैं तथा आदित्य कुमार और राम मेनन भी अपनी भूमिका में फिट दिखाई दिये हैं। नरगिस फाकरी एनआर आई के रोल में ढेर सारी कमियों के बाद भी जमती है। कॉरपोरेटर के रोल में अनाम अभिनेता कमाल की एक्टिंग कर गये।nargis-fakri

संगीत

फिल्म के कई गीत अच्छे हैं जिनमें गणेश जी का गीत बेहतरीन हैं इसके अलावा युवाओं में राड़ा राड़ा गीत भी काफी पॉपुलर हो चला है।

क्यों देखें

बैंजो जैसे वाद्ययंत्र पर बनी ये एक बेहतरीन फिल्म है, जिसमें मनोरंजन और अभिनय का बढ़िया संगम है।


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Mayapuri

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