बेगम अख्तर का हुआ कई बार तिरस्कार

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मायापुरी अंक 12.1974

अख्तर जिन्दा थी तो भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री दिया किन्तु बेगम अख्तर के शव की जो दुर्गाति सरकारी अधिकारियों ने की. उसे सुन कर सिर लज्जा से झुक जाता है. अहमदाबाद में इण्डियन एयर लाइन्स के अधिकारियों ने बड़ी अड़चने अटकाने के बाद बेगम का शरीर एक विमान में चढ़ाया। दिल्ली में शरीर का लगेज ट्राली पर उतारा गया और एक और धूप में रख छोड़ा गया। पूरे दो घंटे तक बेगम का शरीर वहां पड़ा रहा। इसी बीच बेगम के कुछ प्रशंसक इण्डियन एयर लाइन्स के अधिकारियों से प्रार्थना करते रहे कि शव को विशेष विमान द्वारा लखनऊ भेजा जाए। आखिर संसद सदस्य श्री एस.एम. बनर्जी के प्रयत्नो से शरीर को कानपुर जाने वाले विमान मे रखा गया। कानपुर में बेगम के शव को लेने उनके पति श्री अब्बासी आ गये थे। वहां कोई भी कार वाला बेगम के शरीर को लखनऊ पहुंचाने पर राजी न हुआ। किसी तरह शव एक टैक्सी पर रखकर लखनऊ पहुंचाया गया। क्या किसी छोटे-से नेता के साथ भी ऐसा ही व्यवहार होता ? कदापि नही गालिब भी शायद इसीलिए कह गया

हुए मर के हम जो रुस्वा, हुए क्यों न गर्के दरिया न कही जनाजा उठता, न कही मजार होता।


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Mayapuri

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