बर्थडे स्पेशल: फिल्मों में एक्टिंग से पहले बसों और ट्रेनों में ये काम करत थे अरशद वारसी

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बॉलीवुड फिल्म मुन्नाभाई में सर्किट का किरदार निभाने के बाद लोगों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता अरशद वारसी आज अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। बॉलीवुड फिल्म में अपने अभिनय के लिए मशहूर अरशद वारसी का बेहद कम उम्र में ही अनाथ हो गए थे, जिसकी वजह से बचपन में इन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के होते हुए भी अरशद ने फिल्म इंडस्ट्री में खुद को खड़ा किया और अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुए। तो आइए आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताते हैं उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें….

10वीं क्लास तक की पढ़ाई

बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी आज यानि 19 अप्रैल को अपना 51वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। वह 1968 को मुंबई में जन्मे थे। बचपन में ही अरशद के सिर मां-बाप का साया उठ गया था। अरशद की शुरुआती शिक्षा नासिक, महाराष्ट्र में हुई थी। घर में आर्थिक तंगी के चलते अरशद ने सिर्फ दसवीं क्लास तक ही पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए।

मुंबई की बसों में बेचते थे लिपस्टिक-नेल पॉलिश

यहां तक कि एक समय ऐसा आ गया जब उन्हें मुंबई की बसों, ट्रेनों और घर-घर जाकर लिस्टिक और नेल पॉलिश बेचनी पड़ी थी। अरशद ने एक डांसिंग ग्रुप ज्वॉइन किया और इंडिया डांस कॉम्पिटीशन का खिताब (1991) अपने नाम किया। इसी जगह पर उनकी मुलाकात मारिया गोरेट्टी से हुई जिससे उन्होंने 1993 में शादी भी की। अरशद के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी है।

महेश भट्ट के असिस्टेंट डायरेक्टर रह चुके हैं अरशद

आपको बता दें कि इससे पहले साल 1987 में वह बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने महेश भट्ट के साथ ठिकाना और काश जैसी फिल्मों की बागडोर संभाली थी। अरशद को शुरुआत से ही डांस और कोरियोग्राफी में दिलचस्पी थी। साल 1993 में उनको फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ का टाइटल ट्रैक कोरियोग्राफ करने का मौका मिला था।

पहली बार जया बच्चन ने दिया मौका

वहीं, कोरियोग्राफी में कामयाबी हासिल होने के बाद उन्हें बतौर एक्टर 1996 में फिल्म तेरे-मेरे सपने में काम करने का मौका मिला। अरशद की किस्मत यहां भी रंग लाई और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई। सबसे बड़ी बात यह है कि इस फिल्म में मौका उन्हें जया बच्चन ने दिया था।

2003 में करियर का टर्निंग प्वाइंट

अभी भी अरशद को स्टारडम और दर्शकों की नजरों में पहचान नहीं मिली थी, लेकिन अरशद ने फिल्म इंडस्ट्री का दामन नहीं छोड़ा और मेहनत करते रहे। साल 2003 में उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया। इस साल उन्हें राजकुमार हिरानी निर्देशित फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस में बड़ा ब्रेक मिला। यहां से उन्हें अरशद की जगह सर्किट के नाम से नई पहचान मिली।

सर्किट के नाम से हुए मशहूर

आज भी अरशद अपने फैन्स और बॉलीवुड में सर्किट के नाम से मशूहर हैं। फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस उनके करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्म है। इसके बाद साल 2006 में आई फिल्म ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ ने भी उनके करियर में चार चांद लगा दिए थे। अरशद को इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।

कॉमिक स्टाइल के लिए खास पहचान

अरशद का कॉमिक स्टाइल निर्देशक रोहित शेट्टी को बेहद पसंद आया और उन्होंने सर्किट को अपनी फिल्म गोलमाल के लिए सिलेक्ट कर लिया। गोलमाल की सभी सीरीज में अरशद को देखा गया है। साल 2013 में फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ से भी अभिनेता को नई पहचान मिली। अरशद की बाकी की फिल्मों में ‘इश्किया’, ‘डेढ़ इश्किया’, ‘गुड्डू रंगीला’, ‘फ्रॉड सैय्यां’ और ‘भैयाजी सुपरहिट’ शामिल हैं।

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Sangya Singh

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