होली के आनन्द में अंधविश्वास का रंग नहीं चाहिए अक्षय कुमार को

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होली की पिचकारी जब हमने अक्षय कुमार पर तान दी तो वे हँसते हुए बोले, ‘‘मुझे पता है कि आप होली की बातें करने वाली हैं। हां, यह विषय इस वक्त बड़ा रिफ्रेशिंग है। होली का नाम लेते ही दिल्ली की खूबसूरत गलियों की, चांदनी चौक की, कुतुब मीनार की याद आ जाती है, जहां हम बच्चे टोली बना बना कर होली खेलते, नाचते गाते थे। होली से पहले वाले दिन चंदा इकट्ठा करके होलिका दहन की तैयारी करते थे। बड़ा मजा आता था। अब वो बचपन ना रहा, उन गलियों में अब बहुत कम जाना होता है। मुंबई में अपने परिवार, बच्चों और दोस्तों के साथ होली मना कर दिल बहला लेता हूं। अब मुंबई की खूबसूरत होली मेरे मन को सुकून देने लगी है। जो एक चीज़ मैं आपकी पत्रिका के माध्यम से कहना चाहता हूं, वो यह है कि होली खूब शौक से खेलिये लेकिन त्यौहार और परंपरा में किसी अंधविश्वास को जगह ना दें।


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Mayapuri

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