INTERVIEW: राष्ट्रगान को सिनेमा घरोंं में लागू करवाने के लिए छह साल का समय लगा – हर्ष नागर

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि आगे देश भर के तमाम मल्टीप्लक्स, सिंगल थियेटर्स में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाया जायेगा, उस समय पर्दे पर तिंरगा लहराता दिखाई देना चाहिये । सुप्रिम कोर्ट ने हर्ष के अलावा एक अन्य याचिका कर्ता की याचिका पर ये आदेश पारित किया जबकि इस अभियान के पीछे महज पच्चीस वर्षीय पूर्व र्स्पोटसमैन,मॉडल, एक्टर हर्ष नागर की अथक मेहनतलगी हुई है ।

हर्ष के अनुसार, उस दौरान वे मार्शल आर्ट की एक किस्म त्वाइकांडो के नेेशनल खिलाड़ी हुआ करते थे। इस खेल के लिये वे देश विदेश कई जगह खेलने जाते रहते थे,वहां वे हमेशा देखते थे कि उनकी टीम का अग्रणी खिलाड़ी हाथ में तिरंगा उठाये रहता था और वहां बाकयदा पहले राष्ट्रगान भी होता था। हर्ष के दिल में वहीं से राष्ट्रगान का महत्व था। बाद में जब वो मुबंई आ गया तब भी वो यहां मल्टीप्लक्स में राष्ट्रगान की प्रस्तुति देखता रहता था। एक बार जब उसे दिल्ली में अपने पेरेन्टस के साथ किसी मल्टी प्लक्स में फिल्म देखने जाना पड़ा तो उसे हैरानी हुई कि वहां ऐसी कोई परंपरा नहीं थी यानि वहां फिल्म से पहले  राष्ट्रगान बजाने का चलन नहीं था। इसके बाद उसके अपने कई स्पोर्टमैन दोस्तों से उनके राज्यों में राष्ट्रगान के बारे में पता किया तो उसे पता चला कि वहां भी किसी सिनेमा हाल में राष्ट्रगान नहीं बजाया जाता था । बात दो हजार दस की है जब हर्श ने इस अभियान की पहल करते हुये उस समय दिल्ली की चीफ मिनिस्टर शीला दीक्षित को इस बारे में एक खत लिखा लेकिन उसे उसका कोई जवाब नहीं मिल पाया। फिर भी वो अलग अलग राज्यों में राष्ट्रगान को लेकर वहां के चीफ मिनिस्टर्स को खत लिखता रहा । इस बीच हर्ष न सिर्फ एक लोकप्रिय मॉडल बन चुका था बल्कि उसकी एक दो फिल्में भी रिलीज हो चुकी थी।harsh-nagar-2-1

पिछले दिनों सितबंर में हर्ष ने पक्का इरादा करते हुये दिल्ली के चीफ मिनिस्टर अरविन्द केजरीवाल को इस बारे में ज्ञापन देते हुये राष्ट्रगान को जरूरी घोषित करने की गुजारिश की । इसके अलावा उसने बाकायदा चंडीगढ, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान समेत करीब अटठारह राज्यों का दौरा किया और वहां के मुख्य मंत्रियां को इस बारे में ज्ञापन दिये। यहां सभी राज्यों में उसे मीडिया को भरपूर सपोर्ट हासिल हुआ। इसके अलावा कुछ मुख्य मंत्रियों ने उसका उत्साह बढ़ाया। उन दिनों जब अमिताभ बच्चन दिल्ली में गये वहां उन्हें हर्ष के अभियान का पता लगा तो उन्होंने बाकायदा हर्श के अभियान का समर्थन किया । इसके अलावा बॉलीवुड के कुछ अन्य लोग भी उसके साथ आ गये थे। जैसे डायरेक्टर सुजॉय घोश, राज कुमार संतोशी, अनुपम खेर आदि इसके अलावा बाबा रामदेव ने हर्श को हरद्वार पंतजली में बुलाकर उसके आभियान की तारीफ करते हुये एक वीडियो बनाया। इसी तरह पहलवान सुषील कुमार ने हर्ष को अपना समर्थन दिया ।harsh-nagar_interview

इतना सब कुछ होने के बाद भी जब हर्श को कुछ होता नहीं दिखाई दिया तो उसने बाकायदा दिल्ली हाई कोर्ट में इसे लेकर एक याचिका दाखिल कर दी। याद रहे कि हर्ष के पिता भरत कुमार नागर एक प्रसिद्ध एडवोकेट हैं तथा हर्ष ने भी लॉ की पढ़ाई की है। इस बीच हर्ष के अलावा कुछ अन्य ने भी राष्ट्रगान के प्रति और खिलाफ याचिकायें दायर की। आखिर तीस नवबंर को वो दिन आ ही गया,जब सुप्रिम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राय की बेंच ने हर्ष और एक अन्य याचिकाकर्ता की याचिका पर फैसला लेते हुये देश भर में हर सिनेमा घर को फिल्म स्टार्ट होने से पहले राष्ट्रगान का बजाना अनिवार्य कर दिया। इस प्रकार अपनी छोटी सी उम्र के इस पड़ाव पर आकर हर्श ने एक जटिल अभियान पर सफलता पाई ।

 


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Mayapuri

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