‘‘मैं फिल्मी हीरो का किरदार निभाना चाहता हूं.’’ – नवाजुद्दीन सिद्दिकी

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‘‘गैंग आफ वासेपुर,‘कहानी’, ‘किक’, ‘तलाश‘,‘पतंग’,‘आत्मा’, ‘किस्सा’ सहित कई बेहतरीन फिल्मों मेें अभिनय करते हुए बालीवुड के साथ साथ हॉलीवुड की फिल्मों में भी काम कर रहे नवाजुद्दीन सिद्दिकी अब सिकी परिचय के मोहताज नहीं है। उनका 18 वर्ष का संघर्ष खत्म हो चुका है। उनके अभिनय से सजी कई फिल्में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में धूम मचा चुकी हैं.हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हे ‘यश भारती’ अवार्ड से नवाजत तो वहीं अभी प्रदर्शित हुई फिल्म‘‘बदलापुर’’में भी उनके अभिनय को सराहा जा रहा है.

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फिल्म‘‘बदलापुर’’के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

इसमें मेरा बड़ा ह्यूमरस और पाॅजीटिव किरदार है.मेरे किरदार का नाम लायक है, इससे अधिक जानकारी देना मुश्किल है.यह किरदार लोगों को हंसाएगा। ‘‘बदलापुर’’ मैं मैने एक कैदी का किरदार निभाया है. इसके लिए मैं नासिक की सेंट्रल जेल गया और वहां जाकर कैदियों के रहन सहन आदि पर गौर किया.

‘‘बदलापुर’’ के निर्देशक श्रीराम राधवन की दूसरे निर्देशकों से तुलना कैसे करेंगे?

हर निर्देशक की अपनी एक खासियत और कार्यशैली होती है.श्रीराम राघवन को थ्रिलर बनाने में महारत हासिल है.यदि ऐसा निर्देशक एक रोमांटिक या प्रेम कहानी वाली फिल्म बनाएगा,तो फिर एक अलग मुकाम होगा.दूसरे निर्देशकों के काम करने की अलग स्टाइल ही कलाकार को उनके साथ काम करने के लिए आकर्षित करता है।

वरूण धवन के साथ काम करने के अनुभव?

बहुत अच्छे अनुभव रहे.वरूण धवन बेतहरीन कलाकार हैं.इतनी कम उम्र में उसने एक संजीदा किरदार निभाकर सब को चकित किया है.

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जब आप मुंबई आए स्ट्रगल कर रहे थे काम नहीं मिल रहा था,तो आपको फ्रस्ट्रेशन नहीं हुआ. यह नहीं हुआ कि मैं वापस अपने गांव चला जाउं?

मैं वापस गांव नहीं जा सकता था. क्योंकि यदि मैं गांव वापस जाता,तो वहां मैं लोगों के बीच मजाक का केंद्र बन जाता.फिर मुझे अपनी माॅं की कही हुई बात याद आती थी। मेरी मां कहती थी कि ‘बारह साल में कचड़े की जगह बदल जाती हंै.’तो मुझे यह उम्मीद थी कि कभी न कभी मेरा भाग्य भी बदलेगा.अब देखिए, 12 साल पूरे होते होते हर तरफ मेरी ही चर्चा हो रही है.सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी मुझे सराहा जा रहा हैं. बार बार असफलता मिलते तथा रिजेक्शन पर रिजेक्शन झेलते हुए मुझे भी फ्रस्ट्रेशन होने लगा था.लेकिन धीरे धीरे मुझे आदत सी पड़ गयी.यदि यह आदत नहीं पड़ती,तो आज मैं जहां पहुंच पाया हूं वहां पहुंच भी नहीं पाता.

किस तरह के किरदार निभाना चाहते हैं?

फिल्म ‘मुगल ए आजम’ जो किरदार दिलीप कुमार ने निभाया था, उस तरह का किरदार निभाने की मेरी तमन्ना है मैं फिल्मी हीरो का किरदार निभाना चाहता हूं। हीरोईन के साथ पेड़ के इर्द गिर्द डांस करने वाला किरदार निभाना चाहता हूं।

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आपकी आने वाली फिल्में कौन सी हैं?

जी हाॅ!2015 में मेरी कई बेहतरीन फिल्में रिलीज होंगी.मैंने केतन मेहता के निर्देशन में फिल्म ‘‘माउंटेन मैन’’में रीयल लाइफ के पात्र दशरथ मांझी का किरदार निभाया है. दशरथ मांझी ने अकेले अपने दम पर बिहार में पहाड़ी को खोदकर तीस फीट चैड़ा और 360 फीट लंबा रास्ता बनाया था। इसके अलावा मैंने एक फिल्म ‘‘मानसून शूट आउट’’ की है,जो कि एक गैंगस्टर और पुलिस की कहानी है.इसके अलावा मैंने अनुराग कश्यप और विशाखा सिंह निर्मित फिल्म ‘‘हरामखोर’’ में शीर्षक भूमिका निभायी है. गीतू मोहन दास की फिल्म ‘‘लायर डाइस’’ में मैं एक ऐसे सैनिक का किरदार निभा रहा हॅूं, जिसे आर्मी से निकाल दिया जाता हैं. काॅमेडी फिल्म ‘‘घूमकेतु में काॅमेडी की है . ‘‘बजरंगी भाईजान’’ में सलमान खान के साथ काम किया है.इसके अलावा ‘अनवर का अजब किस्सा’, ‘घूमकेतु’,‘मियां कल आना’,‘हराम खोर’,‘बजरंगी भाईजान’,‘रईस’और ‘फर्जी कर रहा हॅूं.

आप कोई इंटनेशनल फिल्म भी कर रहे थे?

मैंने एक इंटरनेशनल फिल्म ‘‘लायन’’ में हालीवुड स्टार निकोल किडमैन के साथ फिल्म की है.

किस फिल्म को कमर्शियल सफलता मिलने की उम्मीदें हैं?

यह तो दावा कोई नहीं कर सकता. इसका निर्णय तो दर्शक ही करेगा. मुझे तो अपनी सभी फिल्में प्यारी हैं और मुझे हर फिल्म से उम्मीदें हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘‘यश भारती’’ अवार्ड से नवाजा जाना कैसा लगा?

मुझे गर्व हुआ.यह अवार्ड मेरे लिए बहुत अहमियत रखता है.क्योंकि मैं खुद उत्तर प्रदेश से हूं.जब आपका अपना राज्य आपको सम्मानित करता है,तो गौरव बढ़ जाने का अहसास होता है और उसकी खुशी कुछ और होती है।

एक कलाकार के तौर पर आपकी इमेजिनेशन क्या है?

एक कलाकार के तौर पर निर्देशक की इमेजिनशन को समझकर उसे अपनी परफार्मेंस से पर्दे पर साकार करना मेरी इमेजिनेशन है.

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Mayapuri