आइए जानते है, शकुंतला देवी के जीवन से जुडी कुछ रोचक बाते (A Vidya Balan show)

1 min


जब शकुंतला देवी का ट्रेलर लांच हुआ , तो यह मुझे प्रभावित कर गया कि हमारे भारतीय अभिनेताओं में से, कोई भी ऐसा नहीं था जिसको मैं इस भूमिका में रख सकता था, लेकिन विद्या बालन । अगर विद्या का जादू है या भूमिका जो उसके लिए दर्जी की थी, तो कुछ ऐसा है जिसे हम अमेज़न प्राइम वीडियो पर शुक्रवार को फिल्म का प्रीमियर देखा तो हम जान पाए के विद्या बालन फिट है इस भूमिका के लिए हालाँकि, हमने अब तक जो भी देखा है, उसमें विद्या शकुंतला देवी के व्यक्तित्व को अच्छी तरह से समझती है।

विद्या भी शकुंतला को एक गणितज्ञ के रूप में जानती थीं, लेकिन जब उन्होंने निर्देशक अनु मेनन के साथ अपने जीवन में गहराई से जान डाली, तो उन्हें पता चला कि शिक्षा “हर एक धारणा को परिभाषित करते हैं जो आपके पास एक गणितीय ज्ञान है।” “वह जीवन से बहुत भरी थी, उसमें दुष्ट भावनाएँ थीं। वह एक जटिल समीकरण की तरह थीं, “अभिनेता ने साझा किया।

जैसा की आप सब लोग जानते है के यह फिल्म एक बायोपिक है, विद्या ने स्वीकार किया कि यह “एक कश नहीं है।” इस किरदार को लेते समय उनका उत्साह कितना बढ़ गया था “शकुंतला देवी की कहानी को संभव रूप से बताने की गुजारिश थी।” अभिनेता ने इस बारे में क्या कहा कि यह “पफ पीस” नहीं है, मुझे हिंदी सिनेमा में कई बार देखा गया है, विद्या ने फिल्म के कहानी को अपने दिल के करीब रखा लेकिन यह प्रकट किया कि हम उस कहानी के लिए हैं जो उस समय के लिंग की गतिशीलता की जांच करती है

 

फिल्म की शुरुआत में ही कह दिया गया है कि यह किसी की बायोग्राफी या डॉक्यूमेंट्री नहीं है, बल्कि कुछ सत्य घटनाओं से प्रेरित है, इसलिए शंकुतला देवी को बायोपिक मानना गलत होगा।

इससे मन में एक संदेह भी पैदा हो जाता है कि स्क्रीन पर जो दिखाया जा रहा है, उस पर कितना विश्वास किया जाए, हालांकि फिल्म बनाते समय गणित की जीनियस शकुंतला देवी की बेटी अनुपमा बैनर्जी की मदद ली गई है।

बहरहाल, इस बात को छोड़ दिया जाए तो शकुंतला देवी फिल्म का आनंद लिया जा सकता है। फिल्म में शकुंतला देवी का महिमामंडन नहीं किया गया है बल्कि इंसान के रूप में उनकी कमजोरियों को भी दर्शाया गया है।

फिल्म देखते समय कई जगह शकुंतला देवी सेल्फिश और मेनिपुलेटिव भी नजर आती हैं। उनकी निजी जिंदगी में भी यह फिल्म झांकती है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है।

शकुंतला देवी के बचपन की बात अगर शुरू करे तो शकुंतला के नंबर को लेकर लोगो में अलग ही किस्म का जुनून था। बड़े से बड़े नंबर का वे क्यूब रूट चुटकियों में हल कर दती थी।

अपनी बहन से वो बेहद प्यार करती थीं जिसको उन्होंने अपने लालची पिता के कारण खो दिया था । मां ने इस बात पर आवाज नहीं उठाई इसलिए शकुंतला देवी अपने माँ बाप को पसंद नहीं करती थी, लेकिन उनके लिए पैसे पहुंचाती रहीं।

जिंदगी जीने का उनका अपना अलग अंदाज था। मस्त, बेफिक्र और किसी की परवाह किए बिना वे अपने में मस्त रहती थीं। पैसे कमाने का शौक था। दुनिया भर में उन्होंने मैथ्स के शो किए।

शकुंतला और उनके बेटी को फिल्म में काफी अहमियत दी गई है। बेटी से उनकी अनबन रही। इस रिश्ते में प्यार भी है तो तकरार भी, और इस वजह से कई सीन बेहद रोमांचक भी बने हैं।

शकुंतला देवी की जिंदगी के बारे में ईमानदारी के साथ यह फिल्म कई खुलासे करती हैं, जैसे वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी, होमोसेक्सुअलिटी पर उन्होंने किताब लिखी थी, जो भारत में शायद किसी ने पहली बार किया होगा।

दूसरी ओर कुछ बातों को फिल्म में ज्यादा इम्पोर्टेंस नहीं दी गयी । जैसे, शंकुतला देवी के गणित वाले पक्ष पर थोड़ा और फोकस करना जरूरी था क्योंकि ज्यादातर लोग उनके बारे में यही जानते हैं कि वे ‘ह्यूमन कम्प्यूटर’ थीं और बड़ी-बड़ी गणनाएं का तुरंत हल कर लेती थी।

कोरोनोवायरस महामारी के बीच शकुंतला देवी को छोड़ा जा रहा है। देश भर के थिएटर अभी भी बंद हैं, लेकिन अमेजन प्राइम वीडियो के साथ कदमताल करने से फिल्म को डिजिटल रिलीज मिल रही है। थिएटर बनाम ओटीटी बहस ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह एक या दूसरा होगा, लेकिन विद्या बालन का मानना ​​है कि इन चंगेस के साथ, “क्षितिज अभी चौड़ा हुआ है।” उनकी राय में, ऐसी सामग्री होगी जो “विशुद्ध रूप से ओटीटी के लिए” होगी क्योंकि यह निर्माताओं को प्रयोग करने की आज़ादी देती है।

इसकी मिसाल शकुंतला देवी फिल्म में देखने को मिलती हैं। विद्या बालन ने कमाल की भूमिका निभाई है। वे पहली फ्रेम से ही शकुंतला देवी के जैसे नजर आती हैं और यही से दर्शक फिल्म से जुड़ जाते हैं। ऐसा लगता है कि यह रोल केवल विद्या के लिए ही बना था ।
जीशु सेनगुप्ता, सान्या मल्होत्रा, अमित सध सहित तमाम कलाकारों ने भी विद्या का अच्छा साथ निभाया है। कीको नाकाहारा की सिनेमाटोग्राफी और करण कुलकर्णी का बैकग्राउंड म्यूजिक उल्लेखनीय है। सचिन जिगर का संगीत फिल्म के मूड के अनुरूप है,विद्या की एक्टिंग और ह्यूमन कंम्प्यूटर शकुंतला देवी के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये