फिल्मी सितारों की अशोका होटल मे एक रंगीन रात

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मायापुरी अंक 14.1974

28 नवम्वर शाम को अशोका होटल के कन्वैंशन हाल में इंडियन फैडरेशन ऑफ यू.एन. एसोसियेशन की ओर से एकक सौन्दर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अन्य रंगारंग प्रोग्रामों के साथ एक संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें कई फिल्म अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आंखों देखा हाल यहां प्रस्तुत किया जा रहा है।

समारोह में हम जान बूझकर जरा देर से पहुंचे। कारण यही था कि ‘जरा देर से आने वाले का महत्व बढ़ जाता है। हमने किसी से समारोह में सम्मिलित फिल्मी कलाकारों के नाम पूछे तो सबसे पहले शत्रुघ्न सिन्हा का नाम सुनाई दिया और ऐसा लगा जैसे किसी ने हमारे सर पर हथोड़ा मार दिया है। पहला ख्याल तो दिमाग में यही आया कि शत्रुघ्न सिन्हा को अगर ‘ब्यूटी कम्पटीशन’ का जज बनाया गया है तो क्या खूबसूरती की परख करने के लिए इन लोगों को शत्रुघ्न सिन्हा से अधिक बदसूरत आदमी और कोई नही मिला। एक बार तो हमें इस बात पर खेद हुआ कि इस प्रतियोगिता के संयोजकों को हमने अपना चेहरा क्यों न दिखा दिया। इसके साथ ही हमें ‘जॉर्ज अनार्ड शाह की शकल याद आई और यह भी याद आया कि उनकी अपनी शकल-सूरत चाहें कैसी भी रही हो। सौंदर्य की पहचान में उनका जवाब नही था। मन में यह विचार आते ही हमने मन ही मन में अपने शब्द वापस ले लिए और चांद’ से चेहरे वाले शत्रुघ्न सिन्हा को सौन्दर्य का पारखी मान लिया। (चांद पर कितने दाग धब्बे और गढ़े है। इनका हिसाब आप स्वयं कीजिए)। हमने पास बैठी अंजू महेन्द्र से इसमें पहले के कार्यक्रम के विषय में पूछा तो उसने बताया कि वह स्वयं देर से आई है। उसकी प्यारी सी आवाज सुनकर हमने सोचा राजेश खन्ना का दिमाग जरूर खराब है। आज इस सौंदर्य प्रतियोगिता में डिम्पल कपाड़िया और अंजू महेन्द्र भाग लेती और हमें जज बना दिया जाता तो हम अभी अंजू को ‘ब्यूटी क्वीन’ का ताज पहना देते।

तभी हमारा ध्यान मंच की ओर गया। अमीन सियानी मंच पर खड़े सिम्पल कपाड़िया का परिचय दे रहे थे और स्क्रीन की यह चंचल तारिका सहमी सिकुड़ी सी अमीन सियानी के पास खड़ी थी। उन्होनें सिम्पल से माइक पर कुछ बोलने का अनुरोध किया तो वह बेचारी और नर्वस हो गई। उसने अपने रेशमी बालों को झटक कर नजरें झुकाई तो उसके गालों पर फैली लाली से हमने अनुमान लगा लिया कि बेचारी सिम्पल बहुत शरमा रही है।

हमसे अगली सीट पर बैठी सोनिया साहनी खुश्बू से लदी हुई थी। हमें इस बात पर आश्यर्च हो रहा था कि सोनिया इतनी सुन्दर है पर कैमरे की आंख इसकी 25 पर्सेंट सुन्दरता भी सिनेमा के परदे पर पेश नही करती।

सोनिया से दृष्टी हटा कर हमने मंच की ओर देखा तो अब सिम्पल के साथ जरीना वहाब भी अमीन सियानी के पास खड़ी थी और ऐसा लग रहा था जैसे संगेमरमर से तराशी हुई कोई सफेद परी स्टेज पर उतर आई है। जरीना की हालत भी करीब करीब सिम्पल जैसी ही थी। अमीन सियानी उस से माइक पर कुछ बोलने की फरमाईश कर रहे थे और वह लाजवंती सी शर्मा रही थी। हम ने अपने दाहिनी ओर असरानी के पास बैठे शत्रुघ्न सिन्हा की ओर देखा और एक बात समझ में नही आई कि जरीना वहाब और शत्रुघ्न सिन्हा के बारे में फैली हुई अफवाह कहां तक ठीक है। कहने वाले तो यहां तक कहते है कि शत्रुघ्न सिन्हा जरीना वहाब का पी.आर.ओ बन कर प्रोड्यूसरों के पास उसकी सिफारिश करते फिरते है। यहां तक कि अपने लिए भी कॉट्रैक्ट करते समय जरीना को फिल्म में लेने की शर्त रखते है। कहने वाले तो यहां तक कहते है शत्रुघ्न सिन्हा जरीना वहाब का ड्राईवर बन कर उसे घर से लाता है घर छोड़ कर आता है और दोनों के बीच कोई ऐसी वैसी बात है। पर मंच पर हमारे सामने खड़ी जरीना तो हमें इस से बिल्कुल विपरीत सीधी सादी और एक भोली भाली लड़की लग रही थी। और शत्रुघ्न सिन्हा भी ठीक ठाक आदमी से ही लग रहे थे।

विचारधारा में बहकर हम जाने कहां से कहां पहुंच गए थे। हम से मंच की ओर देखा तो अब वहां राधा सलूजा और अंजु महेन्द्र खड़ी थी दर्शकों का अभिनन्दन उन्होंने किस प्रकार किया यह तो हमें मालूम नही अब वे कुछ मौन सी खड़ी मुस्कुरा रही थी। शायद दोनों सहेलियां यह हिसाब लगा रही थी कि बम्बई में क्या छोड़ आई है और दिल्ली से अपने साथ क्या ले जाएंगी। इसके बाद सोनिया साहनी मंच पर आई और जब उसे फूलों का गुलदस्ता पेश किया गया तो उनके होठों पर फैली मुस्कुराहट और फिर खनकती हंसी से हमें यूं लगा जैसे कोई गीत गूंज उठा है, जैसे “फूल” के हाथों में किसी ने फूल थमा दिए है।

इसके बाद अमीन सियानी ने असरानी और शत्रुघ्न सिन्हा को आवाज लगाई तो वे ऐसे गिरते पड़ते अपनी सीटों से उठे कि देखने वाले हंसते हंसते लोट पोट हो गए। इन दोनों के स्टेज पर आते ही महफिल का रंग जम गया। शत्रुघ्न सिन्हा से कुछ प्रश्न पूछते समय असरानी ने पूछा

“आप पटना के रहने वाले है, मतलब है आप पटना से है ना”

“मैं पटना से हूं” पर यह जान लीजिए कि पटने वाला नही हूं।

शत्रुघ्न सिन्हा की इस हाजिर जवाबी पर हंसते हंसते लोग दोहरे हो गए। हंसी के इस तूफान में भी हम से दूर बैठी राधा सलूजा कुछ उदास थी। उसके पास से उठ कर आती हुई जाहिदा से हमने राधा की उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि बेचारी राधा सलूजा की मंगनी टूट गई है।

इस उदासी से परे शत्रुघ्न सिन्हा और असरानी अब भी मंच पर खड़े हंसी के फुव्वारे छोड़ रहे थे।

“एक बात बताइए माई डियर शत्रु” असरानी पूछ रहा था, “कोई आदमी पढ़ा लिखा न हो, कोई काम न जानता हो, जीवन मे बिल्कुल बेकार हो, तो क्या वह अभिनेता बन सकता है ?

“जिस में इतनी क्वालिटीज हों और इतनी क्वालिफिकेशंज हों वह अभिनेता नही बल्कि बल्ति “नेता बन सकता है। शत्रुघ्न सिन्हा की इस बात पर अब फिर लोग हंसते हंसते पागल हुए जा रहे थे। और हमारे दिल में उसका इमेज अच्छा बनता जा रहा था।

“कितने ही बड़े-बड़े फिल्म कलाकारों को पद्म श्री की उपाधी मिल गई। आप को क्यों नही मिली असरानी ने प्रश्न किया। “साहब मैं तो सीधा साधा शरीफ आदमी हूं शत्रुघ्न सिन्हा ने उत्तर दिया। मुझे पद्मश्री नही चाहिए। आप को मुझ से बहुत सहानुभूति है तो जयश्री दिलवा दीजिए।

“शत्रु जी, आगरे की एक पत्रिका आप से यह जानना चाहती है कि आप फिल्मों में काम करते समय किन बातों का ख्याल रखते है मतलब है स्टोरी का डायरेक्टर का या अपने रोल का ख्याल रखते है। असरानी ने प्रश्न किया।

“मैं तो सब से अधिक हीरोइन की मां का ख्याल रखता हूं” शत्रुघ्न सिन्हा ने जवाब दिया। अब हमें शत्रुघ्न सिन्हा बहुत अच्छा लग रहा था। इसी प्रकार वह देर तक असरानी के साथ दर्शकों का मनोरंजन करता रहा। अंत में सोनिया साहनी और जाहिदा ने लक्की नम्बर निकाले “मिस यू.एन. और मिस्टर यू.एन. को ताज पहनाए गए, और तालियों की गूंज में समारोह समाप्त हो गया।

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Mayapuri