‘‘25 साल की उम्र में मैंने निर्माता बनने का निर्णय लिया.’’ – अनुष्का शर्मा

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‘‘यशराज फिल्मस’ की फिल्म  ‘‘रब ने बना दी जोड़ी’’ से शाहरूख खान के साथ अभिनय करियर की शुरूआत करने वाली अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने काफी कम समय में काफी लंबी यात्रा तय कर ली है। बतौर अभिनेत्री उन्होने कई रिकार्ड बनाए हैं। तो दूसरी तरफ अब वह बतौर निर्माता पहली फिल्म‘‘एन एच 10’’लेकर आ रही हैं। नवदीप सिंह निर्देशित फिल्म ‘6 एन एच 10’’ में स्वयं अनुष्का शर्मा ने अभिनय किया है.फिल्म‘‘एन एच 10’का निर्माण कर अनुष्का शर्मा ने बहुत बड़े साहस का परिचय दिया है। वह पहली ऐसी अभिनेत्री हैं, जो कि गैर फिल्मी माहौल से बालीवुड में आकर अपनी पहचान बनाने के साथ साथ सबसे कम उम्र में फिल्म निर्माता बनी हैं।

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इन दिनों आप कुछ खास तरह की फिल्मे कर रही हैं। इनमें से किस फिल्म के किरदार के लिए ज्यादा मेहनत की?

मैंने आने वाली फिल्मों में बहुत ही अलग अलग तरह के निर्देशकों के साथ काम किया है. यह चारों फिल्में बहुत अलग अलग तरह की बनी हैं। इन चारों फिल्मों में मैंने बहुत अलग तरह के किरदार निभाए हैं। इनमें से फिल्म‘एन एच 10’का मैने निर्माण भी किया है। मैंने ‘एन एच 10’ और ‘बाॅंम्बे वेलवेट’ के लिए ज्यादा मेहनत की. वैसे ‘दिल धड़कने दो’ में भी अलग तरह का ही किरदार है.‘एन एच 10’ एक रोडट्रिप के साथ रोामांचक फिल्म होने की वजह से मेरे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण फिल्म रही. कुछ सीन करने के बाद मैं कुछ समय के लिए डिस्टर्व भी हो गयी थी.फिल्म का नाम ‘नेशनल हाइवे 10’ से प्रेरित है, जो कि दिल्ली से हरियाणा में बहादुरगढ़, रोहतक, हिसार, फतेहाबाद व सिरसा से होते हुए पंजाब में पाकिस्तान की सीमा के नजदीक खत्म होता है.यह आम फिल्म नही है.बल्कि कंटेंट प्रधान फिल्म है।
‘‘बाॅम्बे वेलवेट’’एक पीरियड फिल्म है.मैंने इसमें अलग तरह का किरदार निभाया है.इस फिल्म में तमाम ऐसे सीन थे,जिनके लिए मुझे अनुराग कश्यप से कहना पड़ा था कि मैं इस तरह के सीन नहीं निभा पाउंगी. क्योंकि इस तरह के सीन मैंने कभी निभाए नहीं थे। अनुराग हमेशा मुझसे कहते थे कि चिंता मत करो.सब हो जाएगा.तो उन्हें मुझ पर विश्वास था. अनुराग कश्यप की खूबी है कि वह कलाकार से जैसा काम चाहते हैं, करवा लेते हैं।

आपने एक नया रिकाॅर्ड बनाया है.यह पहली बार है,जब गैर फिल्मी माहौल से आने वाली किसी अभिनेत्री ने इतनी कम उम्र में निर्माता बनने का कदम उठाया हो?

मैने कोई काम रिकाॅर्ड बनाने के लिए नहीं किया.मुझे यह भी नहीं पता कि मैं सबसे कम उम्र की निर्माता हूं। मेरा मानना है कि हर इंसान की जिंदगी में जो कुछ होता है, उसकी कोई न कोई वजह होती है. मेरी जिंदगी में हर काम बिना किसी वजह से भी होता रहा.पर इस फिल्म का निर्माण करने के पीछे वजह यह रही कि मुझे लगा कि यह एक ऐसा सब्जेक्ट है,जिस पर कोई कमर्शियल फिल्म बन नहीं सकती.पर मुझे इस तरह की फिल्म में काम करना चाहिए,तो मैंने खुद इसका निर्माण करने की बात सोची.यह फिल्म पूरी तरह से कंटेंट पर आधारित है.सच कहूं तो नवदीप ने मुझे स्क्रिप्ट सुनायी.तब मेरे दिल ने सबसे पहले कहा कि यह फिल्म बननी चाहिए.लोग भी इस फिल्म को पसंद करेंगे. उसके बाद मेरा इंटेंशन यह था कि फिल्म जितनी बेहतरीन बन सके, उतनी बनायी जाए. तो एक बेहतरीन कंटेंट वाली फिल्म को बनाने के लिए मैंने खुद निर्माता बनने का निर्णय लिया. मैंने सोचा कि मैं अपनी तरफ से इस फिल्म को अच्छा बनाने के लिए जितना कुछ डाल सकती हूं.जिससे की अंतत अच्छा रिजल्ट आएगा.उसे सब कोई देख सके व पसंद कर सके।

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पर नवदीप सिंह की गिनती सफल निर्देशकों में नहीं होती है?

ऐसा ना कहें. उनकी पिछली फिल्म ‘‘मनोरमा अंडर सिक्स फीट’’ की गिनती तो बेहतरीन फिल्मों में होती है.

फिल्म के कंटेंट की चर्चा हुई थी.पर बॉक्स आफिस पर इस फिल्म को सफलता नहीं मिली थी?

जब उन्होंने मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट सुनायी, तो उसे सुनकर मुझे यह समझ में आया कि वह किस तरह की फिल्म बनाना चाहते हैं.मुझे यह विश्वास भी हुआ कि वह एक बेहतरीन फिल्म बना सकते हैं. मैंने बॉक्स आफिस के आंकड़ों पर कोई ध्यान नहीं दिया। क्योंकि किसी भी फिल्म की सफलता असफलता का दावा पहले से किया जाना मुश्किल है. जब मेरेे हाथ में स्क्रिप्ट आयी, तो मुझे पढ़कर लगा कि यह एक ऐसी स्क्रिप्ट है,जो इसी तरह से बननी चाहिए और निर्देशक में वह क्षमता नजर आ रही है. मैंने अपना कैल्कुलेशन लगाया कि वन प्लस वन इतना होना चाहिए। बस एक शब्द में कहूं तो मैंने अपनी सोच व समझ के आधार पर कैल्कुलेशन के अनुसार इस फिल्म को बनाने का निर्णय लिया. देखिए, किसी भी इंसान के पिछले रिकाॅर्ड को देखकर उसके साथ काम करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता.यदि मैं खुद इस ढंग से बात सोचती,तो मुझे जिंदगी में जो कुछ मिला है,वह ना मिल पाता.आदित्य चोपड़ा अपनी पहली फिल्म ‘‘रब ने बना दी जोड़ी’’ में किसी भी कलाकार को ले सकते थे.मैं तो एकदम नयी थी.पर उन्हें लगा कि मैं उनकी फिल्म में अच्छा काम कर सकती हूं.किरदार के साथ न्याय कर पाउंगी। इसलिए उन्होंने मुझे चुना था.तो मेरे दिमाग ने कहा कि नवदीप में इतनी काबिलियत है कि वह अच्छी फिल्म बना सकते हैं.मैं स्पष्ट करना चाहूंगी कि यह बहुत ही अच्छी फिल्म बनी है.

फिल्म‘‘एन एच 10’’है क्या?

यह एक रोमांचक प्रेम कहानी के साथ रोड फिल्म है.फिल्म में दो इंसान हैं,जो कि एक काॅरपोरेट कंपनी में काम करते हैं.एक दिन दोनों रोड ट्पि पर निकलते हैं.रास्ते में एक घटना घटती है.अनचाहे ही इस घटनाक्रम से यह दोनों जुड़ जाते हैं.फिर उनका पूरा व्यक्तित्व बदल जाता है.इस घटनाक्रम से यह दोनों कैसे जुड़ते हैं? घटनाक्रम के साथ उनका क्या जुड़ाव होता है?उन्हें क्या क्या झेलना पड़ता है.फिर वह कैसे उससे बाहर निकलते है?उसकी यह एक यात्रा है.

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कुछ लोग ‘‘एन एच 10’’ की तुलना भी कुछ समय पहले प्रदर्शित फिल्म ‘‘हाईवे’’ से कर रहे हैं?

यही तो गलत है.लोग हर फिल्म को उपरी सतह पर देखते हुए काम करते हैं.‘हाईवे’पूरी तरह से एक रोड ट्पि फिल्म थी.जबकि फिल्म‘एन एच 10’एक प्रेम कहानी है.यह एक थ्रिलर है.रोड ट्पि की वजह एक नयी यात्रा शुरू होती है। हमारी फिल्म ‘‘एन एच 10’’का हाईवे से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है। हमारे यहां लोगों की आदत है कि यदि दो फिल्मों के नाम में भी कोई समानता नजर आती है,तो समझ लेते हैं कि एक जैसी सी हैं.हम सब को हर चीज को एक खास कैटेगरी में डालने की आदत बन गयी हैं।

इन दिनों तमाम कलाकार निर्माता बन रहे हैं.इसी के चलते आपने भी निर्माता बनने का निर्णय लिया?

माफ करना! मैं किसी की नकल नहीं करती.इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय तो मूर्खतापूर्ण तरीके से लिए भी नहीं जाते.यदि आप मेरे कैरियर पर नजर डालें,तो आपको अहसास होगा कि मैंने हमेशा अलग अलग तरह का काम किया है.मैंने बहुत छोटी उम्र में अभिनय करना शुरू किया था। 25 साल की उम्र में मैंने निर्माता बनने का निर्णय लिया. जब मैं फिल्में देखती थी,तो कुछ फिल्मों को देखकर मुझे भी लगता था कि मुझे ऐसी फिल्में बनानी हैं। मैं सिनेमा को लेकर पैशिनेट हूं.मेरे दिमाग में था कि मुझे इस तरह की फिल्म बनानी है। जब मैंने ‘एन एच 10’की स्क्रिप्ट सुनी, तो मेरे अंदर से आवाज आयी कि मुझे इसी फिल्म के साथ अपनी प्रोडक्शन कंपनी की शुरूआत करनी चाहिए.निर्माता की हैसियत से फिल्म में हमारा योगदान ज्यादा होता है.फिल्म के साथ हमारा जुड़ाव भी ज्यादा होता है.

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

इस फिल्म में मैंने मीरा का किरदार निभाया है,जो कि एक काॅरपोरेट कंपनी के माॅर्केटिंग विभाग में नौकरी करती है.वह एक आम लड़की है.ठीक वैसी ही,जैसी हर आम लड़की होती है। मीरा अपने मित्र अर्जुन के साथ रोड ट्रिप पर निकलती है.रास्ते में अचानक एक घटना घटती है और अनजाने ही वह उस घटनाक्रम से जुड़ जाते हैं और फिर उससे बाहर निकलते हुए उनके व्यक्तित्व में जो नयी चीज उभरती है, जो बदलाव आता है,चरित्र की इस खासियत ने मुझे इंस्पायर किया।

निर्माता के तौर पर सौ करोड़ या दो सौ करोड़ क्लब का तनाव?

यह आॅंकड़े मेरी समझ से परे हैं. लोग ग्राॅस कलेक्शन की बात करते हैं,अब उसमें से कितनी कमायी है,पता नहीं चलता.यदि किसी फिल्म का बजट सौ करोड़ है और वह फिल्म बाक्स आफिस पर ग्राॅस दो सौ करोड़ कमाती है,तो इसका अर्थ यह है कि फिल्म में निर्माता को ना तो नुकसान हुआ ना फायदा हुआ।


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Mayapuri

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