मुमताज जी की फिल्मों में वापसी

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Actress-Mumtaz

 

मायापुरी अंक 12.1974

मयूर से विवाह करके लन्दन में बस जाने के बाद भी अब मुमताज जूहू, बान्द्रा और दादर में अठलेखियां करती नजर आती है। उतनी ही उत्तेजना, और वैसा ही आकर्षण लिये हुए जो पिछले दिनों उन्हें सफलता की चरम सीमा पर उड़ाये फिरता था और “हरे, रामा, हरे कृष्णा” की नटखट पहाड़ी युवति में दिखाई देता था।

वह बम्बई क्यों आई है ? क्या मयूर से उनका कोई मतभेद है ? क्या वह बम्बई में पुरानी यादें ताजा करने आई है ? क्या वह फिर से फिल्मों में काम करना शुरू कर देगी ? यह प्रश्न और ऐसी कितनी ही आशंकायें आज मुमताज के नाम पर उनके प्रशंसकों के मन में आती है।

इन सभी प्रश्नों पर विभिन्न मत हो सकते है पर यह सत्य है कि वह अपनी एक अधूरी फिल्म की शूटिंग के लिये बम्बई आई थी जिसके लिये उन्होनें प्रोड्यूसर से वादा किया था कि वह लंदन से आकर पूरी करा देगी।

वह दोबारा फिल्मों में काम करेगीं इस प्रश्न का उत्तर न मुमताज के पास है न हमारे पास और न ही फिल्म प्रोड्यूसरों के पास और न ही फिल्म प्रोड्यूसरों के पास आज रेहाना सुल्तान का जमाना है। जीनत अमान, जाहिरा और प्रवीण बॉबी का जमाना है इन अभिनेत्रियों ने भी खुली टांगे और अर्द्ध नग्न शरीर के प्रदर्शन का सहारा लिया है और शर्मिला, वहीदा और नन्दा जैसी अभिनेत्रियो की भीड़ को चीर कर सामने आई है। ऐसी हालत में मुमताज के पास क्या बाकी बचा है जिसे लेकर वह आज अंग प्रदर्शन करने वाली अभिनेत्रियों के सामने फिर से जम जायेगी। क्या बात रह गई है जिसके लिये मुमताज फिर से फिल्मों में आना अनिवार्य समझा जायेगा। फिल्म युग का इतिहास गवाह है कि पिटा हुआ अभिनेता तो किसी न किसी प्रकार उभर जाता है लेकिन जो अभिनेत्री एक बार बैठ जाती है उसके लिये उठना जरा मुश्किल हो जाता है। सुनील दत्त की मिसाल हमारे सामने मौजूद है। अपने गिरते हुए फिल्म करियर को वहीदा रहमान अपनी शादी के स्कैन्डल से सम्भाल नही पाई। शर्मिला टैगोर अपने और पटौदी के झूठे प्रापोगन्डे को सम्भाल पायेगी या नही, यह देखना अभी बाकी है।

यूं अगर मुमताज चाहती तो यह नौबत कभी नही आती। विवाह के फौरन बाद अगर वह लन्दन भागने की बजाये फिल्मों में काम करती रहती तो उनके फिल्म करियर पर इतना असर नही पढ़ता और वह स्वंय भी यह सोचने पर मजबूर नही होती कि अभिनय के मैदान में वह अब टिक पायेगी या नही क्यों कि उन दिनों उनकी फिल्म ‘आप की कसम हिट हो रही थी और निर्माता निर्देशक उसके नाम की माला जपने लगे थे उस वक्त अगर मुमताज थोड़ा बहुत समझदारी से काम लेकर फिल्मों को अलविदा कहने की बजाये फिल्मों से थोड़ा बहुत टांके जोड़े रखती तो आज यह हालत नही होती लेकिन शायद वह नरगिस की तरह विवाह के पश्चात फिल्मों से पूरी तरह “कट आफ” होकर अपनी इज्जत और ज्यादा बनाना चाहती थी और ऐसा करते वक्त वह यह बिल्कुल भूल गई कि “न खुदा मिला न विसाले सनम” वाली बात न हो जाये।

मुमताज का मयूर से कोई मतभेद तो नही हो गया है) इस बात में थोड़ी बहुत सच्चाई इस लिये नजर आती है कि अमर बेल की तरह मुमताज को भी हमेशा किसी सहारे की तलाश रही है। और इसकी किस्मत ऐसी है कि इसने जिसका सहारा चाहा उसी का मिला। अब मुमताज चाहे लाख इंकार करती फिरे कि मुझे किसी ने सहारा नही दिया लेकिन इस बात से वह भी इंकार नही कर सकती कि शम्मी कपूर से लेकर मयूर तक मुमताज के जीवन में जितने भी नवयुवक आये हरेक ने मुमताज को सहारा दिया। और आज वही सहारे शायद मुमताज को बम्बई आने की दावत दे रहे हैं।

कमाल की बात तो यह है कि मुमताज के बम्बई आने से बड़ी बड़ी अभिनेत्रियों में एक खलबली सी मच गई है, शायद इस डर से कि वह जगह जो उन्होंने उनके लंदन जाने के बाद हासिल की थी उनसे दोबारा वापस न मांग ली जाये। इसीलिये वह सुबह सवेरे उठ कर सबसे पहले मुमताज को फोन करती है। यह पता लगाने के लिये कि वह बम्बई में है या चली गई। मुमताज का बम्बई आना वास्तव में एक रहस्य बना हुआ हैं। अब वह अपना वादा भी पूरा कर चुकी है। वह स्वंय इस विषय में बिल्कुल चुप है। आखिर कोई तो वजह होगी जिसने उन्हें लंदन से इतने लम्बे समय के लिये बम्बई आने पर मजबूर किया। वैसे फिल्मी दुनियां की सभी चीजें मायने रखती हैं। और सभी वे मानी है। यहां ऐसी अनहोनियां हो जाती है जिनका जिनका ख्याल आप सपने में भी नही कर सकते। कही उसका बम्बई आना किसी अनहोनी घटना की चेतावनी तो नही है। बहरहाल “कुछ तो है, जिसकी पर्दा दारी है।


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Mayapuri

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