रेहाना सुल्तान की बदनामी की असली वजह

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Rehana-Sultan

 

मायापुरी अंक 19.1975

किस्सा यूं बना।

निर्माता आई.एम.कुन्नू एक सुबह रेहाना सुल्तान के पास पहुंचे और बोलें“रेहाना। मैं तुम्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता हूं। ओ.के.

अब रेहाना और कुन्नू भाई में पुरानी जान पहचान है। यह निर्माता कुन्नू, निर्देशक बी.आर. इशारा और हीरोइन रेहाना सुल्तान का ही टीम वर्क था कि सैंसर बोर्ड के सदस्यों को ओवर टाइम काम करना पड़ा। इस टीम की बनाई फिल्मों के जो टुकड़े सैंसर वाले काट देते हैं, वे मुम्बई की ब्लैक मार्केट में ब्लू फिल्म के नाम से बेचे जाते हैं। बहरहाल वही कुन्नू भाई अपनी नई फिल्म रेहाना को हीरो इन लेना चाहते थे तो इसमें रेहाना को क्या आपत्ति हो सकती थी। रेहाना ने झटपट जेब से कलम निकाली और एग्रीमेंट साइन कर दिया।

यह सुबह की घटना है। शाम को दुर्घटना हुई। शाम को कुन्नू भाई फिर रेहाना के पास पहुंचे। बोले रेहाना हमारी फिल्म का नाम होगा काम शास्त्र।

रेहना को फिल्म के नाम से क्या लेना देना था काम शास्त्र, प्रेम शास्त्र, आंख शास्त्र, या अस्त्र-अस्त्र जो चाहे रख लो।

कुन्नू भाई ने आगे बताया “फिल्म में तुम टीचर बनों गी।“

रेहाना ने फिर सहमति में सिर हिला दिया। उनमें हरेक तरह का रोल करने का दम था। उन्हें चाहे टीचर बना दो चाहे फटीचर। कुन्नू भाई ने जरा धीमे स्वर में कहा “इस फिल्म को हम वहां से शुरू करेगें जहां हमने ‘चेतना’ खत्म की थी टीचर की विवश हालत का फायदा उठा कर स्कूल का प्रिंसिपल” कुन्नू भाई ने जो पहला सीन बताया तो रेहाना के पसीने छूट गए। यह स्कूल टीचर अपने शिष्यों को हिस्ट्री-ज्योग्राफी नही, काम शास्त्र पढ़ाती थी। थ्योरेटिकल ज्ञान के साथ साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी देती थी। रेहाना ने अपने होश संभाल कर कहा “मगर कुन्नू भाई”

अब कुन्नू भाई कोई चुन्नू-मुन्नू तो थे नही। वे रेहाना को समझाने लगे। रेहाना उन्हें समझानें लगी। नतीजा यह हुआ कि दोनों में से कोई भी एक दूसरे को समझ न सका और कुन्नू भाई यह बोल कर चले गये कि कल मैं आकर तुम्हें और समझाऊंगा।

मगर रेहाना बेचारी इतनी नर्वस हो चुकीं थी कि अगले दिन भाग कर बी.आर.इशारा के पास पहुंची। उनके कंधों पर सिर रख कर सुबकते हुए रेहाना ने कहा इशारा भाई, यह कुन्नू भाई मुझे बदनाम करने पर तुले हैं। मैं अपनी इमेज तोड़ना चाहती हूं। आज कोई भी ढंग का हीरो भाई मेरे साथ काम करने को तैयार नही।

इशारा भाई ने रेहाना को समझा दिया कोई बात नही, मै कुन्नू भाई को समझा दूंगा।

कुन्नू भाई फिर रेहाना के पास तशरीफ लाए। इस बार उन्होनें सीन थोड़ा बदल दिया था। पहले रेहाना टीचर थी, अब डॉक्टर। करना उसे अब भी वही कुछ था। अभी तक वह एक्सपोजर करती आई थी अब कुन्नू भाई उनसे एक्सपोजर करवाना चाह रहे थे।

रेहाना बेचारी इतना घबरा गई कि बिना बताए जाने कहां भाग गईं और जब कुन्नू भाई ने ‘काम शास्त्र’ के लिए दूसरी हीरोइन चुन ली, तभी लौटी।

रेहाना को आज हरेक निर्माता से यही शिकायत है, जब भी किसी निर्माता को सोसाइटी गर्ल (फिल्म में) की जरूरत पड़ती है वह मुंह उठाए रेहाना की ओर दौड़ा चला आते हैं गोया रेहाना न हो गई रेहाना अपनी इस स्थिति के लिए स्वयं ही उत्तरदायी हैं। उन्होंने अपनी पहली दो फिल्में चेतना और ‘दस्तक’ में अपना शरीर प्रदर्शन कर अपनी ऐसी इमेज बना ली कि दर्शक बिना उनका शरीर देंखे, उनकी कोई फिल्म देखने को तैयार नहीं। ‘हार जीत’ केवल इसलिए फ्लॉप हो गई कि इसमें रेहाना ने अपना शरीर कही भी एक्सपोज नही किया था।

इस समय कहने के लिए रेहाना की सात फिल्में प्रदर्शन के लिए तैयार हैं मगर उनमें से एक भी फिल्म रेहाना की इमेज तोड़ सकेगी इसमें संदेह है। यूं आप उन फिल्मों के नाम सुन लीजिये दिल की राहें (राकेश पांडे) किस्सा कुर्सी का (आदिल) सज्जो रानी (रमेश शर्मा) एक लड़की बदनाम सी महेन्द्र संधू) अलबेली विनोद मेहरा आज की राधा महेन्द्र संधू ये सच है

इनके अतिरिक्त रेहाना चार फिल्मों में काम कर रही हैं मगर वे सब एक ही थैली की चट्टी बट्टी हैं। रेहाना पर जो ‘न्यूड गर्ल’ का लेबल लग चुका है, उससे बेचारी इस जन्म में तो छुटकारा पा नही सकती, अगले जन्म की राम जानें।

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Mayapuri