INTERVIEW!! रोल कुछ चलाऊ कुछ कमाऊ तो कुछ लुटाऊ  – शर्मिला टैगोर

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मायापुरी अंक, 57, 1975

पिछले दिनों ‘मौसम’ के सेट पर शर्मिला टैगोर से मुलाकात हुई तो इन शर्मिला टैगोर में और ‘आविष्कार’ के सेट पर बहुत दिनों पहले मिली शर्मिला टैगोर में मुझे कोई अंतर नज़र नही आया। चेहरे पर अब तक समय और काल की रेखाएं नहीं उभरी थी, न ही दिये की लौ की तरह जलने वाली उनकी आंखो की चमक और गरमाई ही कम हुई थी न उनके स्निग्ध गालों के मादक गड्ढ़ों में शुष्कता ही पैदा हुई थी आश्चर्य की बात थी कि अब तक उम्र का ठप्पा उनके किसी अंग पर नही लगा था। वे आज भी तरोताजा थीं और उनके पास ऐसी ही महक फूट रही थी। जैसे वे किसी चंदन के झरने में नहा कर आयी हैं। इतना सब कुछ होते हुए भी यह एक सच्चाई है कि हेमा मालिनी और जीनत की तरह वे अब पहले की तरह खबरों में नही है और न हीरोइन के रूप में उनका पहले की तरह क्रेज ही रहा है।

कुछ लोगों की धारणा है कि राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी टूटते ही उनकी इमेज भी बिखर गयी। ‘नमक हराम’ के प्रदर्शन के बाद अपने किसी इंटरव्यू में उन्होंने कह दिया था कि उस फिल्म में अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना से अधिक प्रभावशाली रहे हैं। तब से राजेश उनसे खफा हैं और उनके साथ काम करने को राजी नही होते। मैंने जब इन बातों की ओर उनका ध्यान आकर्षित कराया तो उऩ्होंने मुस्करा कर कहा हां, यह ठीक है कि मैंने ‘नमक हराम’ के संबंध में अमिताभ बच्चन के रोल की तारीफ की थी पर उसका यह मतलब नही है कि राजेश खन्ना के खिलाफ कोई बात कही है। मैं आज भी उन्हें फाइन एक्टर मानती हूं पर ‘नमक हराम’ में अमिताभ बच्चन अपनी भूमिका में अधिक फिट साबित हुए हैं। ऐसा हर एक्टर के साथ होता है किसी रोल में वह फिट होता है किसी में नही मैं औरो की बात क्यों करूं अपनी ही बताती हूं जिस तरह मैं ‘अमर प्रेम’ ‘आविष्कार’ ‘चरित्रहीन’ ‘चुपके चुपके’ और  ‘अमानुष’ में फिट हुई हूं वैसी अन्य भूमिकाओं में नही।

तो क्या राजेश खन्ना ने आपकी कही बात का बुरा मान लिया? नही, मैं ऐसा नही मानती हम दोनों की कुछ फिल्मों के फ्लॉप हो जाने पर निर्माताओं ने ही हमारी टीम को लेना बंद कर दिया है। इतना ही नही, मैं अब केवल अच्छी और मनपसंद भूमिकाएं करना चाहती हूं। इसलिए केवल रोल और डायरेक्टर को महत्व देती हूं हीरो कोई भी हो। रही राजेश खन्ना की बात उनके साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी हूं इसलिए उनके साथ अच्छी अंडरस्टेंडिंग है। जब दो व्यक्ति बार-बार साथ काम करते हैं तो दोनों को एक दूसरे का स्वभाव और मूड को समझ लेने मैं आसानी हो जाती है और उससे इंटीमेट सीन भी सहज भाव से ही जाते हैं। इसलिए उनके साथ फिल्म मिलती है तो भला मै कैसे ठुकरा सकती हूं।

क्या साथ-साथ काम करने का मतलब इमोशनल इन्वोल्मेंट नहीं ?

शर्मिला ने गंभीरता से कहा नही मैंने सुना है कई आर्टिस्ट समझते हैं कि बिना इमोशनल इन्वॉल्वमेंट के वे अपने कैरेक्टर को सही ढंग से पेश नही कर सकते हैं। पर मैंने आज तक किसी भी रोल के लिए ऐसा महसूस नही किया।

तो फिर ‘सत्यकाम’ ‘अराधना’ ‘अमर प्रेम’ ‘आविष्कार’ ‘चरित्रहीन’ ‘चुपके चुपके’ ‘अमानुष’ आदि के बिना इमोशनल इन्वॉल्वमेंट के इतनी कामयाब कैसे रही?

उन फिल्मों की भूमिकाओं में केवल कैरेक्टर के साथ इमोशनल इन्वॉल्वमेंट नही था बल्कि उससे भी कुछ अधिक था जिस तरह से फिलॉसोफी में सेल्फ रियलाइजेशन होता है। कैरेक्टर रियलाइजेशन के बाद ही भूमिकाएं लिविंग बन जाती है।

क्षमा करें शर्मिला जी-तो इसका मतलब यह है कि केवल चंद फिल्मों में आपका कैरेक्टर रियलाइजेशन हुआ है।

बेशक शर्मिला ने बेझिझक कहा।

तो फिर कुछ फिल्मों में आपने निरर्थक महत्वहीन भूमिकाएं स्वीकार ही क्यों की?

सच सच बता दूं! शर्मिला ने मुस्कुरा कर कहा।

मैंने बड़ी उत्सुकता से कहा क्यों नही, क्यों नही।

शर्मिला टैगोर ने अपने बालों को संवारते हुए कहा मैं प्रोफेशनल आर्टिस्ट हूं इसलिए कभी-कभी फन के लिए भी कुछ चलाऊ रोल स्वीकार कर लेती हूं। कुछ धन कमाने के लिए कमाऊ रोल लेने पड़ते हैं और किये भी हैं पर कुछ रोल ऐसे होते हैं जिनके लिए मैं अपने आपको कुर्बान कर देती हूं ‘आविष्कार’ का रोल कुछ ऐसा ही था जिसे आज भी याद करते ही सिहर उठती हूं उस रोल के लिए मैंने कोई सौदा नही किया क्योंकि वह रोल ही ऐसा था जिसे सुनते ही मैं कुर्बान हो गयी और जिसे साकार करने के लिए मैंने पूर्णरूप से आत्म-समर्पण कर दिया अपने आपको लुटा दिया।

sharmila tagore interview

शर्मिला जी, अभी-अभी आपने यह कहा है कि आप रोल को और डायरेक्टर को महत्व देती हैं तो क्या आप किसी भी नये हीरो के साथ काम कर लेंगी?

एक प्रोफेशनल आर्टिस्ट को अपनी स्थिति बनाये रखनी ही पड़ती है। आर्टिस्ट आगे बढ़ता है, पीछे नही लौटता।

इस वक्त आप किन-किन हीरो के साथ आ रही हैं ?

मैं धर्मेन्द्र, अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, शत्रुघ्न सिन्हा के साथ आ रही हूं।

आपने अब तक अनेकों हीरो के साथ काम किया है, उनमें आपकी मन पसंद का हीरो कौन है ?

जिसके साथ काम करती हूं वही रोल के अनुसार मन पसंद हो जाता है वैसै मैं पहले बता चुकी हूं कि व्यक्तिगत रूप से मेरा किसी भी हीरो के साथ भावनात्मक लगाव नहीं है।

तो राजेश खन्ना के साथ जुड़ी आपकी बातें क्या अफवाहें थी?

हां, चूंकि उनके साथ मैं कई फिल्मों में आयी और कई फिल्मों में मैंने उनके साथ इंटीमेंट सीन भी किये इसलिए इस तरह की अफवाहें उड़ना मामूली बात है।

आप सोचती हैं कि हीरो हीरोइन के अफेयर्स नही होते ?

होते हैं क्यों नहीं-होते हैं पर उन अफेयर्स को तूल देकर उनकी घरेलू जिंदगी तक खींच लाना ठीक नही है।

अफवाहें उड़ाने वालों ने तो आपको भी नही बख्शा है इस मामले में उनका कहना है कि फिल्मी जीवन से आपका विवाहित जीवन संकट में पड़ गया है और नवाब पटौदी के साथ तलाक लेने की स्थिति पैदा हो गयी है क्या इस बारे में आप कुछ बतायेंगी?

हम दोनों के बीच इमोशनल अटेचमेंट ही नही, प्रोफेशनल अंडरस्टैंडिंग भी है। वे क्रिकेट के मामले में व्यस्त रहते हुए मेरा पूरा ख्याल रखते हैं और फिल्मों में व्यस्त रहते हुए मैं उनका ख्याल रखती हूं। उन्हें यह मालूम है कि मैं फिल्मों की हीरोइन हूं ग्लैमर वर्ल्ड की हीरोइन हूं और मुझे अनेक हीरो के साथ इंटीमेंट और रोमांटिक भूमिकाएं करनी पड़ती है। मुझे भी यह पता है कि क्रिकेट के स्टार होने के नाते उनका वास्ता कई सुन्दरियों से हो सकता है। पर मैं यह मानती हूं कि मैं उनकी बीवी हूं और वे यह मानते है कि वे मेरे पति हैं हम दोनों कई बार अपनी अपनी व्यस्त जिंदगी से अवकाश लेकर पारिवारिक सुख का आनंद लूटते हैं। कभी-कभी मतभेद हो भी जाता है। पर उससे घर में आग नहीं लगती और न ही हलचल होती है। इस दृष्टि से हम दोनों एक दूसरे के लिए भाग्यशाली हैं।

क्या बात है कि इन दिनों गॉसिपिंग कॉलमों में आपकी अधिक चर्चा नहीं है?

क्योंकि मैं इस वक्त बहुत कम फिल्मों में आ रही हूं। वह क्यों?

मैंने फैसला किया है कि मैं अब केवल कुछ चुनी हुई फिल्मों में काम करूंगी-फन के लिए या केवल धन कमाने के लिए रोल करने की अब तमन्ना नही रही। बहुत फन किया बहुत कमाया। किसी बात की कमी नही है। इसलिए अब केवल ‘सत्यकाम’ ‘आराधना’ ‘सफर’ ‘अमरप्रेम’ ‘आविष्कार’ ‘चरित्रहीन’ ‘चुपके चुपके’ और ‘अमानुष’ जैसी बल्कि उनसे भी और बेहतरीन फिल्मों में काम करना चाहती हूं।

यदि उस तरह के रोल नहीं मिले तो

कोई दुख नही होगा। घर है, परिवार है, मित्र है, पढ़ने के लिए ढ़ेर सारी किताबें है और सैर सपाटे के लिए सारे साधन हैं मैं जिंदगी को इंज्वॉय करना जानती हूं बोर नही होती।


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Mayapuri

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