बॉलीवुड के लिए सोशल मीडिया बना जी का जंजाल  

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शोशल मीडिया मकड़ जाल के अलावा कुछ नही है। मगर पूरा बॉलीवुड इसी मकड़ जाल का शिकार हो चुका है। सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत के ही साथ बॉलीवुड की कार्यशेली में भी काफी बदलाव आ चूका है! तो वहीं बॉलीवुड का लगभग हर कलाकार सोशल मीडिया का क्रेजी नहीं, बल्कि लत का षिकार हो चुका है। कुछ कलाकारों के लिए अभी भी सोशल मीडिया अपने फैन्स के साथ गुफ्तगूं करने या यू कहें कि जुड़ने का साधन मात्र है। तो कई कलाकार अपनी फिल्म या टीवी सीरियल या वेब सीरीज के सुपर फ्लाप होने के बावजूद सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड या बिकनी की तस्वीरों को मिल रही लाइक्स देखकर ही अपना सीना चैड़ा करते रहते हैं। तमाम कलाकार बार-बार पत्रकारों को याद दिलाते रहते हैं कि उनके सोशल मीडिया पर इतने फालोअर्स हो गए हैं! उन्हे एक पोस्ट पर इतने लाइक्स मिलने लगे हैं अथवा उनके इस पोस्ट पर इतने अधिक कमेंट्स आए हैं। इतने लोगों ने उनकी पोस्ट को षेअर किया है। तो वहीं कुछ कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय की बदौलत पायी शोहरत को भुनाते हुए सोशल मीडिया को कमाई का बेहतरीन साधन बना लिया है! जी हाँ! कई कलाकार सोशल मीडिया पर फोटो ट्वीट या पोस्ट करने के लिए लाख से करोड़ रूपये तक लेने लगे है। जबकि कुछ कलाकार अपने सोशल मीडिया के फालोअवर्स की संख्या गिनाकर फिल्में या टीवी सीरियल या वेब सीरीज हथिया रहे हैं।

कुछ कलाकारो ने सोशल मीडिया पर अपने प्रषंसको  व अन्य लोगों को किसी न किसी विषय का एक्सपर्ट बनाकर सलाह तक देने लगे हैं। मसलन-रिचा चड्ढा ‘पेट्स केअर’ पर सलाह देने के अलावा घायल बिल्ली या कुत्ते को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके घरों तक पहुँचाती रहती हैं। षिल्पा षेट्टी सोशल मीडिया पर योगा टिप्स देती रहती हैं। अब तो षिल्पा षेट्टी ने ‘यूट्यूब  पर अपना चैनल बनाकर योगा के वीडियो बनाकर पोस्ट कर पैसा कमा रही हैं। वही सोनम कपूर ‘फैषनविस्टा बनकर फैषन को लेकर सोशल मीडिया पर सलाह देती नजर आ जाती हैं। उन्होंने अपना ऐप लांच कर फैषन टिप्स दिया करती थीं। तो वही वह मोटापा करने वाली मिठाइयों को लेकर भी बाते करती हैं। सोशल मीडिया पर ब्यूटी टिप्स देने वाली पचास से अधिक टीवी या फिल्म अभिनेत्रियां मौजूद हैं।

बिपाशा बसु ज्वेलरी,पोषाक व वार्ड रौब में क्या क्या होना चाहिए,इस पर सलाह देते नजर आती हैं। मलाइका अरोड़ा अपनी यात्राओं के संस्मरण सुनाते हुए यात्रा के समय किस तरह परेषानियों से बचा जाए, इस पर सलाह देती रहती हैं। सुष्मिता सेन अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर फिटनेस की सलाह देने वाले वीडियो पोस्ट करती रहती हैं।

कहने का अर्थ यह है कि, सोशल मीडिया एक अफीम की तरह बॉलीवुड के अंदर घुस चुका है। कुछ जान बूझकर तो कुछ अनजाने ही इससे हो रहे नुकसान को लेकर अपनी आँखो पर पट्टी बांधे हुए है! हम यह कदापि दावा नही करते कि सोशल मीडिया के फायदे नही है, मगर इस कटु सत्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस तरह सोशल मीडिया के प्रभाव तथा सोशल मीडिया को ही सब कुछ मानकर बॉलीवुड और कलाकार, निर्माता, निर्देषक वगैरह की सोच व कार्यषैली में बदलाव आया है,वह कहीं न कहीं ‘गेहॅूं के घुन’ की तरह सिनेमा के साथ ही कलाकारों को भी नुकसान पहुंचा रहा है! इस संबंध में पिछले कुछ वर्षों के गहन षोध व कई अमरीकी षोधग्रंथों को पढ़ने व सोशल मीडिया पर बहुत बारीकी से नजर दौड़ाने पर जो बात उभर कर आती है कि इन दिनों सोशल मीडिया का क्रेजी बॉलीवुड खुद ही अपनी कब्र खोदने पर आमादा है।

सोशल मीडिया के चलते बदला-बदला सा बॉलीवुड

बॉलीवुड से जुड़ने वाले हर इन्सान की चाहत रातों रात सुपर स्टार बन जाने से लेकर अनाप षनाप षोहरत पाकर ग्लैमर की दुनिया का बेताज बादषाह बन जाने की हमेषा से रही है! बॉलीवुड में सफलता के लिए लोग कई तरह के ‘शोर्टकट’ अपनाकर सफल होते या धोखा खाते भी गए है। पर अब सोशल मीडिया सभी को एक सषक्त माध्यम नजर आने लगा है। पहले फिल्मकार अपनी फिल्म की पटकथा के अनुरूप लोकेषन ढूढ़ने के लिए कई माह तक देष के कोने केाने में भटकता था। अब उसका यह काम सोशल मीडिया के चलते काफी आसान हो गया है। यहां सिनेमा की लागत कम करने व बेवजह के परिश्रम को खत्म करने के दृष्टिकोण से सोशल मीडिया सषक्त व फायदेमंद माध्यम माना जा सकता है।

फिल्म के किरदार के उपयुक्त कलाकार का चयन हमेषा से हर निर्माता व निर्देषक के लिए सर्वाधिक सिरदर्द रहा है। निर्माता निर्देषक की इसी सिरदर्द को कम करने के नाम पर कई कास्टिंग एजेंसियां उभरी। इनमें से कुछ अच्छा काम कर रही हैं। पर धीरे धीरे ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की तर्ज पर इन कास्टिंग एजंसियों के कर्ताधर्ताओं ने भी अपने निराले खेल दिखाने षुरू किए। ऐसे में सोशल मीडिया इन फिल्म निर्माता व निर्देषकों के लिए वरदान बनकर आया। अब निर्माता निर्देषक ही नही कास्टिंग एजंसियां भी सोशल मीडिया पर निर्भर होकर अपनी फिल्म सीरियल या वेब सीरीज के लिए कई कलाकारों का चयन करने लगे हैं।

जी हाँ! यह कटु सत्य है। अपने समय की प्रसिद्ध अदाकारा नीना गुप्ता बीच में कुछ वर्षों के लिए गायब हो गयी थीं। उन्हे फिल्म वाले भुला बैठे थे। अंततः एक दिन नीना गुप्ता ने सोशल मीडिया के ‘इंस्टाग्राम’ प्लेटफोर्म पर अपनी नई तस्वीरों के साथ एक पत्र पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि उनके अंदर अभी भी अभिनय क्षमता है और वह दिल्ली नहीं मुंबई में रहती है तथा उत्कृष्ट किरदार निभाने की इच्छा रखती हैं। इस इंस्टाग्राम पोस्ट की बदौलत नीना गुप्ता को फिल्म ‘बधाई हो’ में अभिनय करने का अवसर मिला और इस फिल्म के बाद नीना गुप्ता एक बार फिर से स्टार बन गयीं। अब तो नीना गुप्ता अक्सर सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो पोस्ट करती रहती हैं। इस तरह नीना गुप्ता के लिए सोशल मीडिया सही मायनों में सषक्त व फायदेमंद माध्यम साबित हुआ। मगर इसकी परणिति यह हुई कि नीना गुप्ता खुद को स्टार समझने लगी हैं और अब वह फिल्मों में अभिनय करने या सोशल मीडिया के लिए वीडियो वगैरह बनाकर पोस्ट करने में व्यस्त रहती हैं, पर पत्रकारों से बात करने के लिए उनके पास वक्त की कमी हो गयी है। वह अपनी हर छोटी बड़ी बात, अपनी नई फिल्म से संबंधित जानकारी व पोस्टर आदि सोशल मीडिया पर षेयर कर खुष होती रहती हैं। लेकिन यदि नीना गुप्ता अपनी सोशल मीडिया की इस लत पर षांत होकर गंभीरता से गौर करें, तो षायद उनको एहसास होगा कि वह खुद और सिनेमा का कितना बड़ा नुकसान कर रही हैं।

अब निर्माता निर्देषक सोशल मीडिया पर कलाकारों की खूबसूरत तस्वीरें अथवा बिकनी वाली तस्वीरो अथवा बोल्ड तस्वीरें देखकर उन्हें अपनी फिल्म के लिए बिना ऑडिशन लिए अनुबंधित करते हैं! कुछ नए चेहरों को फेसबुक पर उनकी सुन्दर तस्वीर देखकर एकता कपूर सहित कुछ निर्माताओ ने अपने सीरियलों में अभिनय करने का अवसर दिया। पर उनके अंदर अभिनय क्षमता नही थी, जिसके चलते सुन्दर चेहरे की बदौलत एक दो सीरियल में वह चमकते रहे, फिर गुमनामी में खो गए। इस जगह गौर किया जाए,तो सही प्रतिभा को मौका नही मिला, सिनेमा का नुकसान हुआ और जिसे मौका मिला था,उसकी निजी जिंदगी पर भी गलत असर पड़ा।

इसी तरह महज आँख मारने वाले वीडियो के चलते सोशल मीडिया संषेसन बन जाने वाली प्रिया प्रकाष वरियर पर सिनेमा जगत के लोग इस कदर टूट पड़े कि देखते ही देखते वह ‘श्री देवी बंगलो’ सहित चार पांच फिल्मों की हीरोइन बन गयी। निर्माताओं ने उसकी औकात से कहीं कई गुना ज्यादा धनराषि देकर उसे हीरोईन बनाया। मगर एक भी फिल्म सिनेमाघर नही पहुंची और अब प्रिया प्रकाष वरियर का कोई नाम नही लेता।इससे नुकसान सिनेमा को हुआ।

सोशल मीडिया पर फालोअर्स का भ्रमजाल

इतना ही नही सोशल मीडिया की चकाचैंध से घिरे कई फिल्म व टीवी सीरियल निर्माता इन दिनों कलाकारों के सोशल मीडिया के फालोअर्स की संख्या देखकर अपनी फिल्म या सीरियल के लिए उस कलाकार को जोड़कर यह मान लेते  हैं कि अब उनके सीरियल या फिल्म को सफल होने से कोई नही रोक सकता।जबकि यह सबसे बड़ा पानी का बुलबुला है।

लेकिन जिस तरह के आंकड़े उपलब्ध हैं, उन पर गौर किया जाए,तो एक बात साफ तौर पर उभरकर आती है कि सोशल मीडिया से कलाकार के स्टारडम को नुकसान हो रहा है।यह एक अद्भुत सत्य है। अमिताभ बच्चन के सोशल मीडिया यानी कि ट्वीटर, इंस्टाग्राम व फेसबुक पर एक करोड़ फालोअवर्स होने के बावजूद उनकी फिल्म ‘षमिताभ’ ने बाक्स ऑफिस पर पानी नहीं मांगा था। बहरहाल,इन दिनों सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन के फालोअवर्स की संख्या 80 मिलियन रह गयी हैं। अमिताभ बच्चन व ऋषि कपूर की फिल्म ‘102 नॉट आउट’ को भी सफलता नही मिली। फिल्म ‘102 नॉट आउट’ की निर्माण लागत 35 करोड़ रूप्ए थी। फिल्म के प्रमोषन पर खर्च अलग से हुआ।पर इस फिल्म ने बाक्स ऑफिस पर सिर्फ तीस करोड़ (ज्ञातब्य है कि बाक्स ऑफिस की कमाई का चालिस प्रतिषत ही निर्माता को मिलता है। बाकी थिएटर के खर्च में कट जाता है।) ही कमाए।

तो वहीं सलमान खान के फेसबुक पर 35 मिलियन, ट्वीटर पर 29.8 मिलियन व इंटाग्राम पर 13.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसके बावजूद सलमान खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइ’ इस कदर असफल हुई कि सलमान खान को वितरकों के पैसे वापस लौटाने पड़े थे।इतना ही नहीं सलमान खान की फिल्म ‘रेस 3’ ने भी पानी नहीं मांगा।

षाहरुख खान के भी ट्वीटर पर 35 मिलियन और इंस्टाग्राम पर 25 मिलियन फालोअर्स हैं, पर उनकी ‘फैन’,‘रईस’ व ‘जब हैरी मेट सेजल’ सहित कई फ़िल्में बुरी तरह से असफल हुईं।

कहने का अर्थ यह है कि यदि सोशल मीडिया ताकतवर है और यह कलाकार अपनी फिल्म का सर्वाधिक प्रमोषन सोशल मीडिया पर ही करते है। तो फिर इनकी फिल्में असफल क्यों हो रही हैं?यदि इन कलाकारों के तीस प्रतिषत फालोअर्स भी इनकी फिल्में देख ले,तो इनकी फ़िल्में काफी कमा सकती हैं। पर ऐसा नहीं हो रहा है। मगर भेड़चाल के षिकार बॉलीवुड में कोई भी षख्स इस सच को स्वीकार करने या इस पर विचार करने को तैयार नही हैं। हर कलाकार सिर्फ सोशल मीडिया को ही भगवान मानकर चल रहा है। मजेदार बात यह है कि जब हमने लगभग सत्तर कलाकारों से सवाल किया कि ‘आपको नहीं लगता कि सोशल मीडिया उनके/कलाकार के स्टारडम को नुकसान पहुंचा रहा है?’तो अस्सी प्रतिषत कलाकारों ने इस सच को स्वीकार किया, पर वह यह कहने से नहीं चूके कि, ‘जब सभी सोशल मीडिया पर है, तो हम दूरी कैसे बनाएं।

विक्रम भट्ट उवाचः

कुछ लोग इस कटु सत्य केा स्वीकार करने से हिचकिचाते नही है। सोशल मीडिया व इंटरनेट के नुकसान को लेकर फिल्म बना चुके मषहूर फिल्मकार विक्रम भट्ट कहते हैं-‘यह सारा खेल डिमांड और सप्लाई का है।तो वहीं इसके चलते सिनेमा को नुकसान हो रहा है। देखिए,फिल्मकार के तौर पर सोशल मीडिया की लोकप्रियता के आधार पर जब हम किसी कलाकार या नई प्रतिभा को अपनी फिल्म के लिए चुनते हैं,तो हमें यह नही पता होता कि लोग उसे किस वजह से पसंद कर रहे हैं। उसके फालोअवर्स में किस उम्र व किस देष के लोग हैं? और उनकी चाहत क्या है। हमारी फिल्म भूत प्रेत या हरार की है,मगर क्या जिसे हमने फालोअर्स की बड़ी संख्या देखकर अपनी फिल्म में काम दिया है, उसके फालोअर्स यदि होरार व भूत प्रेत की फिल्में देखने से परहेज करते हैं, तो क्या होगा? इसलिए मैं बार-बार कहता हूं कि इससे सिनेमा को नुकसान हो रहा है। मेरी राय में सोशल मीडिया पर निर्भरता से हम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया से न तो कलाकार का स्टारडम बढ़ता है और न ही फिल्म के बाक्स ऑफिस का कलेक्षन बढ़ता है।

सोशल मीडिया की लत ने बदला फिल्म प्रचार का स्वरुप

सोशल मीडिया के प्रति बॉलीवुड की दीवानगी का आलम यह है कि अब फिल्म के प्रदर्षन से पहले उसके प्रचार/ प्रमोषन का तरीका ही पूरी तरह से बदल गया है।पहले फिल्म निर्माता व निर्देषक पार्टी रखते थे और उस पार्टी में अपनी फिल्म के गाने पत्रकारों को बुलाकर दिखाते थे।इसी तरह से फिल्म का ट्रेलर/पोस्टर आदि के लिए भी पत्रकारों और प्रेस फोटोग्राफरों को बुलाकर दिखाया जाता था। इस तरह से गाने व ट्रेलर को रिलीज करने में निर्माता की जेब से लाखों रूपए खर्च होते थे। छोटे बजट वाली फिल्म के निर्माता के वष में यह खर्च वहन करना नही होता था।वह तो षहर में अपनी फिल्म के पोसटर तक नही लगवा पाता था।जिसके चलते उसे कई तरह के नुकसान उठाने पड़ते थे।ऐसे निर्माता व निर्देषकों के लिए कुछ हद तक सोशल मीडिया वरदान बनकर आया है।अब वह अपनी फिल्म के पोस्टर,गाने,ट्रेलर सब कुछ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी फिल्म को चर्चा लाने का प्रयास करता है। जिससे छोटे बजट की फिल्म को कुछ दर्षक मिलने से लाभ होेने लगा है।अथवा कम से कम वह फिल्म इंडस्ट्री के लोंगों के बीच अपनी फिल्म की जानकारी पहुँचाने में सफल हो जाता है।

मगर पचास करोड़ से हजार करोड़ रूपए की लागत से फिल्म बनाने वाले फिल्मकार भी अपने प्रचारक/पी आर की सलाह मानकर अब पत्रकारों को गाना दिखाने या टेªलर दिखाने की बजाय सीधे सोशल मीडिया/यूट्यूब/इंस्टाग्राम/ ट्वीटर पर गाने व फिल्म के ट्रेलर डालकर आंकडे देने शुरू करते हैं कि उनकी फिल्म के ट्रेलर को इतने करोड़ लोगों ने देखा। अथवा गाना इतने करोड़ लोगों ने देखा। इतना ही नही कई फिल्मी हस्तियां भी अपनी दोस्ती निभाते हुए फिल्म के ट्रेलर व गाने की तारीफ में ट्वीट करना षुरू कर देते हैं।

लेकिन जब फिल्म सिनेमाघर पहुँचती है,तब उस फिल्म का ट्रेलर या गाने को जितने करोड़ लोगों ने देखा होता है,उसके दस प्रतिषत भी दर्षक नही मिलते। वास्तव में पहले निर्माता व निर्देषक अपने पीआर की जवाबदेही तय करता था,अब जवाब देही किसी की नही रही। इसलिए सभी मेहनत करने से बचते हुए शॉर्टकट रास्ता अपनाते हुए गलत सलाह व गलत जानकारी निर्माता या निर्देषक या कलाकार तक पहुँचाता रहता है! जिसे कोई क्रास चेक नही करता! पी आर तो उन तक सिर्फ अच्छी खबरें ही पहुँचाता है। मसलन- तीन अगस्त को अक्षय कुमार की फिल्म ‘बेल बोटम’ का ट्रेलर जारी हुआ। कुछ घंटे बाद ही फिल्म के पीआर ने पत्रकारो के पास खबर भेज दी कि फिल्म ‘बेलबोटम’के ट्रेलर को बारह घंटे में ही बीस मिलियन व्यूज सोशल मीडिया पर मिल गए। इसे पढ़कर फिल्म निर्माता भी गदगद हो गया। पर क्या निर्माता को पता चला कि सोशल मीडिया में ट्रेलर की कमियां किस तरह की बतायी जा रही हैं। अब इसका खमियाजा भी फिल्म यानी कि निर्माता और अंततः सिनेमा को भुगतना पड़ेगा।

वास्तव में इंसान के मनोविज्ञान के अनुसार जब कोई इंसान किसी फिल्म या कलाकार के बारे में कोई भी बात किसी पत्र या पत्रिका में पढ़ता है,तो पढ़ने के बाद उसकी सत्यता या उसके बारे में और अधिक जानने की जिज्ञासा उसके अंदर पैदा होती है। यही जिज्ञासा इंसान को सिनेमाघर के अंदर ले जाता है।पर जब कलाकार स्वयं अपने खाने पीने, उठने बैठने से लेकर खुद से जुड़ी हर बारीक बात को सोशल मीडिया पर साझा करता है अथवा अपनी फिल्म से जुड़ी बात सोशल मीडिया पर साझा करता है,तो उसे पढ़ने के बाद इंसान/ फालोअवर्स की उस कलाकार या फिल्म के प्रति सारी जिज्ञासा का अंत हो जाता है,जो कि सिनेमा को बर्बाद करने का ही काम कर रहा है।

सोशल मीडिया के फेर में कलाकार ने बढ़ाया अपना निजी खर्च

कई कलाकार मानते हैं कि, अब उन्हे उनकी प्रतिभा को बड़े-बड़े फिल्मकारों तक पहुँचाने के लिए सोशल मीडिया के तौर पर बहुत बड़ा हथियार मिल गया है! इसलिए अब हर कलाकार हर दिन सोशल मीडिया पर अपने फालोअवर्स और जो कुछ वह पोस्ट करते हैं, उसके लाइक्स और उस कमेट्स बढ़वाने के लिए कई तरह के जतन करते रहते हैं। अब कलाकार जब भी घरे से बाहर निकलता है, तो वह बनठन कर निकलता है, मानों किसी फैशन परेड में जा रहा हो। फिर एअरपोर्ट या जिम या कहीं भी जाना हो,वह चमक दमक व नित नई पोषाक पहनकर एक नए लुक के साथ ही जाता है। फिर अपने पीआर को सूचित करता है। उसका पीआर कुछ फोटोग्राफरों (सूत्र दावा करते है कि लगभग हर कलाकार ने दो चार फोटोग्राफरो को मासिक तनख्वाह पर नियुक्त कर रखा है।) को सूचित करेगा,वह फोटोग्राफर तुरंत उस कलाकार की तस्वीरें खींचता है। फिर वह तस्वीरे कलाकार द्वारा या उसकी डिजिटल एजेंसी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाती है। उसके बाद उसकी लाइक्स व कमेंट्स बढ़ाने का खेल षुरू होता है।इतना ही नहीं कुछ तस्वीरें पीआर के माध्यम से पत्रकारांे तक पहुॅचायी जाती है। इसके अलावा कलाकार बिकनी मंे या अन्य तरह की पोषाक में फोटोसेषन करवाकर उन तस्वीरों को भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है।

माना कि सोशल मीडिया के फालोअवर्स की संख्या बल के आधार पर कलाकार फिल्में व एंडोर्समेंट हथिया लेता है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के एवज में भी लंबी रकम ऐठ लेता है। मगर यह सब करने के लिए उसे हर दिन अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। यह रकम फोटोग्राफर, पीआर टीम, डिजिटल टीम वगैरह को देने, हर दिन नई पोषाक, मेकअप आदि पर धन खर्च करना षामिल है। इतना ही नही तमाम कलाकार अपने फालोअर्स की संख्या बढ़वाने से लेकर लाइक्स व कमेंट्स बढ़वाने के लिए भी पैसा खर्च करते हैं। लगभग दो वर्ष पहले मुंबई पुलिस की अपराध षाखा की ‘द क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट‘ (सीआईयू )ने जांच षुरू की,तो मुंबई पुलिस की अपराध षाखा को ऐसी 76 कंपनियों के बारे में जानकारी मिली, जो कि बॉलीवुड हस्तियों के साथ ही मनोरंजन जगत व संगीत जगत से जुड़ी हस्तियों के सोशल मीडिया में फर्जी फॉलोअर्स दिलाने का काम करती आ रही हैं। एक तरह से यह मामला पूरी तरह से लोगों को धोखा देने,छलने और चारसौबीसी करने का है। आईसीएम की स्टडी के अनुसार दो महिला कलाकारों के 48 प्रतिषत इंस्टाग्राम फॉलोअर्स फर्जी पाए गए थे।उस वक्त मुंबई पुलिस की अपराध षाखा की जाॅंच के दायरे में दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा और रैपर बादषाह सहित 176 फिल्मी हस्तियंा आयी थी,पुलिस की जांच किस मुकाम तक पहुॅची है,पता नही।मगर यह तय है कि अब हर कलाकार अपने आपको सोशल मीडिया का षेर साबित करने के लिए अपनी जेब से हर माह लाखों रूपए खर्च कर रहा है।जबकि हकीकत में वह अपने स्टारडम को ही कुचल रहा है।उसके फालोअवर्स सिनेमाघर के अंदर उनकी फिल्में देखने नही जाता,यह तय है।

ट्रोलिंग के चलते नुकसानः

फिर भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के बीच फेसबुक और ट्वीटर को लेकर अजीब सी दौड़ मची हुई है। हर कलाकार या फिल्मकार यह साबित करने पर लगा हुआ है कि ट्वीटर पर उसके कितने फालोअर हैं या फेसबुक पर उसके कितने फालोअर या फ्रेंड्स हैं। एक दूसरे को पछाड़ने की इस होड़ में यह फिल्मकार या फिल्म कलाकार बहुत ही ज्यादा ओछी हरकतें भी करते हुए नजर आते हैं।यह अपनी अलग अलग अंदाज में या अपनी फिल्म के फोटोग्राफ डालते हैं।फिल्म के पोस्टर डालकर सोचते हैं कि उनकी फिल्म का बाक्स ऑफिस कलेक्षन बढ़ जाएगा। पर इस होड़ के चलते उनकी तस्वीरों या उनके अपने लिखे कमेंट पर आम लोग किस तरह की प्रतिक्रिया दे सकते हैं,उस पर विचार नहीं करते हैं।कुछ वर्ष पहले दीपिका पादुकोण की एक फिल्म की तस्वीरों पर जिस तरह से लोगों ने ट्वीटर व फेसबुक पर उनके अंतःवस्त्रों की चर्चा की, उससे आहत होकर दीपिका पादुकोण को अपने ‘फेसबुक वाल’ पर लोगों के नाम ‘ओपन लेटर’ लिखना पड़ा था। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि जब लोग किरदार की बजाय उस किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री पर उंगली उठाते हैं,तो उन्हें तकलीफ होती है। दीपिका ने लिखा कि आम औरतों की ही तरह अभिनेत्रियों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।वास्तव में दीपिका की एक तस्वीर को ‘‘ओएमजीः दीपिका पादुकोण क्लीवेज षो ’’षीर्षक दिया गया।तब इस तस्वीर के बारे में दीपिका पादुकोण ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा-‘‘हाँ! मैं एक औरत हूँ। मेरे पास वक्षस्थल और क्लीवेज है। क्या इससे आपको दिक्कत है?’’ उसके बाद कई प्रतिक्रियाएं आयी। तब दीपिका पादुकोण ने अपने फेसबुक वाल पर एक ओपन लेटर में लिखा-‘‘मैं अपने पेषे से अंजान नही हॅूं। यह एक ऐसा पेषा है, जो मुझसे बहुत कुछ चाहता है।षायद एक किरदार की मांग हो कि मैंसिर से पाव तक ढंकी रहूँ या पूरी तरह से नग्न रहूं .. किरदार जो भी हो, उसे तन्मयता के साथ निभाना मेरा कर्तब्य है.’ उन्होने उसी पत्र में आगे लिखा था-‘जब एक अभिनेत्री का अंतः वस्त्र अचानक नजर आने लगता है,तो यकीनन वह घर से ऐसा करने के बारे में सोचकर नहीं निकली होगी… हम उसे थोड़ी ‘इज्जत’ क्यों नहीं देते, हम इंसान नहीं हैं?’’

ट्वीटर/फेसबुक पर पहली बार दीपिका ने अपने गुस्से का इजहार नहीं किया। वह अक्सर ऐसा करती रहती हैं. जी हाँ! हर बात को ट्वीटर पर ट्वीट करने वाली दीपिका पादुकोण भी ट्वीटर की वजह से परेषान हैं।वह अपने गुस्से का इजहार भी ट्वीटर पर करती रहती है।सभी को पता है कि ब्रिटिष एअरवेज से यात्रा करते समय दीपिका पादुकोण का सामान एक नहीं बल्कि अब तक चार बार गायब हो चुका है।चैथी बार ब्रिटिष एअरवेज से सामान गायब होने पर दीपिका पादुकोण ने जून 2014 में अपने गुस्से का इजहार करते हुए ट्वीटर पर लिखा था- ‘लगता है सामान गायब कर देना ब्रिटिष एअरवेज का षौक बन गया है। चौथी बार ऐसा हुआ है। यह बात पक्की है कि आखिरी बार नहीं।’’ उसके बाद ब्रिटिष एअरवेज तेज गति से सक्रिय हुआ था।

दीपिका पादुकोण से पहले भी कई कलाकारों को ट्वीटर व फेसबुक पर उनके प्रशंसको की तरफ से गालियां मिलती रही हैं, मगर सब चुप रहे।पहली बार दीपिका पादुकोण ने पुरजोर ताकत के साथ रिएक्ट किया।इसका उन्हे फिल्म इंडस्ट्री से अच्छा समर्थन भी मिला था।

माना कि तकनीक व इंटरनेट के विकास के साथ सोशल मीडिया एक अति सषक्त माध्यम है।हम इसके माध्यम से अपनी बात चंद मिनट के अंदर पूरे विष्व तक पहुँचा सकते हैं, मगर सोशल माध्यम उतना ही अधिक खतरनाक व नुकसान दायक है। कलाकार या निर्माता निर्देषक को सोशल मीडिया का उपयोग काफी समझदारी के साथ करने की जरुरत है, तभी वह इसका फायदा उठा सकता है। सोशल मीडिया को ही सब कुछ मानना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। किसी को भी इस मुलावें में नही रहना चाहिए कि सोशल मीडिया के फालोअर्स से उनका स्टारडम उंचाईयों पर पहुंचेगा!

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Mayapuri