‘‘हमारा ही संगीत ऐसा रहा है,जिसका पूरा अलबम लता मंगेशकर ने गाया है.’’ -ललित पंडित, गायक और संगीतकार

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बालीवुड में लगातार बीस साल तक थिएटर में लगी रहने का रिकार्ड बनाने वाली फिल्म ‘‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’’ की संगीतकार जोड़ी जतिन ललित के लिए यह कम गौरव की बात नही है. बॉलीवुड में संगीतकार जतिन ललित एकमात्र ऐसे संगीतकार हैं, जिनके निर्देशन में किसी एक फिल्म के सभी गाने लता मंगेशकर ने गाए हों. जतिन के अमरीका रहने चले जाने की वजह से लगभग पांच साल पहले यह जोड़ी टूट गयी थी. पर इन दिनों एक बार फिर यह जोड़ी चर्चा मे है. इसकी मूल वजह यह है कि इस संगीतकार जोड़ी को एक फरवरी के दिन इंदौर में भारत का अतिप्रसिद्ध अवार्ड ‘मालवा रंगमंच सम्मान’ दिया जा रहा है. इस अवार्ड को ललित पंडित के साथ हासिल करने के लिए अमरीका से जतिन भी आ रहे हैं. जतिन से अलग होने के बाद ललित पंडित ने पहली बार पिछले साल 10 मई 2014, को दिल्ली में छतरपुर के कात्यायनी मंदिर में सुंदरकांड का पाठ आॅक्रेस्ट्रा के साथ किया, जिसे कात्यानी चैनल पर लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था.

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आपकी जोड़ी को एक फरवरी को इंदौर में ‘‘मालवा रंगमंच सम्मान’’से पुरस्कृत किया जा रहा है. इस पर क्या कहेंगे?
-हमारे लिए यह बहुत बड़े गौरव की बात है. अब तक इस अवार्ड से तमाम दिग्गज संगीतकार व गायक सम्मानित किए जा चुके हैं. हम तो ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहेंगे कि वह हमें यह अवार्ड दिला रहे हैं. जब केशव राय ने आकर हमें इस बात की सूचना दी थी, तो पहले हमें यकीन ही नहीं हुआ था.पर जब हाथ में पत्र आया कि हमें यह अर्वाड लेने इंदौर जाना है, तो हम काफी खुश हुए. हमने जतिन से बात की है. वह भी अमरीका से आने वाले हैं.
जतिन के साथ 16 साल तक आपकी जोड़ी रही.अब उनसे अलग होकर जब आप अकेले काम कर रहे हैं तो कैसा लगता है?
-जब हम दोनों एक साथ काम किया करते थे,तब एक अलग माहौल हुआ करता था.एक अलग माहौल में संगीत बनता था.पर अब मैं अकेले काम कर रहा हूं.अच्छा काम कर रहा हूं.अकेले काम करते हुए ज्यादा स्वतंत्रता महसूस करता हूं.जब दो लोग होते हैं तो कहीं न कहीं बंदिश होती है.अलग होने के बाद थोड़ा सा बदलाव महसूस करता हूं.दिमागी तौर पर रिलैक्स हूं. पर मैं बताना चाहूँगा कि हमारे बीच कहीं कोई झगड़ नही है. जतिन को अमरीका जाकर रहना था.  इसलिए यह अलगाव हुआ.
जतिन ललित की मशहूर जोड़ी रही है.इस जोड़ी के टूटने के बाद ललित पंडित ने सुन्दरकाण्ड किया. यानी कि जोड़ी टूटने के बाद धर्म की तरफ मुड़ना?
-धर्म से तो में हमेशा ही जुड़ा रहा हूॅं. यदि आज मुझे मौका मिले, तो मैं आज भी सुंदरकांड को गाना चाहूँगा. हम ब्राम्हण हैं. पंडित है. मेरे पुरखे दादाजी,पिता जी सब धर्मात्मा थे. पुजारी थे. हमारे पिता व चाचा ने तो इस क्षेत्र में बहुत तपस्या की है. मैं भले ही क्लासिकल संगीत के क्षेत्र में कम और कमर्शियल क्षेत्र में ज्यादा काम करता हूं. पर भगवान पर भरोसा करता हूं. दूसरी बाद पिछले वर्ष हमने दिल्ली में जो लाइव आॅक्रेस्ट्रा के सुन्दरकांड का पाठ किया था, वह पहले से तय नहीं था. जब मुझे आफर मिला, तब तक मैं नहीं जानता था कि यह कैसे किया जाता है. पर मैने सोचा कि इसे कुछ अनूठे अंदाज में पेश करते हैं. हमने किया, लोगों को पसंद आया. मुंबई से साठ म्यूजीशियन को लेकर दिल्ली गया था. बड़े स्तर हमने इसे किया था. लोेगों ने काफी पसंद भी किया. मुझे एक सेवा करने का मौका मिला था. मैं कैसे इंकार कर देता.
फिल्मों से अचानक धर्म की तरफ मुड़ना आपको कैसा लगा था?
-बहुत अच्छा लगा. मैंने जब अलग अलग रागों में सुंदरकांड व उसके कुछ मंत्रों को कम्पोज किया. फिर जब यह पाठ तबला, वॉयलिन व गिटार के साथ बजा, तो जो एक मधुर और दिल को भाने वाला वातावरण पैदा हुआ, उसने मुझे भी मंत्रमुग्ध कर दिया. एक बहुत अच्छी लौ लग गयी. वैसे हमने मुंबई में काफी रिहर्सल की थी. उस वक्त भी हम सभी इसमें इस कदर खो जाते थे कि जब यह पाठ पूरा होता था, तो हमें लगता था कि हमें कुछ मिल गया है.

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‘‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’’ को बीस साल पूरे हो गए? इसे पीछे मुड़कर देखते हैं, तो कैसा लगता है?
-इस फिल्म में संगीत देने में हमें उस वक्त बहुत मजा आया था. मेरे लिए उस वक्त लाइफटाइम अवसर था कि सारे गाने लता मंगेशकर गा रही थी. आनंद बख्शी जी के साथ तो मैने काफी काम किया है. मगर लता जी के साथ पहली बार मैं पूरी फिल्म कर रहा था. हमारा ही संगीत ऐसा रहा है, जिसका पूरा अलबम उन्होेने गाया है. अन्यथा वह इस तरह से गाती ही नहीं है. उनका प्यार है. आशिर्वाद है. हमारे अलावा फिल्म से जुड़े हर इंसान ने फिल्म को बेहतर बनाने के  लिए काम किया था. शाहरुख खान और काजोल ने भी बहुत मेहनत की थी. जिसके परिणाम स्वरुप फिल्म को सफलता मिली. लोग बीस साल बाद भी इस फिल्म और इसके गीत व संगीत को याद करते हैं. जब बीस साल पूरे होने पर आयोजित मराठा मंदिर के समारोह में गया, उस वक्त जिस तरह से लोगों ने अपने प्यार का इजहार किया, उससे मैंं अभिभूत हो गया. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जांएगे’ के संगीत को ‘हर समय का नंबर वन संगीत’ के रूप में ‘बीबीसी’ ने भी प्रमाणित किया था. आप उनका प्रमाणपत्र देख सकते हैं. ‘बीबीसी’ ने इसके लिए 40 फिल्मों के संगीत को लेकर वोटिंगं करवायी थी. इन चालिस फिल्मों में ‘गाइड’ जैसी बेहतरीन फिल्मों का समावेश था. पर लोगों ने ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगें’ को वोट दिया था. ऐसा रिकार्ड अब तक किसी फिल्म के साथ नहीं बना. हम इसके लिए खुद को गर्वान्वित महसूस करते हैं.

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हिंदी फिल्मों के संगीत की स्थिति को लेकर आपकी क्या राय है?
-फिल्म इंडस्ट्री में तो जबरदस्त ब्यूम नजर आ रहा है. इन दिनों काफी फिल्में बन रही हैं. नए नए निर्देशक आ रहे हैं और अच्छी फिल्में बना रहे हैं. लेकिन मेरा मानना है कि संगीत के क्षेत्र में बदलाव की जरूरत है. संगीत में मैलोडी की वापसी होनी चाहिए. यहां तक कि पहले जिस तरह के गाने लिखे जाते थे, अब उस तरह के गाने भी नही लिखे जा रहे हैं. अच्छे गीतों की भी कमी नजर आती है. जब कभी कोई अच्छा गाना आता है, तो उसे कम्पोज करने में मजा आता है और वह गाना हिट भी होता है. मेरा मानना है कि हमेशा मैलोडीयस संगीत ही चलता है. देखिए इन दिनों हालात यह है कि अब तो संगीत के अलबम भी नहीं बिकते. लोग फिल्म संगीत और उसकी कॉलर ट्यून वगैरह से पैसे कमा लेते हैं.
पर यह बदलाव का दौर है. हर क्षेत्र में बदलाव आ रहा है. संगीत में भी बदलाव आ रहा है?
-आपकी बात सही है. मगर संगीत में सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि कल तक जो लोग हमारे यहां सिंथाइजर बजाया करते थे यानी कि म्यूजिशियन थे, वह अब संगीतकार हो गए हैं. फिर चाहे सलीम सुलेमान हों या कोई दूसरा नया संगीतकार हो. पहले कम्पोजर हुआ करते थे, जो कि संगीत कम्पोज करते थे. संगीत कम्पोज करना बहुत गंभीर मसला है. मेरी राय में संगीत कम्पोज करना म्यूजीशियन का काम नहीं है. जब से म्यूजीशियन संगीतकार बनने लगे हैं, तब से संगीत में गिरावट आयी है. अब दिल को छू लेने वाला संगीत नहीं बनता.

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इस वक्त बतौर संगीतकार दूसरी कौन कौन सी फिल्में कर रहे हैं?
-प्रणव की ‘‘जेनब’’कर रहा हूँ.संजय छैल की रोमांटिक कॉमेडी  फिल्म फिल्म ‘‘पटेल खन्ना’’ कर रहा हॅूं, जिसमें रिषी कपूर और परेश रावल हैं. इसके अलावा एक प्रेम कहानी प्रधान फिल्म ‘‘मोहब्बत है क्या चीज’’ को भी संगीत से संवारा है, जिसके गीतकार समीर जी हैं. मैंने एक फिल्म में संगीत दिया है, जिसके गाने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने लिखे हैं. इसके अलावा भी कुछ फिल्में कर रहा हूं, लेकिन निर्माताओं ने उन फिल्मों की घोषणा नहीं की है, इसलिए मैं भी कुछ नहीं कहूंगा. पर मैं हर फिल्म में अलग तरह का संगीत दे रहा हूं. इन सभी फिल्मों में रोमांटिक गीत  लोगों को सुनने को मिलेंगे. लोगों को मैलोडी वाले गानों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा.


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Mayapuri

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