हम क्यों ना रहें हम, तुम क्यों ना रहो तुम पूछती है कंगना

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दूध को दूध और पानी को पानी कहने वाली कंगना रनोट की साफगोई कुछ लोगों को बहुत अच्छी लगती है तो कुछ लोग नाक भौं चढ़ाते हैं। जब कंगना से पूछा गया कि क्या आपको नहीं लगता कि कुछ ज्यादा ओपन और निडर राय रखने वालों की पीठ पीछे निंदा होती है? इस पर विदुषी कंगना कहती है, ‘‘यह कितनी दुख की बात है कि यहां सब लोग ‘अच्छा अच्छा’ ही बने रहना पसंद करते हैं चाहे दिल में उनके कुछ और हो लेकिन इसके लिए हमारे अपने लोग ही कुसूरवार हैं क्योंकि यहां खुलकर बोलना या सुनना किसी को पसंद नहीं आता है। अगर आप कड़वा सच जाहिर कर दो तो आप बुरे लोगों की श्रेणी में आ जाते हो, अगर खूब झूठा मीठा मीठा बोलो तो ‘अच्छे’ की श्रेणी में आ जाते हो, यहां रीयल इंसान बहुत कम दिखते हैं। हम अगर वो बनकर रहना चाहे जो हम हैं तो वह बहुत मुश्किल क्यों होता है?’’ सच कहा क्वीन साहिबा आपने, इस प्रश्न का जवाब तो किसी के पास भी नहीं।


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Mayapuri

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