कहानी एक हीरो खलनायक की जिसे अजीत कहते हैं

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Ajit-In-Kalicharan-Movie

 

मायापुरी अंक 15.1974

आज से तीस साल पहले हैदराबाद से एक नौजवान हीरो बनने के लिए मुम्बई आया। पास में पैसे कम थे इसलिए क्राफर्ड मार्केट के पास किसी धर्मशाला में पांच रुपये दैनिक पर इतनी जगह मिल गई जहां कि ट्रंक मिल गई जहां कि ट्रंक रखा जा सकता था। यह और बात है कि उस ट्रंक पर सोने वाले से सोने के पैसे नही लिए जाते थे। दिन भर वह स्टूडियो के चक्कर लगाया करता लगाय करता और रात की ट्रंक पर आकर सो जाता। उस कमरे के पास ही गुंडे रात को जुआ खेला करते थे। और लोगों की नींद में खलल डालते थे, नौजवान की भी कई बार नींद खराब हुई थी। किन्तु उसे तो हीरो बनना था। इसलिए वह उनके मुंह नही लगता था।

एक रात, दिन भर का थका हारा नौजवान घोड़े बेचकर सो रहा था। यकायक शोर मचा और उसकी नींद टूट गई। देखा तो कमरे में भूचाल आया हुआ है। पुलिस ने जुआरियों को पकड़ने के लिए रात को छापा मारा था। जुआरी अपनी जान बचाने के लिए कमरे मे घुस आये थे। पुलिस कमरे में घुसकर जुआरियों को पकड़ रही थी। पुलिस वहां से सबको पकड़ कर प्रिंसेस स्ट्रीट के थाने में ले गई। सबको अन्दर बन्द कर दिया। और इन बन्द होने वालों में वह नौजवान भी था।

यह घटना शनिवार की रात को पेश आई थी। अगले दिन रविवार था इसलिए पेशी सोमवार से पहले नही होनी थी। इसका अर्थ यह था कि एक ऐसे अपराध में जो कि उसने किया भी नही, दो रातें जेल में काटनी पड़ेगी। यह ख्याल आते ही नौजवान बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोने लगा। नौजवान की हालत देखकर ड्यूटी पर मौजूद इंस्पैक्टर उसके पास आया और रोने का कारण पूछने लगा। नौजवान ने उसी तरह रोते हुए कहा, मैं निर्दोष हूं। मुझें रिहा कर दीजिए इंस्पैक्टर को नौजवान की बात में कुछ सत्य की झलक नजर आई। वह बोला, अगर तुम बेकसूरों की शिनाख्त करके अपराधियों को वही छोड़ दो तो तुम्हारे साथ दूसरे बेगुनाहों को भी छोड़ दूंगा।

नौजवान ने इंस्पैक्टर की शर्ते मान ली और दरिया में रहते हुए मगरमच्छ से बैर मोल ले लिया। परन्तु उसे वहां रिहाई मिल गई। सोमवार को नौजवान अपना भाग्य आजमाकर वापस आया तो देखा एक भयानक किस्म का दादा रामपुरी चाकू खोले उसका रास्ता रोके खड़ा है, बोल तूने उस दिन थाने में बेकसूरों के साथ मुझे क्यों नही निकलवाया? अब तुझे उसकी कीमत अपनी जान से देनी पड़ेगी।

नौजवान इतना सुनकर डर के मारे कांपने लगा। फिर न मालूम कहां से उसमें साहस आ गया कि दादा के चाकू के वार से बच कर सीधा पुलिस स्टेशन भागा चला गया। इंस्पैक्टर ने नौजवान की कहानी सुनी और तुरन्त जीप निकाल कर उस दादा की तलाश में निकल गया।

पुलिस ने दादा को गिरफ्तार करने के पश्चात बुरी तरह पिटाई की। उस दिन के बाद से दादा सीधा हो गया। उस नौजवान की धाक बैठ गई। आज वह नौजवान फिल्मों का दादा और गेन्गस्टा बॉस जैसी खलनायक की भूमिकाएं निभा रहा है हालांकि उस वक्त वह हीरो बनने आया था। और हीरो बना भी। लेकिन समय के साथ समझौता करके वह नायक से खलनायक बन गया और अपने टाईम में जितनी कीमत लेता था, उसके पांच गुना आज ले रहा है। उस नौजवान को आज आप अजीत के नाम से पहचानते है।


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Mayapuri

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