कल की गुड़िया आज की नीतू सिंह

1 min


neetu-singh-photos

 

मायापुरी अंक 16.1975

1,2,3,4,5,6,….12,13,14,15,16…हे भगवान!

आप गलत समझ रहे है। यह गिनती नर्सरी की लड़की की नही। नीतू सिंह की मम्मी कर रही थी। एक दिन वह नीतू सिंह की फिल्में गिनने बैठी तो पूरी 13 हो गई। अब इतनी फिल्मों के लिए ‘डेट’ अरेंज करना मुशिकल नीतू सिंह की मम्मी ने बड़ी बुद्धिमानी से नीतू सिंह की फिल्में कम करनी शुरू की और नीतू को तमाम बी और सी क्लास की फिल्मों से छुट्टी दिला दी। और जब नीतू सिंह के पास बड़े बैनर की केवल बीस फिल्में रह गई तो नीतू की मम्मी ने चैन की सांस ली!

अब आप सोच रहे होगें कि यह लेख नीतू पर है या नीतू की मम्मी पर वास्तव में नीतू की सफलता की कहानी उनकी मम्मी की सफलता की कहानी है। नीतू को नीतू बनाने के पीछे उनकी मम्मी की व्यवहार कुशलता का इतना हाथ है कि बिना उनकी मम्मी का जिक्र किए नीतू की चर्चा नही की जा सकती।

पन्द्रह वर्ष पहले नीतू की मम्मी स्वंय अभिनेत्री बनने के चक्कर में बम्बई आई थी। कई वर्ष तक कोशिश करने के बाद भी उनके लिए भाग्य का दरवाजा न खुला तो उसका ध्यान अपनी बच्ची बेबी सोनिया की ओर गया। अब तक श्रीमती राजी सिंह की फिल्मी जगत में थोड़ी बहुत जान पहचान हो चुकी थी। इस जान पहचान के बल पर बेबी सोनिया को ‘दो कलियां में काम मिल गया। ‘दो कलियां से लेकर ‘घर-घर की कहानी’ तक बेबी सोनिया ने आठ फिल्मों मे काम किया। तभी आठ वर्ष की बेबी सोनिया को लेकर श्रीमती राजी सिंह बम्बई की फिल्मी दुनिया से यूं अदृश्य हो गई जैसे अलादीन के चिराग का जिन्न

श्रीमती राजी सिंह अच्छी तरह जानती थी कि फिल्मों में दस-बारह वर्ष के बच्चे के लिए कोई विशेष काम नही होता। उनके सामने डेजी ईरानी का उदाहरण था जो चौदह वर्ष तक फिल्म में बच्चों का रोल करती रहीं। और फिर वह एकाएक ही बच्चे से ‘युवती’ बन गई तो निर्माताओं ने उन्हें इस भय से अपनी फिल्मों में नही लिया कि पब्लिक डेजी ईरानी को हीरोइन के रूप में स्वीकार नही करेगी। डेजी ईरानी ने लाखो पापड़ बेले मगर फिल्म इंडस्ट्री ने उसे यूं बाहर निकाल फेंका जैसे दूध में से मक्खी

ऐसे अनेक कटु उदाहरण श्रीमती राजी सिंह के सामने थे। वह बुद्धिमती स्त्री हैं और अपनी गलतियों से ही नही, दूसरों की गलतियों से भी सबक लेती है। ईश्वर ही जानता है, सोनिया की मम्मी ने पांच-छह वर्ष तक उसे कहां रखा, क्या पढ़ाया-लिखाया, मगर जब श्रीमती राजी सिंह दुबारा फिल्मी दुनियां में नजर आई तो उसके साथ बेबी सोनिया नही चौदह वर्षीय नीतू सिंह थी। नीतू सिंह का चेहरा एकदम भोला-भाला था और इसके साथ-साथ प्रकृति ने उसे बनाते समय बड़ी उदारता से काम लिया था। वह पूरी तरह से फिल्मी हीरोइन बनने के लिए तैयार थी। अब श्रीमती राजी सिंह की राज कपूर से जान पहचान बढ़ने लगी और उसने नीतू सिंह के लिए ‘बाबी’ का रोल लगभग हथिया ही लिया था अगर ऐन वक्त पर डिम्पल बीच न कूद पड़ती मगर श्रीमती राजी सिंह ने हिम्मत न हारी। उसे नीतू सिंह की शारीरिक बनावट पर पूरा भरोसा था। अब परेशानी सिर्फ इतनी थी कि ‘आंख के अंधे, गांठ के पूरे’ निर्माताओं को यह सब दिखाया कैसे जाये? इस काम के लिए एक फोटोग्राफर नियुक्त किया गया। उस फोटोग्राफर ने नीतू सिंह के ऐसे पोज खींचे कि कोई भी एक जोड़ी आंखों का स्वमी साफ-साफ देख सकता था कि नीतू सिंह के पास क्या है, क्या नही? जैसे ही पत्रिकाओं में ये फोटो छपे, फिल्म-जगत में हलचल मच गई। निर्माता लाइन लगा कर नीतू सिंह के घर की ओर दौड़े नीतू सिंह का भाव क्या था? आप विश्वास नही करेगें एक फिल्म के लिए पांच हजार रुपया और नीतू सिंह के अपने शब्दों में ही, उन दिनों पांच हजार रुपये पर फिल्म साइन करना भी यूं लगता था मानो स्वर्ग का राज्य ही मिल गया हो कोई और स्त्री होती तो शायद वह अपनी बेटी के लिए अच्छी फिल्मों का इंतजार करती मगर नीतू सिंह की मम्मी ने जो कुछ भी मिला, उसे ही साइन कर लिया। उसे मालूम था कि सिम्मी अच्छी फिल्में मिलने के लिए इंतजार करती रही और बेचारी जीवन भर इंतजार ही करती रह गई। हम पहले ही बता चके है कि श्रीमती राजी सिंह दूसरों की गलतियों से सबक लेती है।

बाद में नीतू सिंह की मम्मी ने बड़ी सभ्यता से बी औ सी क्लास फिल्मों को छत्ता बता दी और नीतू सिंह के पास केवल बड़ी-बड़ी फिल्में रह गई। इसका परिणाम यह हुआ कि इस समय नीतू सिंह शशि कपूर, रणधीर कपूर, चिंटू, धर्मेन्द्र और राजेश खन्ना जैसे हीरो के साथ काम कर रही है।

इस जुलाई में नीतू सत्रह वर्ष की हो गई है हालांकि उसकी आयु पर विश्वास करना सहज नही है मगर वह कहते है न,खुदा जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है इस जन्म दिवस पर राजेश खन्ना ने नीतू सिंह से कहा मैं तुम्हें क्या उपहार दूं कुछ समझ में नही आता और काका ने नीतू सिंह को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया। ड्रामेबाज काका उसने बहुत पहले से सोच रखा था कि फिल्म में नीतू सिंह को साइन करना है, मगर यह रोल उसे जन्म दिन का उपहार के रूप मे दिया और सचमुच ही इस उपहार को पाकर नीतू सिंह की खुशी का ठिकाना न रहा मजेदार बात यह है कि अभी तक नीतू सिंह कुल तीन फिल्में रिलीज हुई है और तीनों में से कोई भी ऐसी नही है जिसने नीतू सिंह को प्रसिद्धि दिलाई हो। इसके बावजूद नीतू सिंह की मागं बनी हुई है।

नीतू सिंह की पहली फिल्म थी ‘रिक्शा वाला’ फिल्म इस कदर पिटी कि बेचारे निर्माता का पूरी तरह कल्याण हो गया। इस पर पूरी फिल्म पर रणधीर कपूर छाया हुआ था जो यूं भी भारी भरकम शरीर के कारण आधी से अधिक स्क्रीन घेर लेता है। नीतू सिंह की तरफ किसी ने गौर नही किया।

नीतू की दूसरी फिल्म ‘हवश’ बिन्दु की फिल्म बन कर रह गई। बिन्दु के सौन्दर्य की चका-चौंध के सामने नीतू बेचारी फीकी पड़ गई। हालांकि फिल्म में उसने मिनी स्कर्ट पहनी थी। इसके पश्चात यादों की बारात आई। जिस में नीतू ने गेस्ट रोल किया था। फिल्म सफल रही। मगर उसका सारा श्रेय जीनत अमान मार ले गई।

क्या इस समय भी नीतू ऐसी ही फिल्मों में काम कर रही है जिनम उसे केवल अपना शरीर-प्रदर्शन करना है। इसके उत्तर में नीतू सिंह कहती है हमारी फिल्में नायक-प्रधान होती है। उसमें हीरोइन के लिए कोई विशेष रोल नही होता। फिर भी मैं ‘निकम्मा’‘ढोंगी’ और ‘खेल-खेल में’ में चैलेंज रोल कर रही हूं।

नीतू सिंह फिरोज खान के साथ ‘चिनौती’ में काम रही है। इस फिल्म में नीतू को ‘ढिशुंग-ढिशुंग से लेकर घुड़सवारी तक की कसरत करनी पड़ी है। ‘खेल-खेल में और ‘कभी-कभी’ में वह ऋषि कपूर के साथ काम कर रही है। ‘कभी-कभी’ के बारे में नीतू सिंह का कहना है कि यह फिल्म उसे आसमान तक उछाल देगी।

आजकल ऋषि कपूर और नीतू सिंह में गहरी छन रही है। एक समय था जब नीतू की मम्मी नीतू पर इतनी बड़ी नजर रखती थी कि पत्रकारों तक को टोक देती थी कृपया नीतू से ऐसे प्रश्न न पूछें ? तब यदि कोई कलाकार नीतू के अधिक निकट आने की कोशिश करता था तो मम्मी जी नीतू के अंकल को भेज कर दोनों को अलग-अलग करवा देती थी। इस पर एक हीरो ने चिढ़ कर कहा भी था “नीतू की मां एक पैंटन टैंक है। इस पैंटन टैंक के होते किसमें हिम्मत है जो नीतू की ओर निगाह भी उठा सके।

मगर अब नीतू ने स्वंय पर निकालने आरम्भ कर दिये है। पिछले दिनों एक पार्टी में नीतू और ऋषि कपूर एक अंधेरे कोने की ओर बढ़ गये। जब उनकी हरकतें खतरनाक सीमा तक बढ़ गई तो मम्मी राजी सिंह ने नीतू को आवाजें देनी शुरू कर दी और बड़ी कठिनाई से अपनी बेटी का बचाव किया।

यह सही है कि नीतू सिंह के हाथ में इस समय बीस फिल्में है। यह भी सही है कि वह आज चाहें तो बीस फिल्में और साइन कर सकती है, मगर इस सबके साथ यह भी उतना ही सही है कि नीतू अभी सितारा नही बनी। और यदि अभी से उसने अपने अभिनय पर ध्यान न दिया तो जो निर्माता आज उसके घर के आगे लाइन लगाए हुए है। कल को चिराग लेकर ढूंढने पर भी दिखाई न देगें।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये