INTERVIEW!! ‘‘मुझे वहां हर बार उतना ही प्यार मिला जितना यहां अपने देश में मिलता है’’ – मीका सिंह

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आजकल के सफल गायकों में मीका सिंह का नाम भी शामिल है। इसे उनकी लाकप्रियता ही कहा जायेगा कि वे आज टीवी पर जहां कलर्स पर कॉमेडी लाइव में सिद्धू की जगह लिये हुये हैं वहीं दूसरे बिग शो ‘सारेगामापा’ में भी जज की कुर्सी संभाले हुये हैं। ये शो जल्दी ही ऑन एयर होने जा रहा है। मीका से इस शो के अलावा कुछ अन्य सवालों को लेकर एक मुलाकात।

अगर फोग की बात की जाये तो सिर्फ मीका सिंह का नाम ही सामने आता है ?

ऐसी बात नहीं हैं मैने हाल ही में राहत फतेह अली के साथ गाया है इसके अलावा दो साल पहले पहले मैंने हनी सिंह के साथ दमादम मस्त… गाया और कंपोज किया था उसमें उसका रैप वैगरह सभी कुछ सूफी था क्योंकि वो एक सूफी गीत था। लिहाजा मेरी यही कोशिश रहती है कि किस तरह फोग और सूफी को आगे ले जाया जाये आज के म्यूजिक के साथ। मेरी इच्छा यही रहती है कि मैं कैसे अपने फैन्स को खुश रख सकूं।

आजकल एक्टर्स में गाने का फैशन सा हो गया है ?

देखिये म्यूजिक वर्ल्ड बहुत विशाल है यहां सब के लिये जगह है। हिन्दुस्तान के सबसे बड़े सिंगर हैं दलेर सिंह पाजी, फोग पर उनके जैसी कमांड किसी के पास नहीं। इसके अलावा अगर आप यूट्यूब पर जाओ तो सबसे ज्यादा लाइक्स और व्यूज आपको म्यूजिक पर ही मिलेंगे। तो आज गाने एक्टर्स ही नहीं बल्कि हर कोई गुनगुना रहा है।

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एक्टर्स के गाने से क्या सिंगर्स पर असर नहीं पड़ रहा है ?

बिल्कुल नहीं। आज अमित त्रिवेदी, बादशाह और अरिजीत सिंह जैसे गायक कितना गा रहे हैं सभी को पता है। कई एक्टर्स बहुत अच्छा गाते हैं लेकिन यह आपको भी पता हैं कि गाना उनका शौक हैं पेशा नहीं।

एक अरसे बाद सारेगामापा की वापसी हो रही है। इसमें क्या कुछ नया और बदला हुआ मिलेगा ?

एक तो शो में मैं नया हूं। दूसरे सारेगामापा हिन्दुस्तान का ही नहीं बल्कि वर्ल्ड का पहला सिंगिंग शो है। अगर मैं इस शो में हूं या नहीं हूं इससे शो को कोई फर्क नहीं पड़ता। इस बार शो के प्रतियोगी इतना अच्छा गा रहे हैं कि मेरे अलावा अन्य जजिज की बोलती बंद की हुई है। जंहा तक नये फार्मेट की बात की जाये तो इस बार हम जज नहीं बल्कि मेंटर्स हैं। हमारा काम है उन प्रतियोगियों को बता सके या सिखा सके, जो दूर दराज के गांव खेड़ों से आये हैं जिन्हें खड़ा होना तक नहीं आता। हम उन्हें ज्यादा से ज्यादा हर विधा में ट्रेंड करेंगे।

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किस तरह के गीत गाते हुये बड़े हुये हैं ?

आर डी बर्मन साहब मेरे एक तरह से गुरू रहे हैं रफी साहब और किशोर दा मेरे फैवरेट सिंगर रहे हैं। आप अगर ध्यान से देखेगें कि अगर रफी साहब गीत गा रहे हैं आज मौसम बेइमान है। उसे आप आंख बंद कर सुनेंगे तो आपको लगेगा कि वाकई मौसम बरसात का है। इसके अलावा गुलाम अली साहब का चुपके चुपके का कोई वीडियो नहीं बना लेकिन अगर आप उसे सुने तो आपको गाने में जो कहा गया हैं वही फीलिंग आयेगी। अगर आप मेरा गाना मौंज्जा ही मौंज्जा सुनेंगे तो आपको डांस की फीलिंग आयेगी  यानि वो तकनीक मैं अपना रहा हूं।

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आज जो गुलाम अली या अन्य पाकिस्तानी आर्टिस्टों का यहां विरोध किया जाता है, उस पर आपका क्या कहना है ?

देखिये मेरा मानना है कि संगीत या कलाकार किसी एक का नहीं होता। उसे इन चीजों से अलग ही रखा जाये तो बेहतर होगा। मैं जब सबसे पहले 1997 में पाकिस्तान गया था, उस वक्त मैं कुछ भी नहीं था। मैने बस वहां यही कहा कि मैं दिल्ली से आया हूं। उसके बाद वहां कुछ लोगों ने मुझे कपड़े और न जाने क्या क्या उपहार दिये। उसके बाद तो मैं अकेला ऐसा सिंगर हूं जो वहां सबसे ज्यादा बार गया है और आज भी जाता हूं। मुझं वहां हर बार उतना ही प्यार मिला जितना यहां मझे मिलता है ।

 


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Mayapuri

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