INTERVIEW!! “मैं मैरिज मटेरियल नही हूँ भाई मेरे अंदर चस्का, ग्लैमर और फैशन सब एक साथ बसते हैं” – सुखविंदर

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लिपिका वर्मा 

गायक सुखविन्दर सिंह आज बॉलीवुड म्यूजिकल क्षेत्र की ना केवल एक जानी -मानी हस्ती हैं बल्कि अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं – हाल ही में उन्हें एक एलबम सांग के लिए ढ़ेर सारी सराहना मिली थी किन्तु उनका मानना है कि रंगीन जीवन और एंटरटेनिंग गानों से सब का दिल जीता जा सकता है सो वह हर तरह के गीत गाते है जिनसे उनके सुनने वालों को कुछ पल के लिए ही सही लेकिन ख़ुशी मिल जाये।

सुखविंदर का बचपन कैसा होगा ?

मुझे शायद लोरी किसी ने नहीं सुनाई होगी बचपन में। शायद इसलिए आज भी जब तक मैं, “चन्दामामा” की कहानी ना सुन लूँ और मेरे सर पर जब तक कोई अपना हाथ ना फेरे मुझे नींद ही नहीं आती है। आपको यह जान कर ताज्जुब होगा कि मेरे पास बाकायदा एक ऐसा बंदा अपाइंट किया गया है भारत में और बाहर मुल्क में जब भी में जहाँ होता हूँ तो मुझे यह लोग परियों की और चन्दामामा की कहानियाँ एवं लोरी सुना कर सुलाते हैं। हर रात मैं लताजी और आशा जी के गाने भी जरूर सुनता हूँ, तब जाकर मुझे अच्छी नींद आती है।

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अपने बचपन से जुड़ी थोड़ी बहुत बातें हमारे साथ शेयर करना चाहेंगे ?

मैं जब केवल 12 वर्ष का ही था तब से मैं जर्मन, इंग्लिश एवं रशियन ओपेरा सुनकर ही बड़ा हुआ हूँ। हॉलीवुड से यह टेक्निक भारतवर्ष में आई है किन्तु आजकल म्यूजिक में इस का प्रयोग कम्पोज़र्स और गायक बनने हेतु बहुत किया जाता है। यही दुःख की बात है। दरअसल “हैदर” फिल्म और अब “रंगून” में भी जो गाना मैंने गाया है वह ओपेरा से ही प्रेरित हुआ है। मेरे लिए म्यूजिक और लाइफ दोनों जुनून और स्टाइल का मिश्रण है।

सुखी ने म्यूजिक एवं गायन कब, कितनी उम्र से शुरू किया ?

हंस कर बोले – आपको ताज्जुब होगा मेरी अध्यापिका को मैंने पहली बारी, “यशोदा मईया से पूछे नंदलाला” गाना सुनाया था। ज्यों ही मैंने गाना खत्म किया तो मेरी टीचर ने मेरे गाल को चूम लिया। उसके चुंबन से मेरे सारे शरीर में एक झुनझुनाहट फैल गयी। तब मैं केवल ६/७ वर्ष का ही था। बस फिर क्या था गाना और ग्लैमर दोनों ही मेरे साथ जुड़ गए। मेरे पास स्टाइल और ग्लैमर हो तो मेरा जुनून अपनी गति बहुत तेजी से पकड़ता है। एक बारी मैंने अपनी टीचर से बहुत बड़ी चीटिंग की मैंने गाना खत्म होने के बाद उसके होंठो को चुम लिया, बस वह मेरा आखिरी दिन था। उस दिन से टीचर ने मुझ से गाना सुनना बंद ही कर दिया। किन्तु उस दिन से मुझे म्यूजिक और गाने की लत लग गयी और खुश हूँ कि आज मैं यहाँ बॉलीवुड में अपने म्यूजिक से लोगों को खुश कर पाता हूँ।

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आप ने शादी क्यों नहीं की अब तक?

देखिये सीधी सी बात है – मैं कभी भी उठ कर गाने का रियाज़ करने लगता हूँ और कई मर्तबा तो मैं बिल्कुल एकांत में रहना पसंद करता हूँ। दरअसल मैं मैरिज मटेरियल नही हूँ भाई। मेरे अंदर चस्का, ग्लैमर और फैशन सब एक साथ बसते हैं तो मुझे हर चीज़ में ग्लैमर का तड़का लगाना पसंद है। आप को मैं बता दूँ जब भी मैं स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करने जाता हूँ तो मेरे चारों तरफ यदि रोमांटिक गाना हो तो फूलों के गुलदस्ते सजे होने चाहिए और यह मैं अपने खर्चे पर ही करवाता हूँ। ऐसा करने पर मुझे बहुत अच्छा फील होता है और लाइट्स भी अंदर की बंद होनी चाहिए। स्टूडियो में ही मुझे स्टेज का फील मिलना चाहिए तो खुशगवार सा मौसम महसूस होता है और मैं अपना बेस्ट दे पाता हूँ। इसके साथ साथ मुझे हेल्दी फ्लर्टिंग भी पसंद है यदि कोई लड़की अपना दस पर्सेंट दे तो मैं उसे पूरा 100 परसेंट देने को तैयार हो जाता हूँ” हंस कर सुखी बोले

ए. आर. रहमान की तारीफ में सुखी ने कहा, “मुझे बहुत ख़ुशी है कि, ” जय हो” उन्होंने बहुत अच्छी तरह से प्रेजेन्ट किया। यह एक गाना मैंने बचपन से संजोय रखा था। मुझे इस बात का खेद है कि मैं ऑसकर मिलने पर वहां परफॉर्म नहीं कर पाया पर इस बात की ख़ुशी है कि रहमान ने हॉलीवुड में अपने झंडे बखूबी गाड़े हैं। यदि रहमान ने मुझे यह सुनहरा मौका नहीं दिया होता तो मैं आज कुछ भी नहीं होता”

कुछ रुक कर रहमान की ख्वाहिश जाहिर करते हुए सुखी ने हमें बताया रहमान हमेशा से ही मुझे कहते हैं, “आई वांट टू सी सुखी जूनियर सून!”

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आज म्यूजिक टेक्निकली एडवांस हो गया है इस बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

सच्चाई तो यह है कि हमारी इन्डस्ट्री में गिने चुने 6/7 बेहतरीन सिंगर्स ही है। आजकल इस तकनीकी की वजह से कम्पोज़र्स भी गाने लगे है, जबकि वह बहुत अच्छे कम्पोज़र्स हैं किन्त अपने गाने के हिसाब से म्यूजिक में उतार चढ़ाव लाते हैं इस तकनीकी हेतु हमारा गाने का स्तर गिर रहा है। मेरा उनको सुझाव है कि वह किसी बेहतरीन सिंगर से अपनी कम्पोजीशन गवाएं और फिर देखें उनके गाने सब हिट हो जायेंगे। भला मेरे से ना गवाएं। मैं नहीं चाहता कि उनका समय निकल जाये और फिर वह कुछ ना कर पायें। मेरी दिली ख्वाहिश है कि उनका कम्पोजीशन  सब को नजर आये। आजकल इस तकनीक की वजह से स्टेज पर भी ऑनलाइन एडिटिंग का चलन हो चला है। हमारे देश में टैलेंट की कमी नहीं है बस उसे सही दिशा मिलनी चाहिए मेरे हिसाब से अचीवर्स कुछ गिने चुने ही हैं। बाकी सब भीड़ है किन्तु उस भीड़ में भक्त भी हैं जिनको ईश्वर ने सुर से नवाज़ा है। बाकी तो सब तकनीक के बल बुते पर जमे हुए हैं।

टेलीविजन शो के जज बनना पसंद करेंगे सुखविंदर ?

मुझे टेलीविजन पर जज से ज्यादा मेंटर बनना पसंद होगा क्योंकि मुझे मालूम है कि हमारे देश में ढ़ेर सारा टैलेंट हैं और उन्हें मेंटर्स सही दिशा दे सकते हैं।

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फिल्म, रसुल्तान, सबरजीत और रंगून में आपके गाने नजर आने वाले है, आप एक्टर को जेहन में रख कर गाते  है क्या?

जी नहीं, मैं करैक्टर को जहन में रख कर गाता हूँ। सीधी सी बात है ‘सुल्तान’ में सलमान भी करैक्टर में नजर आयेंगे तो उन्हें क्यूं जहन में रखूँ। मेरे म्यूजिक डायरेक्टर के सुझाव के साथ मैं गाना गता हूँ ताकि में अपने गाने में जो उन्हें चाहिए वो दे पाऊं। सरबजीत में भी मैंने सुझाव दिया कि यह ग्रे करैक्टर जरूर है लेकिन सरहद के इस पार जब वह रहा होगा तो उसकी ज़िंदगी ग्लैमरस भी होगी सो मैंने एक बहुत ही बढ़िया गाना लिखा है जो जल्द ही हम रिकॉर्ड करने वाले हैं। मुझे अपने लोगों को एंटरटेन करना है इसलिए मुझे ग्लैमर का तड़का पसंद है। वैसे भी हमारी फिल्मों में भले ही दो लाइन की कहानी हो दोस्त, प्यार और रिश्तों की कहानी हो उस में उतार-चढ़ाव   तो दिखलाते हैं हम ३ घंटे तक एंटरटेनमेंट का तड़का लगा कर। ”

 

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Mayapuri