ओम पूरी-एक चाय वाला (जैसे हमारे प्रधानमंत्री) से ओ बी ई, जिसे इंग्लैड की महारानी ने भेट किया।

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बहुत कम लोगो का इतना अच्छा भाग्य होता है कि वे कठिन रास्तों से गुजरकर सफलता की ऊंचाई ले, अचंमित करने वाली सफलता पाने के लिए बहुत बड़ी-बड़ी कीमतें चुकानी पड़ती है और हर सफलता के साथ संभवतः जीवन अपना वसूली मांगता है उन लोगों को ऐसी सफलता मिल जाती है। जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, अगर ओम पुरी की कहानी ली जाये तो हम यह देखेंगे कि वे उस ऊंचाई के कलाकार है जिन्हे बतौर बेहतरीन एक्टर सिर्फ भारत में ही नहीं सराहा जाता है बल्कि ग्रेट ब्रिटेन तथा हाॅलिवुड में भी उन्हे दिलचस्प कलाकार का दर्जा हासिल है उनकी प्रतिभा ने उन्हे हर तरह के अवार्ड दिलाए है राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय स्तर पर। वह लड़का जिसका चेहरा चेचक के दागों से भरा था, जिसे एक्टर बनने की कोई आशा नही थी, उसने हार मानने से इंकार करते हुए अभिनय जगत में बने रहने के लिए क्या-क्या काम न किया, कभी चाय की दुकान में हेल्पर बना कभी सड़क किनारे ढाबे में काम किया। किसी तरह से नई दिल्ली आकर उन्होंने नैशनल स्कूल आॅफ ड्रामा ज्वाइन कर लिया।

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जहां उनकी दोस्ती चन्द बेहतरीन एक्टर्स से हुई जो जीवन भर रही। ओम जिसे यह उम्मीद नहीं थी कि उसे बतौर अभिनेता स्वीकार किया जायगा, उसे अपना पहला ब्रेक मिला एक मराठी नाटक धासीराम कोतवाल में जो विवादास्पद लेखक विजय तेडुंलकर द्वारा लिखित था वह एक भूमिका उन आने वाले सैकंड़ो कैरेक्टर्स की चहेती बन गई जो उन्होंने आगे चलकर हिन्दी फिल्मों, पंजाबी फिल्मों, टी.वी. थियटर में किया। ओम फिर भारतीय फिल्मों का एक महत्वपूर्ण बड़ा एक्टर बन गया और जब ओम के बतौर एक्टर की बात करता हूं तो उनके बेहतरीन परफार्मेन्स जो उन्होंने कई फिल्मों में किये थे वह याद आ जाते है जैसे आक्रोश, गांधी, चन परदेसी, अर्ध सत्य, जाने भी दो यारों, मिर्च मसाला, घायल, नरसिम्हा, माया मेमसाहब , सिटी आॅफ जाॅय, द्रोहकाल माचिस, माईन सन द फनाटिक, चाची 420 सच ए लाॅग जर्नी, ईस्ट इज ईस्ट, बाॅलीवुड कलाम, देव, रंग दे बसन्ती, चार्ली, विलसन्स बार, बेस्ट इज बेस्ट, अग्निपथ, द रिलक्टेन्ट फडामेन्टालिस्ट। उनके माद्दा के एक्टर का लिस्ट तो अन्तहीन हो सकता है क्योंकि वे उस तरह के कलाकार है जो साधारण फिल्मो में भी असाधारण अभिनय कर गुजरते है।

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उन्हें कई ढेर सारे अवार्डस प्राप्त हुए है लेकिन वो सब से महत्वपूर्ण जो दो एवार्ड उनके दिल के करीब है वह है पदमश्री अवार्ड जो भारत सरकार से प्राप्त हुआ तथा ओ बी ई आॅनर जो इन्हें क्वीन एलिजाबेथ से ब्रिटेन में सिनेमा जगत को दिये उनके अनोखे योगदान के कारण प्राप्त हुआ। यह ओ बी ई आॅनर उस सीधे सादे व्यक्ति को प्राप्त हुआ जो किसी जमाने में एक पंक्ति अग्रेजी नही बोल पाता था ओम के दिन बड़े अच्छे जा रहे थे। उनके कुछ रोमांटिक किस्से भी दोस्तों, उनके शुभ चिन्तको यहां तक उनके विराधियों द्वारा कहे सुने जा रहे थे फिल्म ‘सिटी आॅफ जाॅय’ की कोलकता में शूटिंग के दौरान एक युवा पत्रकार ने उनका इंटरव्यू लिया जिनका नाम था नंदिता। ओम को वह युवती दिलचस्प लगी और वे मिलने लगे आखिर दोनों को अहसास हुआ कि वे एक दूसरे से प्यार करने लगे है, हालाकि वह लड़की ओम से बहुत छोटी थी। दोनों ने शादी कर ली और फिर दुनिया के कई खूबसूरत देशो में हनीमून मनाते रहे, दोनों एक बड़े से फ्लैट में रहने लगे और उनका एक बेटा भी हुआ जिसका नाम रखा गया ‘इशान’ जो ओम और नन्दिता के बीच मजबूत कड़ी बन गया।

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सब कुछ स्वरिनल चल रहा था कि एक दिन अचानक नन्दिता के अन्दर की पत्रकारिता ने अंगडाई ली और उन्होनें भारत और हाॅलिवुड में सुप्रसिद्ध हो चुके अपने पति ओम पुरी पर एक किताब लिखने का निश्चय किया। ओम ने न सिर्फ उन्हे उस किताब के लिए परमिशन दिया बल्कि अपने जीवन की पूरी कहानी बताई, शो तक आकर उन्होंने नंदिता को अपने जीवन के कुछ गहरे राज भी बताये जिसमें समाज के विभिन्न वर्गो की महिलाओं के साथ अपने प्रेम संबंधों की बातें भी बता डाली जो छापने के लिए नहीं थी। लेकिन उन्हें पता नही था कि नंदिता के अंदर का लेखक तथा पत्रकार उसकी बताई हर छापने योग्य ना छापने योग्य कहानियों को उनकी बायोग्राफी में छाप ही देगी और एक भी कहानी को छोडेगी नही। उन दिनों ओम इतने व्यस्त थे कि उन्हे यह पढ़ने की फुर्सत नही थी कि नंदिता ने बाॅयोग्राफी में क्या क्या लिखा है और वह किताब ‘द अनयुजुएल हीरो’ के नाम से प्रिन्ट हो गई।

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जब उस किताब के विमोचन का दिन , जगह, सब तय हो गया और अमिताभ बच्चन के हाथों उस किताब के विमोचन की बात हो गई तक यूं ही ओम ने वह किताब पढ़ ली और उन्हें यह देखकर सदमा लगा कि नंदिता ने उनके कई स्त्रियों से हुये अफेअर के बारे में भी छाप दिया जिसमें एक घर की नौकरानी से हुए संबंध का भी जिक्र था ओम गुस्से और हैरानी से भर गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, कुछ भी बदला नही जा सकता था ना ही फंक्शन टाला जा सकता था उसी शाम बुक को अमिताभ जी के हाथो रिलीज होना था, फिल्म इंडस्ट्री के हर गणमान्य हस्ती उपस्थित हो चुके थे, नंदिता उत्साह से भरी थी अमिताभ तथा कई और हस्तियों ने उस फंक्शन के दौरान ओम के अभिनय कैरियर, उनके जीवन, उनके फैमिली, पत्नी नंदिता बेटे इशान के बारे में बहुत उम्दा बोला और जब ओम के बोलने की बारी आई तो वो, जो हमेशा शान से बोलता था वह ठीक से बोल नहीं पा रहा था उन्हे शब्द नही मिल पा रहे थे आखिर वे टूट कर सुबक पड़े सारे, मेहमानों के सामने जिसमें अमिताभ बच्चन भी थे।

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ओम और नंदिता अलग हो गये, मामला अभी भी कोर्ट में है लेकिन दोनों, अब एक दूसरे को पहचानने से भी इंकार करते है जब कभी किसी फंक्शन में टकरा जाते है। उनका बेटा इशान अब सोलह साल का हो गया है और नंदिता के साथ रहता है ओम कभी-कभी उसे मिलने आते है।

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Mayapuri

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