INTERVIEW!! विलेन की इमेज बदलने वाले अभिनेता – प्रेम चोपड़ा

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मायापुरी अंक, 57, 1975

सभंवत: प्रेम चोपड़ा ऐसे पहले विलेन हैं जिन्होंने भारतीय फिल्मों में विलेन की इमेज बदली है वरना हिंदी फिल्मों में विलेन अधिकतर भयानक ही हुआ करते थे। प्रेम चोपड़ा के आने के पश्चात लोगों को लगा कि वाकई जिंदगी में ऐसे विलेन भी हो सकते हैं। प्रेम चोपड़ा ने असल में हीरो बनने के लिए ही फिल्मों में प्रवेश किया था। किंतु वह आज भी विलेन का विलेन ही है जबकि शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना विलेन से हीरो बन चुके हैं।

उस दिन राजकमल स्टूडियो में प्रेम चोपड़ा से पहले से निर्धारित समय पर भेंट हुई तो मैंने सबसे पहले यही प्रश्न किया

प्रेम जी आज जबकि हर कोई अपने करियर में एक परिवर्तन ला रहा है। कोई विलेन से हीरो तो कोई विलेन से चरित्र-अभिनेता बन रहा है। आप अभी तक कैसे विलेन बने हुए हैं।

हर एक अपने अपने ढंग से सोचता है और टाइप्ड होने से बचने की कोशिश करता है मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि विभिन्न प्रकार के रोल करूं किंतु मैं समझता हूं जो लोग अपने करियर में जमीन आसमान का अंतर लाए हैं, वे शायद हालात से समझौता नहीं कर पा रहें होंगे हालांकि मैं यह समझता हूं कि रजतपट पर हीरो का रोल निभा लेना आसान है किंतु खलनायक का रोल करना उतना ही मुश्किल है इसलिए मुश्किल काम को आसान करने में व्यस्त हूं प्रेम चोपड़ा ने कहा।

आप भी जब फिल्म लाइन में आए थे तो उद्देश्य तो आपका भी हीरो बनना ही रहा होगा फिर हीरो से विलेन कैसे बन गए? मैंने पूछा।

यह सही है कि मैं फिल्मों में हीरो बनने आया था किंतु हीरो के नाम पर मुझे सिवाए वायदों और आश्वासनों के और कुछ नही मिला उस जमाने में मैं टाइम्स ऑफ इंडिया में सर्कुलेशन मैनेजर था। फिर फिल्मों में काम करने का भूत बुरी तरह सवार था शिमला में स्टेज पर काम कर चुका था और इसलिए अपने कामयाब होने की संभावना भी थी और शायद इसलिए नौकरी को कुर्बान कर चुका था। ऐसे में मनोज कुमार से मुलाकात हुई और मनोज ने शहीद में एक्टर बनाकर पर्दे पर पेश कर दिया। किंतु पंजाबी फिल्म चौधरी कर्नेल सिंह के अलावा हीरो का रोल और किसी हिंदी फिल्म में नही मिला। हालांकि मेहबूब साहब ने वायदा किया था लेकिन उनकी फिल्म शुरू होने में देर हो रही थी। इसलिए इस दौरान ‘वह कौन थी’ में विलेन का रोल मिल गया। मैंने वह स्वीकार कर लिया और इस प्रकार विलेन बन गया और यहां एक बार शुरू में जो रोल कर लो बस उसकी छाप लग जाती है। बस फिर विलेन के रोल मिलने लगे और मैं विलेन बन गया। आजतक 70-80 फिल्मों में विलेन की भूमिका निभा चुका हूं। जिनमें चालीस-पचास सिल्वर जुबिली और चार-पांच गोल्डन जुबिली फिल्में है। प्रेम चोपड़ा ने बताया।

मेहबूब साहब के साथ आप की बात क्यों न बन सकी? मैंने पूछा।

मेहबूब साहब उस वक्त ‘सन ऑफ इंडिया’ शुरू कर चुके थे वे अपनी अगली फिल्म में हीरो लेना चाहते थे। किंतु ‘वह कौन थी’ में विलेन बनने के पश्चात जब उन्होंने फिल्म देखी तो बहुत नाराज़ हुए कहने लगे अगर तुम इंतजार करते तो मैं तुम्हें हीरो बना देता लेकिन अब जबकि तुम विलेन बन गए हो तो टॉप के विलेन बनोगे लेकिन मैं मजबूर था और अधिक इंतजार नही कर सकता था दरअसल शुरू में कलाकार की कोई पसंद नही होती उस समय वह केवल काम चाहता है और मुझे जो काम मिला, वह स्वीकार कर लिया लोग कहते हैं कि अगर शुरू मे विलेन न बनता तो आज हिंदुस्तान का बड़ा हीरो बन सकता था। बदकिस्मती से जहां जो एक बार विलेन बन जाता वह फिर लाख चाहने पर भी उस घेरे से निकल नही पाता आज शत्रुघ्न सिन्हा हीरो बन गया है

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किंतु पूर्ण रूप से बतौर हीरो वह स्वीकार नही हुआ है प्रेम चोपड़ा ने हसरत भरी आवाज में कहा लेकिन विलेन बनने के बावजूद मुझे दर्शकों का प्यार वैसा ही मिला है जैसा कि किसी हीरो को मिलता है दरअसल पब्लिक जानती है कि हम एक्टर हैं और हमारा काम ही यह है।

आपके स्ट्रगल दौर का कोई कड़वा अनुभव ? मैंने प्रेम चोपड़ा से पूछा।

हां, शुरू मे बी.आर. चोपड़ा से मिला था उन्होंने मिलने पर डिस्करेज किया बोले तुम ख्वामखाह हीरो बनने की कोशिश कर रहे हो, जाकर नौकरी करो मैंने कहा, नौकरी तो कर ही रहा हूं लेकिन वक्त आया तो उन्हीं चोपड़ा साहब की दास्तान के लिए मेरे पास आना पड़ा और मुझे मेरी प्राइस पर साइन करना पड़ा।

अब जबकि आप बतौर विलेन स्टैबललिश्ड हो चुके हैं, आप स्वंय किस प्रकार के रोल करने में रूचि रखते हैं ?

मैंने पूछा आप जो फिल्में स्वीकार करते हैं वह किस प्रकार साइन करते हैं।

मैं फिल्म साइन करने से पूर्व उसकी कहानी का स्कोप होता है तो वही काम करता हूं। इस समय में ट्रेडिशनल विलेन के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभा रहा हूं। जैसे दो मुसाफिर में ‘कॉमेडी’ ‘शाका’ में इमोशनल और ड्रामेटिक रोल, पापी देवता में कम्पलेक्स इमोशनल कर रहा हूं।

इसके अलावा मेरी तमन्ना कैरेक्टर रोल करने की है जैसे कि इंग्लिश फिल्मों में होते हैं उनकी कहानी आर्टिस्टों के इर्द गिर्द घूमती है। प्रेम चोपड़ा ने कहा।

आपने अब तक जो फिल्में की है, उनमें आपको अपने अभिनय के हिसाब से कौन सी फिल्म पंसद है ? मैंने पूछा

आप आये बहार आई और छुपा रूस्तम लेकिन यह दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। हालांकि लोगों ने बड़ी तारीफें की है। लेकिन यहां काम की नही फिल्म के चलने की ज्यादा महत्ता है आने वाली फिल्मों में मुझे ‘काला सोना’ का रोल बहुत पसंद है उसमें मेरा बड़ा टैरेफिक गेटअप है इसी प्रकार अजब तेरी सरकार का रोल भी बहुत बढ़िया है लेकिन सब फिल्म के चलने पर निर्भर करता है जैसे कटी पतंग हिम्मत दो रास्ते अपराध प्रेम नगर आदि फिल्मों में मेरा काम न केवल पसंद किया गया बल्कि ये फिल्में चली भी खूब प्रेम नगर में दिल्ली और मुंबई लायन क्लब की ओर से सर्वश्रेष्ठ खलनायक का अवॉर्ड भी मिला है और ‘उपकार’ में नेशनल अवॉर्ड भी मिला है फिल्म फेयर में तीन चार बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और विलेन के तौर पर नाम आया भी किंतु पैसे खर्च न करने के कारण  के अवार्ड से वंचित रहा। प्रेम चोपड़ा ने बेधड़क बताते हुए कहा।

इंडस्ट्री में हीरो लोग एक दूसरे पर छाने के लिए सामने वाले एक्टर का काम कटवा दिया करते है, क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? मैंने कई ऐसे उदाहरण देते हुए पूछा।

शुरू में ऐसा हुआ है लेकिन अब ऐसा नही होता। दरअसल अगर निर्देशक प्रभावशाली हो तो वह हर एक के साथ न्याय करता है। कुछ इस मामले में दिलीप साहब को बड़ा बदनाम करते हैं। मैंने उनके साथ फिल्म ‘बैराग’ में काम किया है लेकिन मेरी निजी अनुभव यह है कि वह जैसा अभिनय करते हैं। चाहते हैं कि सामने वाला एक्टर भी उसी तरह जमकर सामने आए। टक्कर का परफॉर्मेंस दे इसके लिए वह सामने वाले एक्टर को प्रोत्साहन देते है आप बैराग देखेंगे तो तो आपको इसका अनुमान हो जाएगा मुझे उम्मीद है कि बैराग के बाद मेरा भी नाम देश के बड़े कैरेक्टर आर्टिस्टों में होगा। ‘दास्तान’ में भी मैंने दिलीप साहब के साथ काम किया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट नही हुई किंतु दिलीप साहब के साथ तब भी लोगों ने मेरे काम की प्रशंसा की थी। प्रेम चोपड़ा ने गर्व से बताया।

हिंदी फिल्मों में विलेन का एक खास काम बलात्कार करना भी होता है। लेकिन प्राय: ऐसा भी होता है कि हीरोइन का-ऑपरेट नही करती। क्या वास्तव में ऐसा है ? मैंने पूछा।

यदि फिल्म में वास्तविकता लानी होती है तो हीरोइन जरूर का-ऑपरेट करती है जैसे मुमताज, हेमा मालिनी,. बिंदू आदि बड़ी कॉपरेटिव है लेकिन ऐसी भी हैं जो का-ऑपरेट नही करती। मैं ऐसी लड़कियों के नाम नहीं लूंगा लेकिन इतना जरूर है जो लड़कियों का-ऑपरेट नहीं करती उनमें खुद दम नही होता और वे एक्ट्रेस नहीं होती और ना इस जन्म में कभी एक्ट्रेस बन पायेंगी। प्रेम चोपड़ा ने कहा। दरअसल अभिनय करने के लिए कैरेक्टर में खो जाना पड़ता है। मैं जब अभिनय करता हूं तो भूल जाता हूं कि मैं प्रेम चोपड़ा हूं।

आपने अब तक जिन निर्देशकों के साथ काम किया है उनमें किससे अधिक प्रभावित हुए है।

मेरे निर्देशक सब ही बहुत अच्छे है। विशेषकर शक्ति सामंत, मनोज कुमार, राजकपूर, बी.आर. चोपड़ा आदि का तो जवाब ही नही है।

क्या कोई ऐसी भी निर्देशक है जिसके साथ आपने काम नहीं किया और साथ काम करने का इच्छुक हो?

ऐसे दो निर्देशक हैं, एक ऋषिकेश मुखर्जी और दूसरे गुलजार इनमें ऋषिदा ने मुझे वचन दिया है कि वे मुझे अपनी एक फिल्म में बतौर कॉमेडियन ब्रेक देंगे ताकि मेरे इमेज को तोड़ सके प्रेम चोपड़ा ने कहा क्योंकि कुछ निर्देशकों का ख्याल है कि मैं जैकलेमन की तरह कॉमेडी रोल में अधिक जौहर दिखा सकता हूं।

क्या आपकी कोई विशेष प्रकार को रोल करने की अभिलाषा है?

मैं एक तो इंगलिश फिल्म पैटर्न में वैसा आर्मी जनरल का रोल था, वैसा रोल करना चाहता हूं और दूसरे हिटलर की भूमिका अदा करने की ख्वाहिश है हालांकि हिटलर भी विलेन था। प्रेम चोपड़ा ने बताया।

सुना है इस छोटी-सी इंडस्ट्री में हीरोज़ ने अपने अपने कैम्प बना रहे हैं। अगर ऐसा है तो आप किस कैम्प से संबंध रखते हैं ?  मैंने पूछा।

दिलीप साहब और देव आनंद की तरह मैं अपने काम से काम रखता हूं मैं किसी प्रकार की पॉलिटिक्स में नही पड़ता इसीलिए धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, देव आनंद, दिलीप कुमार सभी हीरोज के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे है। एक्टिंग में मेरा अपना स्टाइल है। इसलिए सारे हीरोज़ के साथ एडजस्ट हो जाता हूं प्रेम चोपड़ा ने कहा इसका पता आपको मेरी इन फिल्मों से हो जाएगा जैसे ‘लगाम’ ‘एक और एक ग्यारह’ ‘आजाद’ ‘007’ ‘फंदेबाज’ ‘राजा’ ‘बारूद’ ‘सन्यासी’ ‘पापी देवता’ ‘दो अनजाने’ ‘महाचोर’ ‘पापी’ ‘दी ग्रेट गैम्बलर’ और प्रेम जी की  ‘धर्म ईमान’ आदि।

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क्या आपकी ऐसी कोई अभिलाषा है जो अभी तक पूरी न हुई हो और आप उसे पूरा करना चाहते हो? मैंने पूछा।

क्यों नही मैं निर्देशक बनना चाहता हूं स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है साल डेढ़ साल के बाद मैं वह फिल्म शुरू करूंगा प्रेम चोपड़ा ने कहा।

‘मायापुरी’ के बारे में आपके कया विचार है ? मैंने अंतिम प्रश्न पूछा।

‘मायापुरी’ बड़ी नीट एण्ड क्लीन पत्रिका है। ऐसी पत्रिका दूसरी कोई भी नही है। बधाई हो प्रेम चोपड़ा ने कहा।

अब जबकि सारे लोग अपनी इमेज को तोड़ने पर लगे हुए है। प्रेम चोपड़ा भी इमेज बदलना चाहता है। लेकिन वह इमेज कब और किस तरह टूटेगी यह अभी तक कोई नही जानता?v


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