मूवी रिव्यू: ‘बदलापुर’ हीरो बना जीरो, विलन बना हीरो

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जब एक खुशहाल छोटी सी फैमिली जिसमें बीवी और एक प्यारा सा बच्चा अचानक छीन लिये जाये या मार दिये जाये तो आप स्वयं सोच सकते हैं कि उस पति और एक पिता पर क्या गुजरेगी । क्या वो जिन्दगी भर चैन से बैठ पायेगा या अपनी बीवी और बच्चे के हत्यारे से बदला लेना ही अपने जीवन का मकसद बना लेगा ? यही थॅाट है निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म ‘बदलापुर ’ का ।

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वरूण धवन एक एड कंपनी में काम करता है । वो अपनी खूबसूरत बीवी यामी गौतम और बच्चे के साथ बहुत खुश है । लेकिन एक दिन उस वक्त उसकी जिन्दगी बेरंग हो जाती है जब दो डकैत नवाजूद्दीन और विनय पाठक एक बैंक से करोड़ों की राॅबरी कर यामी गोतम और उसके बच्चे को बंधक बना उन्हीं की गाड़ी यूज करते हैं। रास्ते में जब यामी उनका विरोध करती है तो नवाजू उसका बच्चा बाहर फेंक देता है और यामी को गोली मार देता है ।बाद में दोनों की मौत हो जाती है । नवाजू पुलिस द्धारा पकड़ा जाता है लेकिन इससे पहले वो अपने साथी विनय पाठक को पैसे के साथ फरार करवाने में कामयाब हो जाता है।

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बाद में वो पुलिस को किसी भी तरह अपने साथी का नाम नहीं बताता। लिहाजा मर्डर के तहत उसे बीस साल की जेल होती है ।अपनी बीवी ओर बच्चे की मौत का बदला लेने के लिये तड़पता वरूण नवाजू के साथी के बारे में जानकारी हासिल करने के लिये एक डिटेक्टिव अश्वनी को अपाइंट करता है । अश्वनी सिर्फ इतना ही पता लगा पाती है कि नवाजू की एक गर्ल फ्रेैंड हुमा कुरेशी है जो एक कालगर्ल है । वरूण उससे भी नवाजू के साथी का नाम नहीं जान पाता ।इसी तरह पंद्रह साल बीत जाते हैं । एक दिन वरूण के पास एक एनजीओ की मेंबर दिव्या दत्ता आती है वो उसे बताती है कि जेल में बंद नवाजू को केंसर हो गया है वो सिर्फ साल भर का मेहमान है । लेकिन उसकी इच्छा अपने घर जाकर मरने की है । उसकी इच्छा उसे माफी देकर वो पूरी कर सकता है । लेकिन वरूण उसे मना कर देता है । एक दिन वरूण के पास नवाजू की मां प्रोतिमा कनन आकर कहती है कि वो अगर उसके बेटे को माफी दे दे तो वो उसे उसके साथी का नाम बता देगी।

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विनय के बारे में जानकर वरूण उसे थैंक्स करने पूना जाता है तो उसे पता चलता है कि विनय लूट के पैसे से अपनी खूबसूरत पत्नि राधिका आप्टे के साथ एश कर रहा है उसका एक रेस्तरा भी हैं । वरूण उसकी पत्नि के सहारे उसके करीब आकर उसे अपने बारे में बताता है । तो उसकी पत्नि उसे बताती है कि उसका पति हत्यारा नहीं है । बाद में वो उनसे एक सौदा करता है कि विनय नवाजू का हिस्सा उसे देगा क्योंकि उसकी जगह नवाजू को उसका हिस्सा वो खुद देने जायेगा । लेकिन बाद में वरूण पैसा लेकर विनय और उसकी पत्नि की हत्या कर देता है । और उन्हें एक जगह दफना देता है बाद में वो नवाजू की खबर लेता है और उसे बताता है कि उसने उसके साथी को मार दिया है लेकिन उसे वो इसलिए कुछ नहीं कहेगा क्योंकि छे महीने में तो वो वैसे ही मर जायेगा । जब नवाजू को पता चलता हे कि उस केस की जांच करने वाला आफिसर विनय और उसकी पत्नि की हत्या के जुर्म में वरूण को अरेस्ट करने वाला है तो वो प्राश्चित करते हुए वरूण का जुर्म अपने सिर लेते हुए जेल चला जाता है । नवाजू के मरने के बाद उसकी प्रेमिका हुमा वरूण से आकर पूछती है कि वो दो निर्दोष लोगों की हत्या कर चुका है और उसके किये जुर्म को अपने सर ले नवाजू जेल चला गया और फिर मर गया । अब बदला तो पूरा हो चुका अब आगे वो क्या करेगा ?

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फिल्म अपनी कहानी के साथ प्रभवशाली ढंग से आगे बढ़ती है । इन्टरवल के बाद अचानक उस वक्त कहानी में नया मौड़ आ जाता है जब हीरो दो निर्दोश लोगों की हत्या कर देता है । यही से वो अपने लिये दर्शको के मन में उपजी हुई हमदर्दी खो देता है । रही सही कसर नवाजू उस वक्त पूरी कर देता है जब वो उसके जुर्म को खुद कुबूल कर जेल चला जाता है । इस तरह क्लाईमेैक्स पूरी तरह नवाजू के पक्ष में चला जाता है ।यानि एक तरह से अंत में हीरो जीरो और विलन हीरो हो जाता है । बेशक वरूण धवन ने बदले के लिये तड़पते हुये एंग्री यंगमैन की भूमिका को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से निभाया है । अपनी बीवी और बच्चे को याद करते कितने ही दृश्यों को उसने अपने शानदार अभिनय से यादगार बना दिया। नवाजूद्दीन एक बार फिर एक नये रोल के साथ एक सषक्त अभिनेता के तौर पर सामने आते हैं । इससे पता चलता है कि वे कितने बड़े अभिनेता हैं क्योंकि‘किक’ के बाद एक बार फिर उन्होंने अपने अभिनय से एक साधारण सी नगेटिव भूमिका को खास बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी । यहां तक क्लाईमेंक्स में तो वे हीरो को पछाड़ते हुये खुद हीरो बन जाते हैं । यामी गौतम अपनी छोटी सी भूमिका में आकर्शित करती है । लेकिन हुमा कुरेशी ने एक प्रेमिका और कालगर्ल को एक टेंªड अभिनेत्री की तरह निभाया है ।

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राधिका आप्टे, विनय पाठक, दिव्या दत्ता,अश्वनि तथा मुरली शर्मा आदि कलाकारों ने भी सुदंर अभिनय किया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बढि़या है वो फिल्म की गति कहीं भी कम नहीं होने देता । सवांद एक हद तक अच्छे और रीयल लगती लोकेशन तथा बैकग्राउंड म्युजिक फिल्म की जान है। श्रीराम राघवन फिल्म को जरा भी लूज नहीं होने देते, और न ही कोई कलाकार उनके काबू से बाहर जाता दिखाई देता है । वरूण के साथ हमदर्दी जताता दर्षक जब अचानक एक हद तक उसके खिलाफ हो जाता है जब वो विनय पाठक ओर राधिका आप्टे दो निर्दोष लोगों की हत्या करता है । उसके साथ दर्शक बची खुची हमदर्दी भी उस वक्त खत्म हो तामी है जब नवाजू उसे कहता है कि मैने तो तुम्हारी बीवी को उस वक्त मारा था जब मेरा दिमाग मेरे काबू में नहीं था लेकिन विनय पाठक और उसकी निर्दोष बीवी को तो तुमने ठंडे दिमाग से प्रीप्लान होकर मारा है । एक वक्त वो अपना पैसा वरूण के पास छौड़ते हुए उसका जुर्म अपने सिर लेकर षहीद हो जाता है यानि पूरी तरह दर्शक और उसकी हमदर्दी नवाजू की तरफ हो जाती है । इस तरह अंत में हीरो जीरो और विलन हीरो बन जाता है ।


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