मूवी रिव्यू: अभिनय में सफल मनोरंजन में विफल फिल्म ‘ दिल धड़कने दो’

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इन दिनों फिल्मकार फिल्मों के द्धारा हर वर्ग को दर्शकों की अदालत में खड़ा कर रहे हैं, वो भी मनोरजंक तरीके से । जोया अख्तर की फिल्म ‘ दिल धड़कने दो’ भारतीय परंपरा तथा संस्कारों के तहत पिछले दिनों रिलीज हुई पीके या तनु वेडस मनु की अगली कड़ी कही जा सकती है । इस बार जोया ने अभिजात्य वर्ग के दोहरे चहरों को उजागर किया है ।

कहानी

दिल्ली के व्यवयसाई अनिल कपूर ऐसे शख्स है जो बेशक अमीर आदमी है बावजूद इसके वे पुरानी परंपराओं में यकीन करते हैं । इसी तरह उनकी बीवी शेफाली से बेशक उनकी लव मैरीज है लेकिन पिछले तीस सालों केे दौरान विचारों के तहत उनकी कभी नहीं बनी । अनिल कपूर की तानाशाही की षिकार उनकी बेटी प्रियंका चैपड़ा हो चुकी हैै। जो बिजनेस में बहुत ही योग्यता रखती है लेकिन अनिल का मानना है बेटी तो अपने घर चली जायेगी इसलिये उत्तराधिकारी सिर्फ बेटा ही होता है इसलिये उनका काम संभालने की जिम्मेदारी उसी की है बेटी की नहीं । यहां तक वे अपनी बेटी की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ राहुल बोस से कर देते हैं जबकि वो उनके मैनेजर के बेटे फरहान अख्तर को पसंद करती थी । इससे बचने के लिये वे फरहान को भी पढ़ने के बहाने अमेरिका भेज देते हैं । रही बात उनके बेटे रणवीर सिंह की तो उसे उनके बिजनिस में जरा भी दिलचस्पी नहीे वो पाइलेट बनना चाहता है ।

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शादी के बाद प्रियंका अपना बिजनिस षुरू करती है और सफल होकर दिखाती है । एक वक्त ऐसा भी आता है जब अनिल कपूर का बिजनिस बेहद घाटे में आ जाता है लिहाजा वे अपने शेयर बेचने के लिये अपने प्रतिद्वंदी बिजनिसमैन से उसकी इकलौती लड़की जिसकी शादी एक बार टूट चुकी है के साथ रणवीर की षादी कर देना चाहते हैं जबकि वो एक मुस्लिम लड़की अनुश्का शर्मा से प्यार करने लगता है । इधर चाहकर भी प्रियंका फरहान को नहीं भुला पाई इसलिये वो अब राहुल से तलाक ले अपने मांबाप की गलती सुधारना चाहती है । जिससे बाद में उनका बिजनिस उनके ही हाथ में रहे । इसके लिये वे अपनी मैरीज एनीवर्सरी के नाम पर एक बड़ा क्रूज किराये पर लेते हैं और उस पर अपने सभी सगे संबंधियों और दोस्तों को आमंत्रित करते है । इस क्रूज पर आये अमीरों के बारे में तो उनके अंदर बाहर के बारे में पता चलता ही हैं साथ ही ये भी पता चलता है कि ये लोग अपने स्टेट्स के लिये अपनी औलाद का भी इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते । एक वक्त ऐसा आता है जब उनकी औलाद ही उन्हें एहसास दिलाती है कि वे कैसी जिन्दगी जी रहे हैं । इसलिये एक वक्त ऐसा आता है जब अनिल कपूर यानि कमल मेहरा का परिवार पूरी तरह से घुटन से बाहर निकल आता है ।
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फिल्म

दिल धड़कने दो हाई सोसाईटी या अभिजात्य वर्ग की प्रभावशाली तरीके से पोल खोलते हुये बताती है कि सिर्फ मिडिल क्लास ही नहीं बल्कि संर्कीणता अमीरों में भी उतनी ही होती है । इस बात का खुलासा वक्त वक्त पर सूत्रधार के रूप में कुत्ता प्लूटो जिसे कभी फरहान ने प्रियंका को उपहार स्वरूप दिया था करता रहता है । उसे आवाज दी है आमिर खान ने । जंहा तक अभिनय की बात की जाये तो अनिल कपूर ने रिश्तों को लेकर खोखले हो चुके परिवार के मुखिया की भूमिका को पूरी शाइस्तगी से निभाया है उनका साथ शेफाली शाह ने एक परिपक्व अभिनेत्री के तौर पर दिया है । प्रियंका और रणवीर सिंह ने एक बार साबित किया है वे लंबी रेस के घोड़े हैं । खासकर रणवीर ने हल्के फुल्के तथा सीरियस दृश्यों को एक अनुभवी अदाकार की तरह निभाया है । फरहान अख्तर और अनुश्का शर्मा ने सहयोगी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है ।  बाकी आर्टिस्ट भी अच्छे सहयोगी साबित हुये ।

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निर्देशक

इसमें काई दो राय नहीं कि जोया अख्तर एक बेहतरीन लेखक निर्देशक है। इस बार भी उसे रीमा कागती तथा फरहान अख्तर का अच्छा सहयोग मिला है । उसने कास्टिंग भी बहुत अच्छी चुनी । लेकिन इस बार उन्होंने मनोरजंन कम पर्यटन पर ज्यादा ध्यान दिया है । दूसरे कहानी इतने विस्तार से कहीं गई कि फिल्म काफी लंबी हो गई है । इसलिये आधा दर्जन देशों की सैर करवाने के बाद भी फिल्म प्रभाव नहीं डाल पाती । यानि ये जोया पहली फिल्मों से कुछ कमजोर फिल्म है ।

संगीत

शंकर एहसान लाॅय को कुछ ज्यादा करने का अवसर नहीं मिल पाया। फिर भी हैल्लो हैल्लो नामक सामुहिक गीत काफी अच्छा बन पड़ा है ।

फिल्म क्यों देखें
अगर आप इन सितारों का अच्छा अभिनय देखना चाहते हैं तो फिल्म देख सकते हैं ।


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Mayapuri

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