मूवी रिव्यू: फिल्म दो चेहरे – बीस साल पुराने ‘ दो चेहरे’

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इस सप्ताह की फिल्म

रेटिंग *

फिल्में नये लोगों की ही नहीं अटकती बल्कि बड़े स्टारों की भी अटक जाती है । अशोक गायकवाड़ द्धारा निर्देशित तथा निार्माता मनोज नंदवाना की फिल्म ‘ दो चेहरे’ तकरीबन पंदह बीस साल पुरानी मल्टी स्टार्र फिल्म है जो करीब पंदरह बीस साल बाद इस सप्ताह बड़े पर्दे का मुहूं देख पाई । इस फिल्म में शत्रुध्न सिन्हा,सुनील शेट्टी, फराह,शक्ति कपूर, किरण कुमार, कृष्णा अभिषेक तथा मोहनीश बहल सरीखे अपने जमाने का स्टार्स है । इनके अलावा रवीना टंडन, साहिल खाना तथा निगार खान मेहमान कलाकार है । आप सोच सकते हैं कि इतने बड़े बड़े स्टारों से भरी फिल्म भी अटक सकती हैं तो फिर किसी और फिल्म की बात कैसे की जाती है।

कहानी

शत्रुध्न सिन्हा पूना में टेक्सी चलाने वाले ऐसे शख्स हैं जो बात बात पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं । उनकी इस आदत से उनकी पत्नि फराह और कालेज में पढ़ने वाला भाई सुनील शेट्टी बहुत परेशान हैं ।एक दिन वे मुबंई के बहुत बड़े बिल्डर और गलत काम करने वाले बिजनिसमैन किरण कुमार के बेटे मोहनीश बहल को बुरी तरह पीट देते हैं । किरण कुमार इस बात का बदला इसका बदला सुनील को उस दिन मार कर लेता हैं जिस दिन उसकी षादी हो रही होती है । लिहाजा उसकी पत्नि रवीना टंडन सुहाग की सेज पर ही विधवा हो जाती है । इसके बाद शत्रु पूना छौड़ मुबंई आ जाते हैं यहां उनकी मदद उनका दोस्त षक्ति कपूर करता है जिसकी टेक्सियां किराये पर चलती है। एक दिन शत्रु एक ऐसे गुंडे को देखता है जिसकी शक्ल उसके भाई से मिलती है ।(सुनील शेट्टी डबल रोल में) शत्रु उसी में अपने भाई को देखने लगता हैं और उसे सुधारने की कोशिश करता है । सुनील जब शत्रु की मदद करता हैं तो किरण उसका दुश्मन बन जाता है और उसे घायल करवा देता है । यहां उसका चेहरा खराब हो जाता है उसका चेहरा वापस लाने के लिये बीस लाख की जरूरत है जिसे पूरा करता हैं किरण का दुश्मन सुरेन्द्र पाल । वो सुनील को नये चेहरे के तौर पर किरण कुमार के छोटे बेटे कृष्णा अभिषेक का चेहरा देता हैं (कृष्णा भी डबल रोल में) इस प्रकार वे सब मिलकर किरण का सामराज्य ध्वस्त करने में कामयाब रहते हैं ।

अभिनय औंर फिल्म

ये फिल्म उस वक्त की हैं जब अशोक गायकवाड़ निर्देशक के तौर पर सफल थे । तथा शत्रु, सुनील रवीना और फराह फार्म में थे । तथा कृष्णा अभिशेक उन दिनों अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा था । फिल्म पूरी तरह उस तरह की मसाला फिल्म हैं जैसी उन दिनों हुआ करती थी । लिहाजा सभी आर्टिस्टों का अभिनय भी उसी स्तर का हैं । फिल्म में सिर्फ दो गीत दिखाये गये हैं लेकिन फिल्म की लंबाई कम करने के लिये उनकी लंबाई भी कम कर दी गई । फिल्म में कितने ही सीन नदारद हैं बस उनका जिक्र भर कर दिया गया। इसी तरह सुनील शेट्टी तथा कुछ अन्य कलाकारों की डबिंग तक डबिंग आर्टिस्टों द्धारा कराई गई है । फिल्म को देखकर लगता है कि बस उसे किसी तरह रिलीज करना था ।

निर्देषक

अशोक गायकवाडं ने जिस वक्त ये फिल्म बनाई थी उस वक्त फिल्म का चेहरा कुछ और रहा होगा लेकिन रिलीज से पहले उसमें की गई भारी काटपीट ने फिल्म का पूरा रस निचोड़ लिया । इसलिये निर्देशन के बारे में कोई राय तय नहीं की जा सकती ।

क्यों देखें
अगर आप शत्रु, रवीना तथा सुनील की फिल्मों के फैन रहे हैं और उनकी रूकी हुई फिल्म का मजा लेना चाहते हैं तो फिल्म देख सकते हैं ।

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Mayapuri