मूवी रिव्यू: फिल्म‘ एक अद्भुत दक्षिणा, गुरू दक्षिणा’ फिल्म से अंत तक नहीं जुड़ पाता दर्शक

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नई जनरेशन के लिये  गुरू षब्द आजकल आउट आॅफ फैशन हो चुका हैं फिर भी ये शब्द आज भी सम्मानीय तो है । लेकिन  किरण फडनिस ने अपने द्धारा निर्देशित फिल्म‘ गुरू दक्षिणा’में अपने हीरो  के द्धारा एक अद्भुत दक्षिणा तक देने की बात कर दी है ।
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राजीव पिर्लई बचपन में एक अनाथ बच्चा था जिसका नृत्य कौशल और कविता घड़ने की योग्यता को देखते हुये गुरू गिरीष कर्नाड अपने आश्रम में ले आये थे । बाद में उन्होंने उस पर इतना विष्वास करना शुरू कर दिया, कि उसके बिना आश्रम में काई काम नहीं होता था । गुरू जी की एक बेटी है सुलगना पाणीग्रह । उसकी मां का उसके बचपन में ही देहांत हो गया था । अपने साथ सुलगना को भी राजीव ने नृत्य में प्रवीण कर दिया है । वो उसे प्यार भी करता है । आश्रम में रहने वाली रूपा गांगुली सुलगना और राजीव दोनों को ही एक मां की तरह प्यार करती है । एक बार राजीव और सुलगना को  पुरगना प्रदेश में जाने का अवसर मिलता है जो नक्सलवादीयों के लिये मषहूर है । वहां सुलगना छाउ डांसर आदिवासी राजेष श्रंगारपुरे से इतनी प्रभावित होती है कि उसे अपने आश्रम आने का न्योता दे देती है जो राजीव को जरा भी पंसद नही आता । एक दिन राजेश आश्रम  के विद्यार्थीयों को छाउ डांस सिखाने आ जाता है । और आनन फानन वो सुलगना पर इस तरह हाॅवी हो जाता है कि वो उससे सभी के खिलाफ शादी कर लेती है । सुलगना की इस हरकत पर गुरू जी का दिल टूट जाता है । लेकिन राजीव तो आश्रम छौड़ कहीे दूर पहाड़ों चला जाता है । वहां एक और लड़की उसे प्यार करने लगती है लेकिन राजीव को अब प्यार व्यार में विश्वास नहीं ।इधर राजेष के बारे में पता चलता है कि असल में वो एक नक्सलवादी के अलावा बहुत बड़ा अवसर वादी भी है । अब उसकी नजर आश्रम पर है जिसे हड़पकर वो एक अंग्रेज षिश्या के साथ लंदन भाग जाता चाहता है । जब ये बात सुलगना को पता चलती है तो वो राजीव को फोन कर बुलाती हैं इस बीच राजेश आश्रम अपने नाम करवाने के लिये गुरू जी पर हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर देता है । इस बीच राजीव वहां आ जाता है तो उसे सारी बातों का पता चलता है तो उसे लगता है कि अब गुरू जी को गुरू दक्षिणा देने का समय आ गया है और वह उन्हें अद्भुत गुरू दक्षिणा देने का निष्चय करता है इसी बीच गुरू जी का देहांत हो जाता है ।बाद में राजीव राजेश को जान से मारकर पुलिस के हवाले हो जाता है । जेल से छूटने तक वो लगभग बूढ़ा हो जाता है लेकिन वो वापस आश्रम नहीं बल्कि वापस पहाड़ों में जाकर दम तौड़ता है ।
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फिल्म में गुरू शिष्य का रिश्ता बताने की कोशिश की है । इस रिश्ते को लेकर फिल्म हर तरह से नकली हो गई है । दूसरे हीरोइन को पता है कि हीरो उसे बचपन से प्यार करता हैइस बात को वो भी जानती है । बावजूद वो एक ऐसे शख्स से प्रभावित हो जाती है जो पूरी तरह से जंगली आदमी है । जबकि राजेश कहीं से भी आदिवासी नहीं लगता बल्कि एक तेज तर्रार चालाक आदमी लगता है । सबसे बड़ी बात कि नक्सली तो कभी अपनों से बेइमानी नहीं करते । लेकिन राजेश ऐसा नक्सली है जो अपने साथियों के अलावा अपनी पत्नि और गुरूजी पर ही घात लगाये हुए है । हालांकि निर्देशक ने पूरे पैशन के साथ फिल्म बनाई हैं लेकिन फिल्म की कहानी हजम नहीं हो पाती । पटकथा थोड़ी लूज है और फिल्म की गति बेहद धीमी । फिल्म की लोकशसं अच्छी हैं । राजीव कन्नड़ फिल्मों का स्टार है उसने अपनी भूमिका एक सधे हुए अभिनेता की तरह निभाई है । सुलगना सुंदर हैं उसने भी  अपने रोल के साथ न्याय किया है । राजेश श्रंगारपुरे पूरे समय ओवर एक्टिंग का शिकार रहे है । गिरीश कर्नाड गुरू जी को साकार करते नजर आते हैं  लेकिन रूपा गांगुली एक लंबे वक्त के बाद दिखाई थी अपनी उम्र से मैच करती भूमिका में । फिल्म के कुछ गीत काफी बेहतर बन पड़े हैं । लेकिन सभी कुछ अच्छा होने के बाद भी फिल्म से दर्शक अपने आपको फिल्म से नहीं जोड़ पाता ।
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-ष्याम षर्मा

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